मुझे दूसरा पति मान लिया

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Antarvasna, hindi sex kahani: मैं और संध्या अपने फैमिली फ्रेंड के घर से वापस लौट रहे थे हम लोग उनके घर पर डिनर करने के लिए गए हुए थे। संध्या मुझे कहने लगी कि रोहित क्या कल आप फ्री हैं तो मैंने संध्या को कहा नहीं कल तो मेरे पास समय नहीं हो पाएगा लेकिन मैं जल्दी आने की कोशिश करूंगा। संध्या कहने लगी कि ठीक है अगर आप जल्दी आ जाएंगे तो मुझे कुछ जरूरी काम था मैंने संध्या को कहा लेकिन तुम्हें ऐसा क्या जरूरी काम था। वह कहने लगी कि मैं सोच रही थी कल अपनी दीदी को घर पर बुला लूँ काफी दिन हो गए दीदी से मिली भी नहीं थी यदि आप घर पर रहेंगे तो ज्यादा अच्छा रहेगा। मैंने संध्या को कहा कि तुम कल उन्हें डिनर पर इनवाइट क्यो नहीं कर लेती उनके पति भी कल घर पर आ जाएंगे तो संध्या कहने लगी ठीक है मैं इस बारे में कल दीदी से बात करती हूं। संध्या की दीदी स्कूल में टीचर है उनके पास समय काफी कम होता है वह सिर्फ छुट्टी के दिन ही फ्री होती हैं और शायद उनकी उस दिन छुट्टी थी। हम लोग भी घर पहुंच चुके थे और अगले दिन संध्या ने अपनी दीदी को शाम के वक्त पर घर पर बुला दिया था। मैं और संध्या ही साथ में रहते हैं हमारी शादी को अभी 3 वर्ष ही हुए हैं लेकिन हम लोग अपने परिवार से अलग मुंबई में रहते हैं।


मैं मुंबई में करीब 6 साल पहले आ गया था 6 साल पहले जब मैं मुंबई में आया तो मैंने अपना बिजनेस मुंबई में शुरू किया और मेरा बिजनेस अच्छा चलने लगा जिससे कि मैंने मुंबई में घर खरीद लिया जब मेरी शादी संध्या से हुई तो उसके बाद हम दोनों मुंबई में रहने लगे। शाम के वक्त संध्या की दीदी और संध्या के जीजा जी हमारे घर पर आ गए थे उस दिन मैं भी घर पर जल्दी आ गया जब मैं घर पर पहुंचा तो मैंने देखा वह लोग घर पर आ चुके है संध्या मुझसे कहने लगी कि रोहित हम लोग आपका इंतजार कर रहे थे। संध्या के जीजा जी बड़े ही अच्छे व्यक्ति हैं वह बैंक में जॉब करते हैं और हम दोनों साथ में बैठ कर बात करने लगे। मैंने उनसे कहा कि क्या आप ड्रिंक करते हैं तो वह कहने लगे हां कभी कबार कर लिया करता हूं उनसे मैंने यह बात पहली बार ही पूछी थी क्योंकि उनसे मेरी इतनी ज्यादा बात नहीं हो पाती थी। हम लोगों ने साथ में ड्रिंक की और उसके बाद हम लोगों ने साथ में खाना खाया वह उस रात हमारे घर पर ही रुके काफी देर तक संध्या और उसकी दीदी आपस में बात करते रहे मैं तो अपने रूम में सो चुका था और संध्या के जीजाजी भी सो चुके थे।


