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Wednesday, October 9, 2019

चूत के ऊपर माल गिरा दिया

Antarvasna, hindi sex kahani:


Chut ke upar maal gira diya मैं अपनी बहन के पास जब गया हुआ था और वहां से मैं अहमदाबाद लौट रहा था। मैं जब अहमदाबाद ट्रेन से आ रहा था तो मेरे सामने एक फैमिली बैठी हुई थी वह लोग अहमदाबाद में ही रहते थे तो मेरी उनसे काफी अच्छी बातचीत होने लगी और मुझे सफर का कुछ पता ही नहीं चला। जब मैं रेलवे स्टेशन पहुंचा तो वहां पर मुझे मेरा छोटा भाई लेने के लिए आया हुआ था। मैं अपनी बहन के पास करीब दो दिनों तक रुका और उसके बाद मैं वापस लौट आया था वह काफी ज्यादा परेशान थी क्योंकि उसके पति और उसके बीच कुछ भी ठीक नहीं चल रहा था इसलिए उसने मुझे कहा था कि तुम कुछ दिनों के लिए जयपुर आ जाओ। जब मैं जयपुर गया तो उसके पति को मैंने काफी समझाया मेरे समझाने के बाद उनके बीच सब कुछ ठीक हो चुका था। पापा और मम्मी भी इस बात से बड़े परेशान थे पापा को तो अपने काम से बिल्कुल भी फुर्सत नहीं मिल पाती थी क्योंकि वह गारमेंट शॉप चलाते हैं और उनके पास बिल्कुल भी समय नहीं हो पाता था।


पापा ने मुझे कहा कि राजेश बेटा तुम भी मेरे साथ काम संभालना शुरू कर दो तो मैंने उन्हें कहा हां पापा। जल्द ही मैंने अपनी जॉब छोड़ दी और उसके बाद मैं पापा के साथ उनका काम संभालने लगा। मैं काम को अच्छे से संभाल रहा था तो पापा को भी अब समय मिल जाया करता था अब हमारे घर में सब कुछ ठीक होने लगा था। एक दिन मां मुझे कहने लगी कि राजेश बेटा तुम्हारे लिए हम लड़की देखने लगे हैं मैंने मां से कहा कि मां अभी मैं शादी के लिए बिल्कुल भी तैयार नहीं हूं मुझे कुछ समय चाहिए। मां कहने लगी कि लेकिन बेटा तुम शादी कर लो मैंने मां को कहा कि मां इतनी भी क्या जल्दी हैं मैं अभी शादी करना ही नहीं चाहता हूं परंतु मेरे परिवार वालों के दबाव के आगे मुझे शादी करनी पड़ी। मेरी शादी मीनाक्षी से हो गयी लेकिन मीनाक्षी और मेरे बीच कुछ भी ठीक नहीं चल रहा था हम दोनों के बीच किसी भी बात को लेकर सहमति नहीं बनती थी और ना ही मीनाक्षी का व्यवहार मेरे परिवार के प्रति बिल्कुल भी ठीक था इसलिए मैंने सोच लिया था की मैं मीनाक्षी से डिवोर्स ही ले लूंगा।


