कामवाली को गोद मे बैठा लिया

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Antarvasna, desi kahani: पापा के रिटायरमेंट के बाद हम लोग मुंबई रहने के लिए आ गए मुंबई में उन्हें मैनेज करने में थोड़ा परेशानी जरूर हुई लेकिन अब सब कुछ ठीक होने लगा। मैं और मेरी पत्नी सुधा हम दोनों ही नौकरी पेशा हैं हम दोनों सुबह के वक्त अपने ऑफिस चले जाया करते है और शाम को ही हमारा ऑफिस से लौटना होता है। मम्मी और पापा को भी कई बार लगता था कि वह सिर्फ घर की चारदीवारी में कैद हैं। एक दिन पापा ने मुझसे कहा कि बेटा कई बार हम लोगों का यहां मन नहीं लगता मैंने उन्हें कहा कि क्या आपको यहां किसी चीज की परेशानी है तो वह कहने लगे कि बेटा हमें यहां किसी भी चीज की परेशानी नहीं है लेकिन फिर भी ना जाने क्यों हमारा यहां मन बिल्कुल नहीं लगता। वह लोग कुछ दिनों के लिए मेरी बुआ जी से मिलने के लिए जाना चाहते थे मेरी बुआ जो कि दिल्ली में रहती हैं। मैंने पापा और मम्मी की फ्लाइट की टिकट बुक करवा दी और उन्हें कहा कि कुछ दिन आप दिल्ली चले जाइये।


जिस दिन वह लोग दिल्ली जा रहे थे उस दिन सुबह मैंने उन्हें एयरपोर्ट तक छोड़ा और उसके बाद मैं घर वापस लौट आया। मैं जब घर वापस लौटा तो उस वक्त 8:00 बज रहे थे हमारे घर में काम करने वाली मेड भी आ चुकी थी और वह नाश्ता बना रही थी सुधा अपने ऑफिस के लिए तैयार हो रही थी और हम दोनों ही जल्दी से ऑफिस के लिए तैयार हो गए। हम दोनों ने ब्रेकफास्ट किया और उसके बाद मैं और सुधा साथ में ही निकल पड़े मैंने सुधा को उसके ऑफिस छोड़ा और उसके बाद मैं अपने ऑफिस चला गया। हर रोज की तरह अपने ऑफिस में काम करने के बाद शाम को घर लौटा तो सुधा मुझसे पहले घर पहुंच चुकी थी सुधा मुझे कहने लगी कि आज मम्मी पापा दिल्ली चले गए तो मुझे बिल्कुल भी अच्छा नहीं लग रहा है। मैंने सुधा को कहा हां तुम बिल्कुल ठीक कह रही हो मैं अभी पापा और मम्मी को फोन कर देता हूं। मैंने पापा के नंबर पर फोन किया तो उन्होंने मेरा फोन नहीं उठाया लेकिन 10 मिनट के बाद उनका फोन मुझे आया और वह कहने लगे कि मनोज बेटा तुम मुझे फोन कर रहे थे। मैंने उन्हें बताया कि हां दरअसल मैं आप लोगों से बात करना चाह रहा था आप दोनों को कोई परेशानी तो नहीं हुई।


