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Tuesday, September 10, 2019

पत्नी की गर्मी कहीं और ही निकाल दी

Antarvasna, desi kahani:


Patni ki garmi kahin aur hi nikal di कुछ समय से मेरे ऑफिस में कुछ ज्यादा ही काम होने की वजह से मैं घर देरी से आ रहा था इस बात से परेशान होकर एक दिन मेरी पत्नी उषा मुझे कहने लगी कि आज कल आप बड़ी देरी से घर आ रहे है। मैंने उषा से कहा कि ऑफिस में आज कल ज्यादा काम है जिस वजह से मुझे घर आने में देरी हो रही है। जब मैं घर पहुंचा तो उस वक्त 11:30 बज रहे थे उसके बाद मैं फ्रेश हुआ और फिर हम दोनों ने डिनर साथ मे किया बच्चे और मां पिताजी तब तक सो चुके थे। अगले दिन भी मैं सुबह उठा और नाश्ता करके जल्दी अपने ऑफिस निकल गया, मैं अपनी कार से ही अक्सर ऑफिस जाया करता हूं। मैं ऑफिस पहुंचते ही अपने काम पर लग गया था और जब लंच करने की बारी आई तो मैंने देखा कि मेरा टिफिन तो मैं आज लाया ही नहीं। ऑफिस जल्दी जाने के चक्कर मे मैं उस दिन अपना टिफिन ही घर भूल गया था जिस वजह से मैंने उस दिन बाहर ही लंच किया।


शाम के वक्त जब मैं घर पहुंचा तो मेरी पत्नी मुझे कहने लगी कि राजीव आज आप अपना टिफिन ही घर भूल गए थे। मैंने उसे कहा हां आज जल्द बाजी में मैं अपना टिफिन ही घर भूल गया था इसलिए मैंने आज बाहर ही लंच कर लिया था। उस दिन मैं समय पर घर आ गया था तो थोड़ी देर मैं अपनी पत्नी के साथ बैठा रहा तभी मेरे पिताजी आये और वह कहने लगे कि राजीव बेटा मैं और तुम्हारी माँ कुछ दिनों के लिए गॉव हो आते है। मैंने पिताजी से कहा कि आप लोग गॉव जाकर क्या करोगे तो वह कहने लगे कि तुम्हारे चाचा के लड़के की सगाई है इस वजह से हम दोनों को गांव जाना पड़ रहा है। मैंने पिताजी से कहा ठीक है पिताजी, जब आप वहां से लौटेंगे तो मुझे बता दीजिएगा मैं आपको लेने के लिए आ जाऊंगा पिताजी कहने लगे ठीक है बेटा हम तुम्हे बता देंगे। अगले दिन सुबह पिताजी गांव के लिए निकल गए हमारा गांव लखनऊ के पास है और हम लोग दिल्ली में रहते है। पिताजी और मां गांव जा चुके थे और घर मे मेरी पत्नी उषा मैं और हमारे बच्चे ही थे। उस दिन मेरी छुट्टी थी जिस दिन मां और पिताजी गांव गए इसलिए मैं ही उन्हें स्टेशन तक छोड़ने के लिए गया था। मैं जब वापस घर लौटा तो मेरी पत्नी मुझे कहने लगी कि आज हम भी कहीं घूमने चलते है मैने उषा को कहा ठीक है आज हम लोग कहीं घूम आते है।