मीनाक्षी से डिवोर्स लेना इतना आसान भी तो नहीं था वह मुझे डिवोर्स देने के लिए तैयार नहीं थी परंतु किसी तरीके से मैंने मीनाक्षी को समझाया और मीनाक्षी और मेरे बीच में डिवोर्स हो गया। हम दोनों के बीच में डिवोर्स हो चुका था  अब मैं और मीनाक्षी एक-दूसरे से अलग हो चुके थे और हम दोनों की जिंदगी अच्छे से चलने लगी थी मैं इस बात से काफी खुश था। जब मीनाक्षी से मेरा डिवोर्स हुआ तब मैं अपनी जिंदगी अपने तरीके से जीना चाहता था कुछ समय के लिए मैंने पापा से कहा कि मैं चाहता था कि हम लोग किसी फैमिली टूर पर साथ में जाएं। मेरी बहन भी उस वक्त घर आई हुई थी इसलिए हम लोग घूमने के लिए साथ में गए और जब हम लोग वापस लौटे तो सब कुछ बड़ा ही सामान्य हो चुका था। हमारे पड़ोस में एक फैमिली शिफ्ट हो गई थी जो कि कुछ दिनों पहले ही रहने के लिए आई थी वह लोग उस वक्त आए जब हम लोग घूमने के लिए माउंट आबू गाए हुए थे अब उन लोगों की पहचान हमसे होने लगी थी। उनकी बेटी वसुंधरा जो की मुझे पहली नजर में ही भा गई थी वसुंधरा को मेरे डिवोर्स के बारे में पता था इसलिए उससे मेरी बात अभी तक हो नहीं पाई थी। मैं और वसुंधरा एक दूसरे से कभी बात नहीं करते थे परंतु एक दिन जब मैंने वसुंधरा से पहली बार बात की तो मुझे काफी अच्छा लगा और वसुंधरा को भी मुझसे बात कर के बड़ा अच्छा लगा। वसुंधरा ने उस दिन मेरे डिवोर्स के बारे में पूछा तो मैंने उसे अपने डिवोर्स के बारे में बता दिया था क्योंकि मैं नहीं चाहता था कि वसुंधरा से मैं कुछ भी छुपाऊँ, मैंने वसुंधरा को अपने और मीनाक्षी के डिवोर्स के बारे में बता दिया था। वसुंधरा के परिवार कि और हमारे परिवार कि काफी अच्छे से बनने लगी थी इसलिए वह लोग हमारे घर पर भी आया करते थे। एक दिन मैंने वसुंधरा को कहा कि मैं आज तुम्हारे साथ कुछ समय बिताना चाहता हूं तो वसुंधरा कहने लगी लेकिन आज तो मैं तुम्हारे साथ आ नहीं पाऊंगी क्योंकि हमारे घर पर हमारे कुछ मेहमान आने वाले हैं। मैंने वसुंधरा को कहा कि ठीक है तो क्या कल तुम मेरे साथ डिनर पर चल सकती हो तो वसुंधरा कहने लगी कि हां मैं तुम्हारे साथ कल डिनर पर आ जाऊंगी।


वसुंधरा ने भी अब मेरी बात मान ली थी और मैं अगले दिन वसुंधरा को अपने साथ डिनर पर ले गया। जब हम दोनों उस दिन साथ में डिनर पर गए तो मैंने वसुंधरा से अपने दिल की बात कही वसुंधरा मुझे कहने लगी कि लेकिन राजेश मेरे परिवार वाले कभी भी हम दोनों के रिश्ते को स्वीकार नहीं करेंगे। मैंने वसुंधरा से कहा कि मैं सिर्फ यह जानना चाहता हूं कि तुम मुझे एक्सेप्ट कर सकती हो या नहीं। वसुंधरा भी मेरी बात मान गई और उसने मुझे कहा कि मुझे तुम में कभी भी कोई कमी नहीं नजर आई और मैं भी तुमसे प्यार करने लगी हूँ। यह बात सुनकर मैं काफी खुश था वसुंधरा और मैं अब एक दूसरे के साथ ज्यादा से ज्यादा समय बिताते मैं वसुंधरा के साथ बहुत खुश था। हम दोनों एक दूसरे के काफी करीब आ चुके थे मेरी जिंदगी में वसुंधरा के आ जाने से जैसे मेरी जिंदगी पूरी हो गयी हो। वसुंधरा के परिवार वालों को इस बारे में पता चल चुका था और उन्होंने वसुंधरा को काफी समझाने की कोशिश की लेकिन वसुंधरा मेरे साथ खड़ी थी और वह चाहती थी कि हम दोनों शादी कर ले। मैंने वसुंधरा को कहा कि मैं बहुत ही खुश हूं कि तुम ने मेरा साथ दिया वसुंधरा के परिवार वालों को भी मेरे और वसुंधरा के रिश्ते को स्वीकार करना पड़ा और फिर हम दोनों ने शादी कर ली।