अगले दिन सुबह वह लोग जल्दी घर चले गए जब वह लोग गए तो उसके बाद मैंने संध्या को कहा कि अब मैं भी अपने काम पर जा रहा हूं। संध्या मुझे कहने लगी कि ठीक है मैं आपके लिए नाश्ता तैयार कर देती हूं संध्या की दीदी और जीजा जी सुबह जल्दी ही घर से निकल गए थे क्योंकि उन लोगों को अपने काम पर जाना था। संध्या ने मेरे लिए नाश्ता तैयार किया और मैं भी नाश्ता कर के अपने ऑफिस चला गया मैं जब अपने ऑफिस गया तो उस दिन मेरे ऑफिस में काम करने वाले राजेश ने मुझसे कहा कि सर मुझे कुछ दिनों के लिए छुट्टी चाहिए थी। मैंने उसे कहा राजेश घर में सब कुछ ठीक तो है, वह कहने लगा हां सर घर में तो सब कुछ ठीक है लेकिन मुझे कुछ दिनों के लिए अपने घर लखनऊ जाना है। मैंने उसे कहा ठीक है लेकिन तुम कितने दिनों बाद लौट आओगे तो वह कहने लगा सर मैं 15 दिनों बाद लौट आऊंगा। मैंने राजेश को छुट्टी दे दी और मैं अपना काम करने लगा मेरे ऑफिस में करीब 15 लोग काम करते हैं उन लोगों के साथ मेरा व्यवहार बड़ा ही अच्छा रहता है। मैं शाम के वक्त घर के लिए निकला जब मैं शाम के वक्त घर के लिए अपने ऑफिस से निकला तो संध्या से मेरी फोन पर बात हुई और वह मुझे कहने लगी कि रोहित आप आते हुए दुकान से कुछ सामान ले आइएगा मैंने संध्या को कहा ठीक है। मैं जब घर लौट रहा था तो हमारे घर के पास ही एक डिपार्टमेंटल स्टोर है मैं वहां पर सामान लेने के लिए चला गया। मैं जब डिपार्टमेंटल स्टोर में सामान लेने के लिए गया तो वहां पर मेरे पुराने दोस्त मुझे मिले उनसे मेरी काफी दिनों बाद मुलाकात हो रही थी उनका नाम सोहन है। सोहन से करीब एक महीने बाद मेरी मुलाकात हो रही थी सोहन और मैं आपस में बात करने लगे सोहन मुझे कहने लगे कि रोहित तुम्हारा काम कैसा चल रहा है तो मैंने उन्हें बताया मेरा काम तो अच्छा चल रहा है। उन्होंने मुझे कहा यह भी बड़ा इत्तेफाक है कि आज तुम से मेरी मुलाकात यहां डिपार्टमेंटल स्टोर में हो गई।



मैंने उन्हें कहा कि आप यहां अकेले आए हैं तो वह कहने लगे कि नहीं मेरे साथ मेरी पत्नी भी आई है वह सामान ले रही हैं। हम दोनों बात कर रहे थे कि तभी उनकी पत्नी भी आ गई, सोहन ने मेरा परिचय अपनी पत्नी से करवाया उससे पहले मैं उनसे कभी मिला नहीं था यह पहला ही मौका था जब सोहन ने मुझे अपनी पत्नी से मिलवाया था। हम लोग आपस में बात कर रहे थे थोड़ी देर बाद सोहन मुझे कहने लगे कि अभी मैं चलता हूं मैंने उन्हें कहा ठीक है मैं भी सामान ले लेता हूं और मैं सामान लेने लगा। मैं जब सामान ले रहा था तो मैंने देखा सोहन और उनकी पत्नी आशा बिल काउंटर पर बिल कटवा रहे थे। आशा की बड़ी गांड देखकर मैं आशा को घूरने लगा लेकिन मैंने देखा कि वह भी पीछे पलट कर मुझे देख रही है और उनके चेहरे पर एक मुस्कुराहट है उनकी उस मुस्कुराहट के पीछे कुछ छुपा था। मैं आशा को देखकर बड़ा खुश हुआ उस दिन जब मैं सामान लेकर घर पहुंचा तो मैंने उस दिन संध्या को चोदने का फैसला कर लिया था लेकिन मेरे दिमाग में सिर्फ आशा भाभी का ख्याल आ रहा था उस दिन मैंने संध्या की चूत बडे अच्छे से मारी।