कुछ दिनों से मैं भी काफी व्यस्त था इसलिए मुझे समय नही मिल पा रहा था लेकिन उस दिन मेरी छुट्टी थी तो मैंने सोचा कि आज उषा और बच्चो को कहीं घुमा लाता हूँ। हमने जल्दी से नाश्ता किया और उसके बाद हम लोग तैयार होने लगे उषा पहले बच्चो को तैयार करने लगी उसके बाद वह खुद तैयार हो रही थी। मैं तो जल्दी से तैयार हो गया था लेकिन उषा को तैयार होने में समय लग गया, मैंने उषा को कहा कि जल्दी करो हमे देर हो रही है तो उषा कहने लगी कि हां बस दो मिनट में आई। थोड़ी देर बाद उषा भी तैयार होकर आ गयी थी और फिर उसके बाद हम लोग कार से ही घूमने निकल पड़े। हम लोगो ने उस दिन खूब एन्जॉय किया शाम को घर आते वक्त हमे देर हो गयी थी तो हमने सोचा कि आज डिनर हम लोग बाहर ही कर लेते है। हमारे घर के पास ही एक रेस्टोरेंट है हम लोग डिनर करने वहीं चले गए थे, हमने वहां डिनर किया उसके कुछ देर बाद हम लोग घर लौट आये थे। हम काफी थके हुए थे बच्चे तो आते ही सो गए थे लेकिन हम दोनों उसके कुछ देर बाद सोये, हमे भी काफी तेज नींद आ रही थी तो हम भी जल्दी हो गए थे। अगले दिन सुबह मैं जल्दी उठ गया था उषा ने मेरे लिए चाय बनाई और फिर मैं चाय पीने लगा इतने में उषा बच्चो को तैयार करने लगी। बच्चे तैयार होकर नाश्ता करने लगे उसके बाद वह भी अपने स्कूल के लिए निकल चुके थे। थोड़ी देर बाद मैं फ्रेश होने लगा और तैयार होकर नाश्ता करने लगा नाश्ता करके मैं भी अपने ऑफिस के लिए निकल गया। उषा घर पर अकेली थी वह अपना साफ सफाई का काम निपटा रही थी। उषा हर रोज की तरह ही घर का काम निपटा रही थी जब मैं ऑफिस पहुंचा तो ऊषा का फोन मुझे आया वह मुझे कहने लगी कि आप क्या कर रहे हो? मैंने उसे कहा कुछ नहीं मैं अभी ऑफिस में अपना काम कर रहा हूं लेकिन ऊषा का शायद सेक्स करने का मन बड़ा था तो वह मुझे कहने लगी मुझे आपके साथ आज सेक्स करने का बड़ा मन हो रहा है।


मैंने उसे कहा मुझे भी आज तुम्हारे साथ सेक्स करने का बड़ा मन है उसने मेरे अंदर की आग को जला दिया और मैं अपनी गर्मी को कहीं तो बाहर निकालना चाहता था लेकिन मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मैं अपनी गर्मी को कैसे बाहर निकालू हमारे ऑफिस में ही निर्मला काम करती है निर्मला की शादी अभी पिछले महीने हुई थी उसकी शादी को एक महीना ही बीता था। उस दिन लंच टाइम में जब मैं निर्मला के साथ बैठा हुआ था तो मैंने उसे कहा तुम्हारी शादी शुदा जिंदगी कैसी चल रही है तो उसने मुझे बताया मेरी जिंदगी तो अच्छी चल रही है। मैं और निर्मला एक दूसरे से बात कर रहे थे जब हम दोनों एक दूसरे से बात कर रहे थे तो उस वक्त निर्मला ना जाने किस बात को लेकर एकदम से मुस्कुराने लगी मैंने उसे कहा क्या हुआ तो वह मुझे कहने लगी कुछ नहीं बस ऐसे ही किसी बात पर मुझे हंसी आ गई थी। मैंने उससे कहा क्या आजकल तुम्हारे पति तुम्हें कुछ ज्यादा ही मजा दे रहे हैं जो तुम इतनी खुश हो रही हो। वह मेरी तरफ कुछ देर तक घूर कर देखती रही और फिर उसने अपनी हवस भरी नजरों से मुझे देखा तो मैंने उसकी आंखों में पढ़ लिया था कि वह मुझसे चुदने के लिए तैयार है मेरे लिए तो यह बडा ही अच्छा मौका था मैं उसे चोदू मैंने उसे कहा मुझे बहुत ही अच्छा लगेगा यदि मैं तुम्हारे साथ चूत चुदाई का खेल खेल पाऊं तो वह भी मेरे लंड को लेने के लिए तैयार थी और मुझे कहने लगी हम लोग कहां जाएं।


