पापा के बाद प्रिंसिपल सर ने माँ और मेरा ख्याल

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मेरी माँ और प्रिंसिपल सर का अफेयर ( प्रिंसिपल सर ने पापा के बाद ख्याल रखा )


नमस्कार दोस्तों, मेरा नाम अविरल राजपूत है, इन्टरनेट पर मै बहुत सी कहानियां पढ़ चूका हु, लेकिन ये सब कहानियां मुझे झूटी लगती है, कहानियो का व्यापर अच्छा चल रहा है इसलिए लोग कई फर्जी कहानियां बनाकर लोगो का मनोरंजन कर रहे है! मै कई दिनों से अपनी ही लाइफ का एक काला सच सबको बताना चाह रहा हु, एक ऐसा सच जो मै शायद सामने से तो किसी को तो बताने की हिम्मत न कर सकू लेकिन नाम बदलकर शायद अगर उस घटना को लिख दू तो शायद मेरे दिल मन का भार कम हो सके!


बात 2008 की है, जब मेरे पिता एक कार एक्सीडेंट में हम सबको छोडकर चले गये थे, मै उस समय 9 साल का था और मेरी छोटी बहन 5 साल की थी! दिल्ली में हमारा 25 गज का घर है जिसमे एक कमरा किचेन है और बाथरूम छत पे बनाया हुआ है, पैसो की कमी की वजह से घर में सफेदी नहीं करवाई थी और उपर छत पर जाने के रास्ते पर दरवाजा नही लगाया था इसलिए कोई भी छत से निचे आ सकता था! पापा की प्राइवेट नौकरी थी इसलिए उनके जाने के बाद घर में आर्थिक दिक्कते आना शुरू हो चुकी थी, माँ मेरी ज्यादा पढ़ी लिखी नही थी, पिताजी के LIC के पैसे से काम चल रहा था, मेरे और बहन के प्राइवेट स्कूल की फीस कुछ महीने तक भरने में तो कोई दिक्कत नहीं आई! लेकिन कुछ समय के बाद माँ ने घरो में खाना बनाने का काम शुरू कर दिया, और फिर सब काम ठीक ठाक चलता रहा! लेकिन एक दिन माँ को डेंगू बुखार हो गया जिस वजह से माँ काफी समय तक काम पर नहीं जा पायी और सारी बचत उनके इलाज पर लग गये! मुसीबते जब आती है तो एक साथ आती है, ज्यादा छुट्टियों की वजह से माँ का काम छुट गया, मेरी और बहन की स्कूल की फीस का समय भी आ गया, मुझे रोज फीस न लाने की वजह से क्लास से बाहर कर दिया जाता था!


एक दिन माँ को स्कूल में बुलाया गया, मै अपनी माँ के साथ प्रिन्सिपल रूम में गया


प्रिन्सिपल – छाया जी, 15 दिन से आपके बच्चे क्लास में नहीं है, और आप है की फीस जमा करने का नाम नही ले रही है, मुझे मजबूरन आपके बच्चे का नाम काटना पड़ेगा


माँ – सर जी, आपको तो मालूम ही है न की इनके पिताजी के जाने के बाद से हमे पैसे की दिक्कत चल रही है, मै काम ढूंड रही हूँ, कुछ दिन में फीस जमा करवा दूंगी


