मुझे साथ मिल गया

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मुझे साथ मिल गया


Antarvasna, kamukta:


Mujhe saath mil gaya मैं मुंबई में पिछले 6 महीनों से नौकरी कर रही थी मैं अपनी सहेली सुहानी के साथ रहती हूं सुहानी और मैं जयपुर के रहने वाले हैं हम दोनों एक ही कंपनी में जॉब करते हैं। मैं कुछ दिनों के लिए अपने घर जाने वाली थी तो मैंने सुहानी से कहा कि मैं कुछ दिनों के लिए घर जा रही हूं सुहानी को यह बात पता थी तो उसने मुझे कहा कि तुम मेरे घर में कुछ गिफ्ट लेकर चले जाना मैंने सुहानी से कहा ठीक है मैं जरूर तुम्हारे घर पर कुछ ले कर चली जाऊंगी। मैं अपने घर जयपुर चली गई मैं जब जयपुर गई तो मैं जयपुर जा कर बहुत खुश थी कुछ समय अपने परिवार के साथ बिताने के बाद मैं वापस मुंबई लौट आई। मैं वापस मुंबई लौटी तो सुहानी ने मुझे बताया कि वह विवेक के साथ रिलेशन में है मुझे यह बात पता ही नहीं थी सुहानी ने मुझे इस बारे में कुछ भी नहीं बताया था।


विवेक हमारे ऑफिस में ही जॉब करता है लेकिन सुहानी ने मुझे कभी विवेक के बारे में नही बताया था और ना ही मुझे विवेक ने कभी इस बारे में कुछ कहा था। विवेक बहुत अच्छा लड़का है और यह बात मुझे पता थी पिछले कुछ महीनों से मैं विवेक को जानती हूं विवेक हमारी काफी मदद भी कर दिया करता है। एक दिन सुहानी और मैं अपने ऑफिस से लौटे उस दिन हम दोनों ही काफी थके हुए थे तो मैंने सुहानी से कहा कि क्यों ना आज हम लोग बाहर से ही खाने का आर्डर करवा दें तो सुहानी कहने लगी कि हम लोग आज बाहर ही डिनर के लिए चलते हैं। हम दोनों उस दिन हमारे घर के पास ही एक रेस्टोरेंट है वहां पर हम लोग चले गए मैं और सुहानी साथ में बैठे हुए थे तो मैंने सुहानी से उस दिन इस बारे में पूछा और कहा कि सुहानी विवेक और तुम्हारे बीच का जो यह रिश्ता है इसके बारे में तुमने मुझे कभी नहीं बताया। सुहानी ने मुझे कुछ नहीं कहा वह कहने लगी कि मैं विवेक को पसंद तो करती थी लेकिन मुझे नहीं पता था कि विवेक मुझे प्रपोज कर देगा मैंने सुहानी से कहा कि क्या तुम विवेक के साथ शादी करना चाहती हो तो वह मुझे कहने लगी कि हां मैं विवेक के साथ शादी करना चाहती हूं।