मैंने उसे कहा चलो हम लोग बाथरूम में चलते हैं अब हम दोनों अपने ऑफिस के बाथरूम में आ गए हमारे ऑफिस के बाथरूम मे कोई भी नहीं था मैंने भी अपने लंड की चैन को खोलो और अपने लंड को बाहर निकाल लिया जैसे ही मैंने ऐसा किया तो वह मेरे लंड को अपने मुंह के अंदर लेकर उसे बड़े ही अच्छे तरीके से चूसने लगी। वह मेरे लंड को बडे ही अच्छे तरीके से चूस रही थी उसने मेरे लंड से पानी बाहर निकाल दिया था। मुझे भी अब मजा आने लगा था वह भी बहुत ही ज्यादा उत्तेजित हो गई थी मेरे अंदर की आग अब पूरी तरीके से बढ़ चुकी थी मेरी गर्मी अब इतनी अधिक हो चुकी थी कि उसके मुंह मे मेरा माल गिराने वाला था। मैंने जैसे ही अपने माल को उसके मुंह के अंदर गिराया तो वह खुश हो गई और उसके बाद वह कहने लगी आज तो मुझे बड़ा मजा आ गया मैंने भी उसे कहा मैं अब तुम्हारी चूत मारना चाहता हूं मैंने उसके कपड़े उतार दिए और उसके स्तनों को चूस कर मैंने उसके पानी को निकाल दिया। मैं तब तक उसके स्तनों को चूसता रहा जब तक मुझे मजा नहीं आ गया मुझे उसके स्तनों को चूसने मे बड़ा मजा आ रहा था मेरे अंदर कि गर्मी अब बढ़ती ही जा रही थी और मुझे बहुत अच्छा लग रहा था। मैंने उसे कहा मैं अब तुम्हारी चूत के अंदर अपने लंड को डालना चाहता हूं उसने अपनी चूतड़ों को मेरे तरफ किया और मैंने उसकी चूत को चाटना शुरू किया उसकी चूत को चाट कर मुझे मजा आ रहा था उसकी चूत को मैंने अपनी उंगलियों से सहलाना शुरु किया। जब मैंने उसकी कोमल चूत के अंदर अपनी उंगली को घुसाया तो वह चिल्लाई और कहने लगी अब तुम अंदर की तरफ अपने लंड को घुसा दो।


मैंने भी अपने लंड को उसकी चूत पर सटाया तो उसके मुंह से एक अलग ही प्रकार की आवाज पैदा होने लगी मैंने जब उसकी चूत के अंदर अपने लंड को घुसाया तो अब मुझे मजा आने लगा मेरा लंड उसकी चूत को फाड़ता हुआ अंदर की तरफ तक जा चुका था मुझे अब बहुत ही ज्यादा मजा आने लगा था। मैं उसे बड़े ही अच्छे तरीके से चोद रहा था और मुझे उसे चोदने में बहुत मजा आ रहा था मेरे लंड को वह चूत में लेकर बहुत ही ज्यादा खुश हो गई थी और मुझे कहने लगी कि मुझे बड़ा मजा आ रहा है जिस प्रकार से आप मुझे चोद रहे हैं ऐसे तो मेरे पति भी मुझे नहीं चोदते। मैंने उसको दीवार के सहारे खड़ा किया हुआ था वह बार-बार आगे की तरफ चली जाती और मुझे कहती मुझे थोड़ा आराम से धक्का मारो मैंने उसे कहा लेकिन मुझे तो बड़ा मजा आ रहा है और मुझे तुम्हें चोद कर ऐसा लग रहा है जैसे बस तुम्हारी चूत को मैं मारता ही जाऊं।


मैं अपने लंड को उसकी चूत के अंदर बाहर बड़ी तीव्रता से कर रहा था जिससे कि मेरे अंदर की आग बहुत ही ज्यादा बढ़ने लगी थी जब मेरा लंड उसकी चूतडो से टकरा रहा था तो उनसे एक अलग ही प्रकार की आवाज पैदा होती जिस से कि उसके अंदर की गर्मी बढ़ती जा रही थी और वह बहुत ही ज्यादा खुश हो गई थी। मैंने उसे कहा मुझे बहुत अच्छा लग रहा है तो वह मुझे कहने लगी अच्छा तो मुझे भी बहुत लग रहा है और ऐसा मन हो रहा है बस आपके साथ मैं पूरी तरीके से मजे करते रहू और मेरे अंदर की आग बहुत अधिक बढ गई थी अब मेरा वीर्य भी बाहर की तरफ को आने के लिए तड़प रहा था। जैसे ही मेरा वीर्य बाहर की तरफ को गिरा तो वह मुझे कहने लगी आज तो मुझे मजा ही आ गया तुमसे अपनी चूत मरवाकर मैं बहुत ज्यादा खुश हूं वह बहुत ज्यादा खुश थी और उसके बाद वह कहने लगी चलिए अब चलते हैं हम दोनों ने अपने कपड़े पहन लिए और उसके बाद हम लोग ऑफिस में आ गए और ऑफिस में अपना काम करने लगे।



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