प्रिन्सिपल – अविरल बेटा आप कुछ देर बाहर जाओ, मुझे कुछ नियम आपकी माँ को समझाने है


माँ ने बाहर जाने को कहा, तो मै बाहर बैठ गया, 5 मिनट के बाद माँ बाहर आई, तो माँ के चेहरे के होश उड़े हुए थे, न जाने क्या वजह थी की माँ कुछ नही बोली और हम घर चले आये, सारे रस्ते माँ चुप थी, रात का खाना बनानें के बाद माँ लेट गयी, लेकिन उनकी आँखे खुली थी, उनको परेशान देखकर मुझे भी नींद नही आई, माँ सारी रात जागती रही! अगली सुबह माँ ने हमे स्कूल के लिए तयार किया और कहा की आज से स्कूल की कोई भी चिंता नहीं होगी बेटा तुझे, स्कूल में मन लगाकर पढना है और तुम्हे बहुत पैसे कमाने है बड़े होकर! ये सब सुनकर मै स्कूल चले आया छोटी बहन को लेकर! स्कूल पहुचने के बाद मुझे याद आया की मेरी प्रैक्टिकल फाइल घर में रह गयी थी, तो मै दोबारा घर गया, घर का दरवाजा खुला था और मैंने अंदर झांककर देखा तो प्रिंसिपल सर बैड पर बैठकर चाय पि रहे थे, माँ किचेन में थी, सर कह रहे थे की माया जी आपने अच्छा निर्णय लिया है ये, आपके बच्चो की जिम्मेवारी आज से मेरी है, तभी मै अंदर गया तो प्रिन्सिपल सर मुझे देखकर अचानक डर गए!


प्रिंसिपल – अरे अविरल, तुम यहाँ?


मै – सर मेरी प्रैक्टिकल फाइल घर में रह गयी थी


माँ – नालायक पहले याद नही रहता तुझे ये सब?


मै – गलती से भूल गया माँ


प्रिंसिपल – अरे को बात नहीं बेटा, चलो आज मेरे साथ कार में चलो, जल्दी स्कूल पहुचना है और अस्सेम्ब्ली भी करवानी है स्कूल में


हम उसके बाद उनकी गाडी में बैठकर स्कूल आ गये! अस्सेम्ब्ली के बाद मै पुरे दिन सोचता रहा की माँ किस चीज के लिए तयार हुई है! अगले दिन फिर मै स्कूल गया, प्रिन्सिपल सर ने अस्सेम्ब्ली करवाई, अस्सेम्ब्ली के बाद प्रिंसिपल सर मुझसे मिले और क्लास में जाकर ध्यान से पढाई करने को कहा, लेकिन उसके बाद सर स्कूल से बाहर अपनी कार में कही चले गये, मेरे मन में बहुत जिज्ञासा थी ये जानने की की वो कही दोबारा माँ से मिलने तो नहीं गये है, मैंने सोचा की मुझे एक बार घर जाकर देखना चाहिए!


उसके बाद बाथरूम में छुपकर पहले लेक्चर (पीरियड ) का वेट करने लगा, जैसे पहला पीरियड शुरू हुआ, मै बिल्डिंग के बेसमेंट वाले रस्ते से स्कूल गेट पर पंहुचा और गार्ड के वहां से हटते ही स्कूल से भाग गया और सीधा अपने घर पंहुचा! मेरी गली के बाहर सर की गाडी खड़ी थी, तो मै समझ गया की सर मेरे घर में है! मै सीधे रस्ते से घर नहीं जाना चाहता था, मै उन दोनों की बाते सुनना चाहता था, इसलिए मै पिछली गली के खाली प्लाट से दीवार पर चढ़ कर अपनी छत पे चले गया, मैंने शुरू में ही बताया था की हमने छत की मौंटी पर दरवाजा नही लगाया जिस वजह से सीधा निचे आया जा सकता है, मैंने वहाँ हल्का से निचे आकर कमरे में देखने लग गया!


सर आराम से शर्ट उतारकर बेड पर लेटे हुए थे, और माँ को बुला रहे थे


सर – छाया जी, क्या कर रही हो यार किचन में, जल्दी आओ, कल भी तुम्हारे बेटे ने मजा ख़राब कर दिया था


माँ – आ रही हु सर


माँ सर के पास आकर बैठ गयी


माँ – मुझे अच्छा नही लग रहा है ये सब करना


सर – देखो छाया, इस समय तुम्हे शारीरिक, मानसिक और आर्थिक जरूरत है, तुम्हारे पति के जाने के बाद ये सब मै पूरा करने को तयार हु, ये सब बाते हम दोनों के ही बीच रहेंगी हमेशा, ना मेरी पत्नी को पता चलना चाहिए और न कभी तुम्हारे बच्चो को पता चलेगा


माँ – लेकिन मै सिर्फ अपने पति विजय से प्यार करती हु


सर – देखो छाया, अगर यहाँ ऐसी ही बाते करनी है तो मुझे क्यों बुलाया, ये सब सोचने के लिए ही मैंने उस दिन स्कूल में तुम्हे एक दिन का समय दिया था, आज तुम्हारे बच्चो को मेरी जरूरत है, तुम अभी 29 साल की हो, तुम्हारे शरीर को भी किसी की जरूरत है, अगर हमारे मिलने से सबका भला हो रहा है तो ज्यादा सोचो मत