मैंने सुहानी को कहा सुहानी विवेक बहुत ही अच्छा लड़का है और तुम उससे शादी करके बहुत खुश रहोगे सुहानी कहने लगी कि विवेक भी यही चाहता है कि हम दोनों शादी कर ले। मैंने सुहानी को कहा क्या तुमने अपने पापा मम्मी से इस बारे में बात की है तो सुहानी ने मुझे कहा कि सुनैना तुम जानती तो हो कि पापा और मम्मी कितने पुराने ख्यालात के हैं वह प्रेम विवाह में बिल्कुल भी भरोसा नहीं करते उन्हें समझाना थोड़ा मुश्किल होगा इसलिए मैंने उन्हें अभी कुछ भी नहीं बताया है मैं सोच रही हूं कि जब मैं घर जाऊं तो उनसे इस बारे में बात करूं और उन्हें विवेक के बारे में में बताऊं। मैंने सुहानी को कहा कि तुम्हें पापा और मम्मी को विवेक के बारे में बताना चाहिए तो सुहानी कहने लगी कि इस बार जब मैं घर जाऊंगी तो इस बारे में पापा और मम्मी से जरूर बात करूंगी। सुहानी के पापा बैंक में नौकरी करते हैं हम दोनों ने उस दिन डिनर किया और फिर हम लोग फ्लैट में वापस लौट आए जब हम लोग फ्लैट में वापस लौटे तो सुहानी विवेक से बात करने लगी। वह विवेक के साथ काफी देर तक बात कर रही थी मैं भी अपने फोन में हेडफोन लगाकर गाने सुनने लगी मुझे नींद कब आई मुझे कुछ पता ही नहीं चला और जब सुबह मैं उठी तो 7:00 बज रहे थे मैं ऑफिस के लिए तैयार होने लगी लेकिन सुहानी अभी तक सो रही थी। मैंने सुहानी को उठाया तो सुहानी मुझे कहने लगी कि सुनैना मुझे थोड़ी देर और सोने दो परंतु मैंने उसे कहा कि सुहानी हमें ऑफिस के लिए देर हो जाएगी तुम जल्दी से तैयार हो जाओ। वह जल्दी से तैयार हो गई और हम लोग ऑफिस के लिए निकल पड़े क्योंकि हमें देर हो गई थी इसलिए हम लोग ऑटो से ही ऑफिस निकल गए हम लोग अपने ऑफिस पहुंचे तो हम दोनों अपना काम करने लगे। लंच टाइम में मैंने सुहानी को कहा लगता है कल तुम विवेक के साथ काफी देर तक बात करती रही तो सुहानी कहने लगी कि हां मैं विवेक के साथ काफी देर तक बात करती रही। जब मैं और सुहानी बात कर रहे थे तो विवेक भी उस वक्त कैंटीन में आ गया, हमारे ऑफिस की कैंटीन में हम लोग बैठे हुए थे तो विवेक ने कहा कि क्या तुम लोग कॉफी पियोगे मैंने विवेक से कहा हां मेरे लिए तुम कॉफी ऑर्डर कर देना। मेरे लिए विवेक ने कॉफी का ऑर्डर कर दिया सुहानी ने भी कॉफी के लिए विवेक से कह दिया था हम तीनों ही कॉफी पी रहे थे तो मैंने उस दिन विवेक से कहा विवेक तुम लोग शादी कब कर रहे हो।


विवेक मुझे कहने लगा कि यह तो तुम अपनी सहेली सुहानी से ही पूछो तो सुहानी इस बात पर मुस्कुराने लगी थोड़ी देर बाद हम लोग अपने ऑफिस में आ गए। उस दिन ऑफिस का काम खत्म करने के बाद मैं घर चली आई सुहानी और विवेक साथ में कुछ समय बिताना चाहते थे इसलिए मैं अकेली ही घर चली आई। मैं जब घर आई तो काफी दिनों से मैं अपने चाचा जी के घर नहीं जा पाई थी वह लोग भी मुंबई में ही रहते हैं तो मैंने सोचा कि क्यों ना मैं चाचा जी से मिल आती हूं। मैं उस दिन अपने चाचा जी के घर चली गई जब मैं घर पहुंची तो चाचा जी घर पर नहीं थे चाची जी ही घर पर थी तो मैं उनके साथ ही काफी देर तक बैठी रही फिर मैंने चाची से कहा कि मैं अभी चलती हूं। वह कहने लगी कि सुनैना बेटा तुम्हारे चाचा बस आते ही होंगे और थोड़ी देर बाद चाचा भी आ गए जब वह आए तो मैं उनके साथ काफी देर तक उनके घर पर ही रही और उनके साथ ही मैंने डिनर किया डिनर करने के बाद मैं घर लौट आई थी। मैं जब घर लौटी तो सुहानी विवेक से फोन पर बात कर रही थी मैंने सुहानी को कहा तुम अभी तक विवेक से बात कर रही हो तो वह कहने लगी हां।