अब एक दिन मेरी मुलाकात आशा भाभी से हो गई जब वह मुझे मिली तो उन्होंने मुझसे बात की मुझे उनसे बात करके बहुत अच्छा लगा अब मैं चाहता था कि मैं उनके साथ सेक्स की बातें करू इसलिए मैंने उनका नंबर ले लिया और फोन पर हम दोनों एक दूसरे से बातें करने लगे। एक दिन उन्होंने मुझे फोन पर कहा कि सोहन घर पर नहीं है तुम घर पर आ जाओ। उन्होंने मुझे उस दिन अपने घर पर बुला लिया तो वह मेरे बाहों में थी जब वह मेरी बाहों में थी तो मैंने उनके होंठों को चूमना शुरू किया और बड़े अच्छे से उनके होठों को चूम रहा था मैंने उनकी गर्मी को पूरी तरह बढा कर रख दिया था। उनकी गर्मी पूरी तरीके से मैंने बढ़ा दी थी वह बिल्कुल भी रह नहीं पा रही थी मैंने उनके ब्लाऊज को उतारकर एक किनारे किए मैंने देखा उनके स्तन बाहर की तरफ को लटक रहे हैं अब मैं उनकी चूत मारने के लिए भी तैयार था मैंने उनकी साड़ी को हल्का ऊपर किया तो मैंने देखा उन्होंने काली रंग की पैंटी पहनी हुई थी उस काले रंग की पेंटी को मैंने उतार दिया। मैंने देखा कि उनकी पैंटी पूरी तरीके से गीली हो चुकी थी मैन उनकी चूत पर अपनी उंगली को रगड़ने लगा तो उनकी चूत से पानी बाहर निकलने लगा और मैंने उनकी ब्रा खोलकर उनके स्तनों को चूसना शुरू किया। उनके स्तनों को अपने मुंह में लेकर चूसने की कोशिश करता तो मुझे बड़ा ही अच्छा लगता। अब सब कुछ बड़े अच्छे से चल रहा था मैंने अपने लंड को उनकी चूत के अंदर घुसाने का फैसला कर लिया था मैंने जब अपने लंड को उनकी चूत पर लगाया तो वह भी पूरी तरीके से उत्तेजित होने लगी थी मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था जब मैं उनकी चूत मे लंड घुसा रहा था जैसे ही मेरा मोटा लंड उनकी योनि के अंदर गया तो वह बहुत जोर से चिल्लाते हुए मुझे कहने लगी मुझे बहुत दर्द हो रहा है।


अब उनकी चूत को फाडता हुआ मेरा लंड अंदर तक जा चुका था मेरा लंड जैसे ही उनकी योनि के अंदर घुसा तो वह जोर से चिल्लाई और मुझे कहने लगी कि मुझे बहुत ज्यादा दर्द हो रहा है मैं समझ चुका था कि उनकी चूत मे कुछ ज्यादा ही दर्द हो रहा है लेकिन मैंने भी उनके पैरों को चौड़ा कर लिया जिससे कि मेरा लंड बड़े आसानी से उनकी चूत के अंदर बाहर हो रहा था मुझे बहुत ही ज्यादा मजा आ रहा था और वह भी बहुत ज्यादा खुश हो गई थी। मेरा मन हो रहा था कि मैं बस उन्हें चोदता ही जाऊं मैंने उन्हें बड़े अच्छे से चोदा उनकी इच्छा को तो मैंने पूरा कर ही दिया था लेकिन वह भी मेरे लिए कहीं न कहीं तड़पने लगी थी उनकी तड़प इस बात से साफ पता चल रही थी कि जब मैं उन्हें धक्के मार रहा था तो उनकी सिसकारियो में बढ़ोतरी होती जा रही थी मैंने अपने वीर्य को उनकी चूत में गिरा दिया और उन्होंने दोबारा से मेरे लंड को अपने मुंह में लेकर चूसना शुरू किया मेरे लंड पर लगे वीर्य को उन्होंने अपने अंदर ही ले लिया था।


जैसे ही उन्होने अपनी चूतडो को मेरी तरफ किया तो मैंने उनकी चूतडो पर अपने हाथ से प्रहार किया जिस से कि उनकी चूतडो का रंग लाल होने लगा और वह मुझे कहने लगी अब तुम मुझे इतना मत तड़पाओ जल्दी से मेरी चूत में अपने मोटे लंड को डालकर मेरी चूत की खुजली को मिटा दो। मैंने भी उन्हें कहा आपको कौन तडपाना चाहता है और यह कहते ही मैंने भी अपने लंड को उनकी योनि के अंदर घुसा दिया वह कहने लगी तुम्हारे लंड को अंदर लेकर मुझे बड़ा मजा आ रहा है। अब मैंने उनकी चूतड़ों को कस कर पकड़ लिया था मैं उन्हें बड़ी तेज गति से धक्के मार रहा था मैं उन्हें जिस प्रकार तेज गति से धक्के मार रहा था मुझे बड़ा मजा आ रहा था और उन्हें भी बड़ा आनंद आ रहा था। वह बहुत ज्यादा खुश थी और मुझे कहने लगी ऐसा लग रहा है जैसे कि तुम मेरे पति हो और तुम मेरी जरूरतों को पूरा कर रहे हो। मैं उनकी चूत अच्छे से मार रहा था एक समय आया जब मैंने अपने वीर्र को उनकी योनि में गिरा कर उनकी इच्छा को पूरा कर दिया था और वह बड़ी ही ज्यादा खुश हो गई थी।

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