इतना बोलते ही सर ने माँ के बालो को पकडकर उन्हें अपनी तरफ खीचा और उनके ओंठो को अपने ओंठो से मिला दिया, माँ के ओंठ बंद थे, वो कोई प्रतिक्रिया नही दे रही थी, लेकिन सर लगातार उन्हें चूम रहे थे, मुझे ये सब देखकर बहुत बुरा लगा रहा था, कुछ देर के बाद सर ने माँ के निचले ओंठो को चुसना शुरू कर दिया, इस वजह से माँ को भी शायद अच्छा लगा होगा और उन्होंने भी हलकी से क्रिया दी अपने हाथो की और सर को पीछे से पकड़ लिया, इतना महसूस करते ही सर ने माँ को और उत्साह के साथ प्यार करना शुरू कर दिया, उनके गालो और उनकी गर्दन उनके कान, जहां संभव था वो चुमते रहे!


प्रिन्सिप्ल सर शरीर से एवरेज है और रंग सांवला है लम्बाई ज्यादा है, कुछ देर के बाद उन्होंने माँ को निचा लिटाकर उनके ब्लाउज को खोलने की कोशिश करी, एक बटन खुला नही तो उन्होंने उससे तोड़ ही दिया, और माँ उनके सामने ब्रा में आ गयी जिसे सर ने कंधो से निचे कर दिया और माँ के स्तन उनके सामने थे, माँ ने अपनी आंखे बंद कर रखी थी, थोड़े छोटे स्तन थे, सर के हाथो पर पुरे समा रहे थे, सर उन्हें मुह में लेकर चूसने लगे, माँ कोई प्रतिक्रिया नहीं दे रही थी, उनकी आँखे बंद थी, लेकिन एक समय के बाद उन्हें मुह से आह अह की सिस्कारियां आने लगी, ये देख सर और जोर से उन्हें चूसने लगे, सर ने एक बार उनके निप्पल पर जोर से काटा और मां जोर से चीख पड़ी, और चीख सुनते ही सर ने अपनी जीभ उनके मुह में डाल दी और वो जोर से निचे उपर निचे करने लगे, उन्होंने अभी तक अपनी पेंट नहीं उतारी थी!


सर ने माँ को कहा की सारे कपड़े उतारो और खुद भी नंगे हो गये, उनका लिंग आगे से गिला हो रखा था, लिंग का आकार ज्यादा नहीं था, 5 इंच रहा होगा शायद और मोटाई भी ठीक ठाक थी, माँ ने भी अपने कपड़े उतार दिए लेकिन पेटीकोट नहीं उतारा, सर ने उनके पेटीकोट को उतार दिया, उन्हें देखकर सर शायद बहुत अक्साइटेड हो गये थे की उनके लिंग से उनका सफ़ेद वीर्य निकल पड़ा और वो माँ की नाभि पर जा गिरा! ये देखते ही माँ के मुह से छि निकल पड़ा और वो बोली


माँ – इतनी जल्दी कैसे हो गया ये बिना कुछ किये


सर – छाया तुम बहुत सेक्सी हो, मै अपनी बीवी के बाद पहली बार किसी दूसरी औरत को इतने समय बाद देख रहा हु, अपनी बीवी से सेक्स किये मुझे 3 महीने से ज्यादा हो गए है, इसलिए ये वीर्य निकल गया


माँ – मै बाथरूम से अभी आती हु इससे साफ़ करके


जब माँ बाहर आई तो सर फिर लेट गये थे, लेकिन उनका लिंग बहुत ही ज्यादा मुरझा गया था, तो वो माँ को कहने लगे की इसे मुह में लेकर खडा करो


माँ – मुझे घिन्न आती है ये मै नही कर सकती


सर – अभी करना तो होगा, वरना तुम्हारा नुक्सान है


बहुत मनाने के बाद माँ राजी हो गयी


माँ – आप पहले इससे साबुन से धोकर आओ


सर बाथरूम से उसे साफ़ करके आते है, और माँ के सामने खड़े हो जाते है, माँ उसे पकडकर मुह में लेने की कोशिश करती है और उन्हें उलटी करने का मन करने लगता है, सर जबरदस्ती करके उस मूंगफली को उनके मुह डाल देते है जिस वजह से माँ अचानक से उठकर बाथरूम में चली जाती है और उलटी करके आती है, जब वो बाहर आती है तो सर ने अपना लिंग हिला हिलाकर खड़ा कर दिया होता है और वो माँ को अपने पास बुलाकर लिटा देते है!