पापा कहने लगे कि नहीं बेटा हमें कोई परेशानी नहीं हुई हम लोग तुम्हारी बुआ जी के साथ ही बैठे हुए हैं पापा ने मेरी बुआ जी से भी बात करवाई उनसे मैंने करीब 10 मिनट तक फोन पर बात की और उनका हालचाल पूछा। मैंने उन्हें कहा कि कभी आप मुंबई आइए तो वह मुझे कहने लगे बेटा तुम तो जानते ही हो कि घर में कितना काम होता है लेकिन तुमने यह बहुत अच्छा किया कि कुछ दिनों के लिए भैया और भाभी को यहां हमारे पास भेज दिया। मैंने उन्हें कहा पापा काफी दिनों से कह रहे थे कि उनका मन यहां बिल्कुल भी नहीं लग रहा है तो मैंने सोचा कि कुछ दिन वह आप लोगों के पास रहेंगे तो उन्हें भी अच्छा लगेगा। मैंने फोन रख दिया था सुधा और मैं साथ में बैठे हुए थे सुधा मुझे कहने लगी कि मनोज आजकल ऑफिस में कुछ ज्यादा ही काम होने लगा है। मैंने सुधा से कहा कि तो फिर तुम कुछ दिनों के लिए ब्रेक ले लो वह मुझे कहने लगी कि नहीं। हम दोनों साथ में बैठ कर बात करें ही रहे थे कि मैंने घड़ी की तरफ देखा तो उस वक्त 9:00 बज चुके थे मैंने सुधा से कहा टाइम का पता ही नहीं चला कि कम 9:00 बज गए। अब हम लोगों ने डिनर किया और उसके बाद कुछ देर तक हम लोग अपने फ्लैट के टेरेस में चले गए टेरेस में हम लोग काफी देर तक बैठे रहे और उसके बाद हम लोग वहां से अपने रूम में आ गए। उसके बाद हम दोनों सोने की तैयारी कर रहे थे और मुझे कब नींद लग गई मुझे कुछ पता ही नहीं चला। अगले दिन सुबह मैं जल्दी उठ गया था तो उस दिन मैं अपनी कॉलोनी के पार्क में ही चला गया मैं कुछ देर पार्क में टहल रहा था तो मुझे अच्छा लग रहा था उसके बाद मैं अपने घर आ गया। जब मैं घर पहुंचा तो सुधा मुझे कहने लगी कि मनोज तुम कहां चले गए थे तो मैंने सुधा को कहा कि मैं पार्क में चला गया था। वह कहने लगी कि तुम मुझे बिना बताए ही चले गए तो मैंने सुधा को कहा कि हां सुबह मैं जल्दी उठ गया था तो सोचा कि पार्क में टहल आता हूं। हर रोज की तरह हम लोग अपने ऑफिस की तैयारी करने लगे और ब्रेकफास्ट करने के बाद हम दोनों ऑफिस चले गए लेकिन उस दिन मेरा ऑफिस में बिल्कुल भी मन नहीं लग रहा था और मेरे सर में भी काफी तेज दर्द हो रहा था इसलिए मैंने सोचा कि मुझे घर जल्दी चले जाना चाहिए और मैं उस दिन घर जल्दी लौट आया।



मैं घर जल्दी लौट आया था और मैंने सुधा को फोन कर दिया था कि मैं घर लौट आया हूं तो वह मुझे कहने लगी कि मनोज सब कुछ ठीक तो है। मैंने सुधा को बताया कि मेरे सर में दर्द हो रहा था जिस वजह से मैं घर लौट आया तो सुधा कहने लगी कि कोई बात नहीं आप घर जल्दी आ गए तो आपने काफी अच्छा किया। शाम के करीब 6:00 बज रहे थे हमारी नौकरानी लता घर पर आ चुकी थी जब वह घर पर आई तो उसने मुझे देखा और कहने लगी साहब आज आप जल्दी आ गए। मैंने उससे कहा आज मेरे सर में दर्द था तो मैं जल्दी आ गया वह मुझे कहने लगी मैं आपके सर की मालिश कर देती हूं और आपके सर का दर्द दूर हो जाएगा। मैंने उसे कहा क्या वाकई में तुम मेरे सर की मालिश कर सकती हो। वह कहने लगी हां क्यों नहीं उसने अब मेरे सर की मालिश करनी शुरू की तो मेरे सर का दर्द दूर हो गया मैं अब ठीक हो गया था मैंने उसे कुछ पैसे दिए जब मैंने उसे कुछ पैसे दिए तो उसके हाथ को मैंने छू लिया और मेरे अंदर एक करंट सा दोडने लगा मेरा मन उसे अपने बिस्तर पर सुलाने का होने लगा।