हम दोनों की शादी हो गई और हम दोनों काफी खुश थे वसुंधरा मेरी पत्नी बन चुकी थी। शादी की पहली रात वसुंधरा और मैं साथ ही एक ही बिस्तर पर थे। हम दोनो खुश थे मैंने उसका हाथ पकड़ लिया जब मैंने वसुंधरा का हाथ पकड़ा तो वह शर्माने लगी। वह मुझे कहने लगी राजेश मुझे बड़ा डर लग रहा है मैंने उसे कहा अब तुम मेरी पत्नी बन चुकी हो तुम्हे डरने की क्या जरूरत है यह सब तो एक न एक दिन होना ही है और यह कहकर मैंने वसुंधरा को बिस्तर पर लेटा दिया और मैने लाइट को बुझा दिया। मैंने वसुंधरा के बदन को छुआ मुझे अच्छा लग रहा था। मैं वसुंधरा के गोरे बदन को महसूस कर रहा था। मेरे अंदर का ज्वालामुखी बढने लगा था मैंने वसुंधरा के बदन को अच्छे से सहलाना शुरु कर दिया था। वह पूरी तरीके से गरम हो गई थी। मैंने वसुंधरा के होठों को चूमना शुरू कर दिया मैने उसके होठों से खून निकाल दिया। मैंने उसकी चूत से पानी निकाल दिया था। अब मैंने वसुंधरा के कपडे खोलकर उसके स्तनों को दबाने लगा। मैं उसके स्तनों को दबाता तो मुझे बहुत ही मजा आता वह पूरी तरीके से मचलने लगी थी। मैं बिल्कुल भी रह नहीं पा रहा था मै उसकी आग को पूरी तरीके से बढा चुका था। मैंने अपने लंड को बाहर निकाला मैंने वसुंधरा से कहा तुम मेरे लंड को अपने मुंह में लेकर चूसो। वह शर्माने लगी लेकिन मेरे कहने पर वह मेरी बात मान गई वह अब मेरे लंड को चूसने लगी। वह जिस तरह से मेरे लंड को चूस रही थी उस से मुझे मजा आ रहा था। वसुंधरा ने मेरे लंड को बड़े अच्छे से चूसा तो उस से मेरी गर्मी बढ़ाती जाती। मैं भी वसुंधरा की चूत को चाटने लगा मै उसकी चूत को चाट रहा था तो उसे बहुत ज्यादा मजा आने लगा था। मुझे वसुंधरा की मुलायम चूत को चाटने में इतना मजा आने लगा कि उसकी चूत से निकलता हुआ पानी बहुत ज्यादा बढ़ने लगा था।


मैंने वसुंधरा की चूत को 2 मिनट तक चाटा। मैंने अपने मोटे लंड को उसकी चूत के अंदर डाला वह जोर से चिल्लाई और मुझे कहने लगी मुझे बहुत दर्द हो रहा है। मुझे मजा आने लगा था मैंने उसकी चूत के अंदर बाहर अपने लंड को बडी आसानी से करना शुरु कर दिया था उसकी चूत से खून बाहर निकल रहा था। वसुंधरा की चूत से अधिक मात्रा में खून निकलने लगा था। मुझे बहुत मजा आ रहा था काफी देर तक मैंने उसे अपने नीचे लेटाकर चोदा वसुंधरा ने अपने दोनों पैरों के बीच मे मुझे जकडना शुरु कर दिया। जब वह मुझे अपने पैरों के बीच में जकड़ने लगी तो मुझे ऐसा लग रहा था मै वसुंधरा को चोदता जाऊ मेरे धक्के तेज हो चुके थे और मेरा माल गिर गया। मै वसुंधरा के साथ लेटा था अब कुछ देर बाद मेरा लंड खडा होने लगा और वसुंधरा भी मेरे साथ सेक्स के लिए तैयार थी।


वह चाहती थी वह मेरे लंड को चूत मे ले। कुछ देर की चुम्मा चाटी के बाद मैने अपने लंड को वसुंधरा की योनि मे डाल दिया। वसुंधरा दर्द से मुझे कहने लगी मुझे तेजी से चोदो मुझे मजा आने लगा है मुझे बड़ा ही अच्छा लग रहा था। मैंने वसुंधरा के दोनों पैरों को चौड़ा किया मै उसे अब तेजी से चोदने लगा मुझे बहुत मजा आ रहा था। मेरे अंदर की गर्मी बढ़ती जा रही थी वसुंधरा मुझे कहने लगी मुझे तुम ऐसे ही धक्के मारते रहो। मैं वसुंधरा को जिस तरह धक्के मार रहा था उससे मुझे बड़ा मजा आने लगा था। मेरे अंदर की गर्मी बहुत ज्यादा बढ़ने लगी थी। वह सिसकियां ले रही थी उसकी मादक सिसकारियां इतनी अधिक होने लगी थी कि मेरे लंड से पानी बाहर निकलने लगा था। मैंने अब वसुंधरा को तेज गति से धक्के मारने शुरू कर दिए थे वसुंधरा का बदन हिल रहा था। हमारी गर्मी बढती जा रही थी जब वसुंधरा की चूत मेरे लंड से टकराती तो मुझे और भी ज्यादा मजा आता। मेरे अंदर की आग बाहर आ चुकी थी मैंने वसुंधरा की चूत के अंदर से लंड को बाहर निकाला मेरा माल अब बाहर आ चुका था। मैने जब अपने माल को वसुंधरा की चूत के ऊपर गिराया तो उसे मजा आ गया था और मुझे भी मजा आ गया था।



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