माँ फिर से आँखे बंद कर देटी है, सर उनकी योनी पर अपना लिंग रखकर जोर का झटका मार देते है और माँ जोर से चीख पडती है, सर भी उन्हें स्मुच करने लगते ही और अंदर कोई धक्का नही देते, जब माँ चुप होती है तो सर अंदर बहार करने लगते है, माँ को कोई दर्द नही हो रहा होता, पहला दर्द शायद इसलिए हुआ होगा क्युकी उन्होंने काफी दिनों बाद कोई लिंग अंदर लिया था, फिर उस दौरान सर लगातार आवाजे निकाल रहे थे और माँ शांत लेती हुई थी, सर कभी उनके बूब्स चूस रहे थे तो कभी गर्दन और ओंठो को! 2 या 3 मिनट के बाद सर जोर जोर से झटके मारने लगे और अचानक से रुक गये!


तब मुझे इन सबका ज्ञान नहीं था लेकिन बाद में मैंने जब खुद भी कई लडकियो के साथ सेक्स किया तो एहसास हुआ की हमारे प्रिंसिपल सर शीघ्रपतन से ग्रसित थे, क्युकी सामान्यत लडको को पहले शॉट में 5 मिनट और बाद के शॉट में कम से कम 18 मिनट तो लगते ही है, उपर से उनका लिंग भी कुछ ख़ासा बड़ा नही था, वैसे मेंरे लिंग की लम्बाई भी कुछ ख़ास नही है, मेरे लिंग की लबाई 6 इंच है!


जब सर रुक गये तो वो माँ के उपर ही 10 मिनट लेते रहे, और माँ से अपने परिवार की बाते करते रहे, शायद ये कारण हो सकता है की सर की बीवी उनके साथ सेक्स पसंद ना करती हो क्युकि सर सेक्स के मामले में ढीले थे!


उसके बाद मै स्कूल आ गया, और क्लास में जब गया तो टीचर ने गायब रहने के लिए मुझे प्रिंसिपल रूम में भेज दिया, वहाँ प्रिंसिपल सर पहले से मौजूद थे, शायद सर उस सेक्स के बाद घर से निकल गये होंगे और कार में जल्दी स्कूल पहुच गये!


सर ने मुझे थोडा सा डाटा लेकिन मेरे सर पर हाथ रखकर प्यार से कहा की आगे से ऐसे मत करना


तब मुझे लगा की जैसा चल रहा है चलने देते है! मुझे स्कूल से किताबे स्कालरशिप मिल गयी कुछ समय के बाद और माँ को भी स्कूल में लेडी पीओंन की नौकरी पर रख दिया गया! सर का उसके बाद से कई बार घर में आना जाना लगा रहा है और हमारे घर के हालात भी काफी सुधर गये! मेरे स्कूल से निकलने के बाद मैंने ग्रेजुएशन करी और बी.एड कोर्स कर उसी स्कूल में पढाने लगा हु! मेरी छोटी बहन इस बात से पूरी तरह अनजान है की माँ ने क्या क्या सक्रिफैज़ किया है हम दोनों के लिए!


लाइफ इंसान को कहाँ से कहाँ पंहुचा देती है कुछ कह नही सकते! रिश्तो को निभाना बहुत मुश्किल काम है, रिश्तो में बहुत कुछ बलिदान करना पड़ता है अपनों के लिए, दूसरे की मजबूरियों को समझना भी बहुत जरूरी है, हालात ही है सब चीजो के लिए जिम्मेवार!


फिलहाल इस कहानी अंत करता हु!


AVIRAL RAJPOOT


[email protected]



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