मैंने उसे अपने पास बैठने के लिए कहा तो वह मेरे पास बैठ गई अब वह मेरे पास बैठ चुकी थी मैं उसकी जांघों पर अपने हाथ को रखकर उसे अपनी ओर आकर्षित करने की कोशिश कर रहा था अब वह मेरी बातों को समझने लगी थी। मैंने जब उसके स्तनों को अपने हाथ से दबाना शुरू किया तो उसने कोई आपत्ति नहीं जताई। अब मैं उसके स्तनों को अपने हाथों से बड़े अच्छे तरीके से दबाने लगा था उसे भी मजा आने लगा था मैंने उसे अपने बिस्तर पर लेटा दिया लता बिस्तर पर लेट चुकी थी मैं उसके ब्लाउज को उतार कर उसकी ब्रा के हुक को खोलकर उसके स्तनों को चूसने लगा। उसके स्तनों को मै अपने मुंह में ले रहा था तो उसक निप्पल खडे होने लगे थे मेरा लंड भी खड़ा होने लगा था। मैंने अपने कपड़े उतार दिए और अपने लंड को लता के स्तनों के बीच में रगडने लगा तो उसे भी मजा आने लगा। वह बहुत ही ज्यादा उत्तेजित होने लगी अब उसने मेरी गर्मी बहुत ज्यादा बढ़ा दी थी मैं बिल्कुल भी रह नहीं पा रहा था मैंने उसकी साड़ी को ऊपर करते हुए उसकी गुलाबी चड्डी को नीचे उतार लिया। जब मैंने ऐसा किया तो उसकी चूत से पानी बाहर की तरफ आने लगा था और मुझे बड़ा अच्छा लग रहा था। जब मैं उसकी चूत को ज्यादा चाटता तो मुझे उसकी चूत को चाटने में बड़ा मजा आ रहा था अब मैंने उसकी चूत को इतनी देर तक चाटा की वह पूरी तरीके से मचलने लगी। वह मुझे कहने लगी मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा है मैं अब पूरी तरीके से गर्म हो चुका था। मैंने अब अपने लंड को उसकी योनि पर सटाकर अंदर की तरफ डालना शुरू किया मेरा लंड उसकी चूत के अंदर चला गया और मेरा मोटा लंड उसकी चूत को फाडता हुआ अंदर की तरफ गया तो मुझे बहुत ही मजा आया।


मेरे अंदर कहीं ना कहीं एक अलग ही आग पैदा हो गई थी जिससे कि मैं बहुत ही ज्यादा उत्तेजित हो चुका था वह मुझे अपनी और आकर्षित करने लगी। मुझे बड़ा मजा आ रहा था मैंने उसके स्तनों को काफी देर तक दबाया वह पूरी तरीके से गर्म होने लगी थी मैंने अपने लंड उसकी चूत के अंदर बाहर बड़ी तेजी से किया मैंने उसे घोड़ी बनाया तो वह मुझे कहने लगी मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा है। मैंने उसकी चूत के अंदर बाहर अपने लंड को बड़े अच्छे से करना शुरू कर दिया वह मेरे लिए तड़प रही थी इसलिए वह मुझसे अपनी चूतड़ों को बड़े अच्छे से टकराए जा रही थी तो मुझे बड़ा मजा आ रहा था और उसे भी बहुत ही अच्छा लग रहा था। मेरे अंदर की आग को उसने बहुत ज्यादा बढ़ा दिया था अब वह बिल्कुल भी रह नहीं पा रही थी उसकी चूत से कुछ ज्यादा ही पानी बाहर निकलने लगा था और मेरे अंडकोषो से भी बहुत पानी बाहर की तरफ को निकल आया था।


मैं समझ गया था अब मेरा माल जल्दी ही बाहर गिरने वाला है मैंने उसकी पतली कमर को कस कर पकड़ लिया और उसे तेजी से मै धक्के देने लगा। मैं उसको जिस तरह से धक्के मार रहा था उससे मुझे बहुत ज्यादा मजा आ रहा था वह भी बहुत ही ज्यादा खुश हो गई थी। मुझे भी बड़ा मजा आने लगा था और उसे भी बहुत ही अच्छा लग रहा था आखिरकार मेरा माल उसकी चूत के अंदर गिर गया। जब मेरा माल उसकी चूत के अंदर गिरा तो मैंने अपने लंड को बाहर निकाला उसने मेरे लंड को अपने मुंह में ले लिया और उसे बड़े अच्छे से चूसा मेरे लंड से मेरे पूरे वीर्य को साफ कर दिया। मैं बहुत ज्यादा खुश था और उसके चेहरे पर भी बड़ी खुशी थी उसने अपने कपड़े पहन लिए और वह रसोई में जाकर अपना काम करने लगी। मैं भी अपने बिस्तर पर लेटा हुआ था और थोड़ी देर बाद ही सुधा भी घर लौट आई थी वह मुझे कहने लगी अब आपका सर दर्द कैसा है? मैंने उसे कहा अब तो मेरा सर दर्द बहुत ही अच्छा है और मै पहले से अच्छा महसूस कर रहा हूं।

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