मैंने उसे कहा मुझे तो काफी नींद आ रही है मैं सो रही हूं। वह कहने लगी ठीक है सुनैना तुम सो जाओ। मैं अब सो चुकी थी लेकिन जब मेरी आंख खुली तो मैंने देखा सुहानी अपनी चूत के अंदर उंगली डाल रही थी। मैं उसे देखकर बहुत ज्यादा उत्तेजित हो रही थी जब उसकी चूत से पूरी तरीके से पानी बाहर निकल गया तो वह बहुत ही ज्यादा खुश नजर आ रही थी। सुहानी ने मेरे अंदर की आग को जला दिया था मैं चाहती थी मैं किसी के साथ सेक्स संबंध बनाऊ मैंने कभी किसी के साथ सेक्स संबंध नहीं बनाए थे। कुछ दिनों से मेरी आग ज्यादा बढ हुई थी इसलिए मैं अपनी चूत के अंदर उंगली डाल रही थी। जब हमारे फ्लैट के बगल में मुकेश रहने के लिए आया तो मैं मुकेश को देखकर उस पर लाइन मारने लगी थी। वह भी मुझे देखकर हमेशा मुस्कुरा दिया करता पहली बार हम दोनों की लिफ्ट में बात हुई। जब हम दोनों की बात हुई तो मुझे बहुत ही अच्छा लगा। मुकेश मेरे साथ दोस्ती करना चाहता था और हम दोनों की दोस्ती हो गई। मैंने एक दिन मुकेश को घर पर बुला लिया उस दिन सुहानी घर पर नहीं थी वह विवेक से मिलने के लिए गई हुई थी। हम दोनों के लिए यह काफी अच्छा मौका था इस मौके को मैं पूरी तरीके से अच्छे से इस्तेमाल करना चाहती थी और अपनी चूत की गर्मी को मिटाना चाहती थी। मैंने मुकेश को अपने स्तनों को दिखाना शुरू किया तो वह मेरी तरफ देख रहा था मैंने उसकी आग को बढा कर रख दिया था जिससे कि वह पूरी तरीके से उत्तेजित हो चुका था वह मेरी चूत मारने के लिए बेताब था। मैंने उसके लंड को अपने मुंह में लेने का फैसला कर लिया मैंने जब उसके लंड से दबाया तो वह मुझे लगा तुम मेरे लंड को अपने मुंह में ले लो। मैंने उसके मोटे लंड को अपने मुंह के अंदर ले लिया मै बहुत देर तक उसके लंड को चूसती रही मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था वह भी बहुत ज्यादा खुश था।


मेरे अंदर की गर्मी को उसने पूरी तरीके से बढ़ा दिया था अब मैं बिल्कुल भी रह नहीं पा रही थी इसलिए मैं उसके लंड को चूत में लेना चाहती थी। मैंने अपने कपड़े उतारे और उसने मेरी पैंटी को नीचे उतारा जब उसने मेरी चूत को अपनी जीभ से चाटा तो मेरी योनि से पानी बाहर की तरफ निकल रहा था। मैंने उसे कहा कि तुम अपने मोटे लंड को मेरी चूत के अंदर डाल दो उसने अपने मोटे लंड को मेरी चूत के अंदर घुसा दिया जब उसने मेरी चूत के अंदर अपने लंड को डाला तो मैंने उसे कहा तुम अब मुझे तेजी से धक्के दो। मैंने अपनी चूत की तरफ देखा तो मेरी चूत से खून निकल रहा था लेकिन मुकेश ने मेरी चूत को बड़े ही अच्छे से मार रहा था।


उसने मेरे पैरों को अपने कंधों पर रखकर मुझे धक्के दिए उसके अंदर की गर्मी पूरी तरीके से बढ़ चुकी थी। मैं भी पूरी तरीके से उत्तेजित हो चुकी थी वह जिस प्रकार से मुझे चोद रहा था मुझे बहुत ही मजा आ रहा था उसने काफी देर तक मुझे ऐसे ही चोदा। मैं पूरी तरीके से गर्म हो चुकी थी उसने मुझे अपने ऊपर से आने के लिए कहा मैंने अपनी चूत को उसके लंड पर लगाया। उसने झटके से मेरी चूत के अंदर लंड घुसा दिया मैं जोर से चिल्लाई वह मेरे चूतड़ों पर बड़ी तेजी से प्रहार करने लगा और मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था। जिस तरह से वह मेरी चूत के मजे ले रहा था मैं भी अपनी चूतड़ों को ऊपर नीचे करती और उसका पूरी तरीके से साथ देती। वह मुझे गरम कर चुका था मुकेश मुझे कहने लगा मेरा वीर्य जल्दी गिरने वाला है। उसने अपने माल को मेरी चूत के अंदर गिरा दिया और मेरी गर्मी को पूरी तरीके से मिटा कर रख दिया मैं बहुत ज्यादा खुश थी। हम दोनों उसके बाद भी एक दूसरे के साथ सेक्स संबंध बनाते ही रहते।



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