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Saturday, August 10, 2019

पडोसन ने घर बुलाकर चुदवाई अपनी चुत

सभी पाठकगण को मेरी तरफ से नमस्कार। मैं राहुल आज आपके सामने मेरे जीवन की एक सच्ची कहानी लेकर आया हूं। कहानी शुरू करने से पहले मैं आपको अपने बारे में बता देता हूं।


मेरा नाम राहुल है, उम्र २५ साल और कद ५’१० फीट है। आज मैं आपके सामने मेरी और मेरी एक पडोसन की कहानी रखने जा रहा हूं।


इस कहानी में पढिए किस तरह से मेरी पडोसन ने अपने घर बुलाकर मुझसे अपनी चुत चुदवाई। मेरे घर में मैं, और मेरे माता-पिता रहते है।


घर का इकलौता बेटा होने की वजह से बचपन से ही सबने मुझे बडे ही लाड-प्यार से बडा किया था। यह कहानी पिछले की है, जब मैं दस दिन के लिए मेरे घर में अकेला था।


दो साल पहले हमारे घर के पडोस में एक शादीशुदा जोडा रहने आया था। उस आदमी का नाम निरंजन था और उसकी पत्नी का नाम अंतरा था।


दोनों ही अच्छे स्वभाव के थे, तो वो बहुत जल्द ही मेरे घरवालों से घुलमिल गए। कुछ ही दिनों में, अंतरा भाभी की और मेरी मां की अच्छी दोस्ती हो गई।


निरंजन को मैं भैया बुलाता था, और उसकी पत्नी अंतरा को भाभी कहकर पुकारता था। भैया काम पर निकलने के बाद, अंतरा मेरी मां से बात करने के लिए रोज ही आने लगी।


शुरू से ही मुझे उसकी नजर में कुछ अजीब सा लगने लगा था, लेकिन मैंने उस पर ज्यादा ध्यान नही दिया। अंतरा भाभी हमारे घर आती, तो वो हमेशा कोई बहाने से मेरे कमरे में झांकने का प्रयास करती रहती।


एक दिन भाभी का गैस सिलिंडर खत्म हो गया था, तो उन्होंने मां से कहकर मुझे गैस सिलिंडर भराकर लाने के लिए कह दिया। मैं पहले उनके घर गया, और भाभी से खाली गैस सिलिंडर और उनका सिलिंडर का खाता मांगा।


भाभी ने मुझे बिठाया और पानी देते समय अपना पल्लू नीचे गिराया। मैंने उस समय अपनी नजर हटा ली, तो भाभी ने पल्लू संभाल लिया।


फिर मैं उनके पास से सिलिंडर लेकर गया और गैस एजेंसी जाकर दूसरा सिलिंडर लाकर दे दिया। उसके बाद भी वो मुझ पर डोरे डालने की कोशिश करती रहती। वैसे दिखने में वो भाभी किसी माल से कम नही थी।


लेकिन मोहल्ले में बेइज्जती से डरकर मैं कुछ गलत कदम नही उठा रहा था। अंतरा भाभी की शादी को दो साल हो चुके थे, और उनका अब तक कोई बच्चा नही था।


वो मुझ पर अपने डोरे डाल रही थी, इसलिए मुझे लगने लगा कि, भैया इसे खुश नही रखते होंगे। तो अब मैं सीधे कहानी पर आता हूं। पिछले साल मेरे घरवाले हमारे दूर के रिश्तेदार के यहां शादी में गए हुए थे।


मुझे अपने काम से छुट्टी नही मिल पाई, इसलिए मैं जा नही सका। अब मैं कुछ दिन घर पर अकेला रहने वाला था।


लेकिन मेरी मां ने जाने से पहले ही अंतरा भाभी को बोला था कि, वो मेरे लिए रोज रात का खाना बना दिया करे। तो मैं जैसे ही घर आता, भाभी मेरे घर आकर मेरे लिए खाना बनाती।


पहले दिन तो सब कुछ ठीक रहा। दूसरे दिन मैं अपने काम से थोडा जल्दी घर आ गया। मुझे घर आया देखकर भाभी भी मेरे घर आ गई, और मुझे खाने में क्या बनाना है पूछने लगी।


अभी भैया को कम से लौटने में काफी समय बचा हुआ था। मैंने बोला, “कुछ भी बना दो भाभी, चलेगा।”


आज भाभी पूरी तरह माल बनकर आई थी, उन्होंने अपनी साडी बहुत नीचे बांधी थी। जिया वजह से मैं उनकी नाभि आसानी से देख सकूं। भाभी ने अचानक मुझसे कहा, “तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड है क्या?”


मैंने कहा, “नही है।”


तो भाभी कहने लगी, “तो फिर तुम अपना काम कैसे चला लेते हो?”


मेरा मन तो कर रहा था कि, मैं उसे वहीं उठाकर पटक दूं और चोदना शुरू कर दूं। लेकिन मैंने अपने आप को रोकते हुए कहा, “बस भाभी जी चला लेते हैं। आप तो समझदार हो ही।”


इतना बोलकर मैं शांत हो गया। शायद आज भाभी पूरा मन बनाकर ही आई थी, तो वो कहने लगी, “तुम कहो तो मैं तुम्हारी कुछ सहायता कर दूं?”


यह तो खुलेआम मुझे चुदाई के लिए बुला रही है। तो मैंने कहा, “आप क्या कर सकती हो भाभी जी इसमें मेरी सहायता?”


तो भाभी जी किचन की तरफ जाते हुए बोली, “मैं अकेली समझदार होकर क्या फायदा, अब तुम खुद भी समझदार बनो। तभी काम हो पाएगा ना।”


इतना कहकर भाभी खाना बनाने में लग गई। अब मुझे समझ नही आ रहा था कि, मैं क्या करूं? आखिर में चुदास मुझ पर हावी हो गई, और मैंने अपने घर का दरवाजा अंदर से बंद करते हुए किचन की तरफ निकल पडा।


किचन में जाकर मैंने पीछे से भाभी को पकड लिया और अपने हाथ आगे ले जाकर उनकी चुचियों पर रख दिए। भाभी ने कुछ नही कहा, तो मेरी हिम्मत और बढ गई। फिर मैंने अपना लण्ड उनकी गांड की दरार में रगडना शुरू कर दिया।


तो भाभी ने कहा, “अभी के लिए इतना काफी है, अगर और मजे चाहिए तो मेरे घर आकर ले लेना। आज भैया बाहर गए हुए है।”


इतना कहकर वो अपने घर निकलने लगी। उसके जाने के बाद थोडी ही देर में मैं भी उसके घर चला गया। भाभी ने दरवाजा खुला ही रखा था, तो मैंने अंदर जाकर कुंडी लगा दी।


भाभी उनके बेडरूम में बिस्तर पर पूरी तरह से नंगी होकर लेटी हुई थी। भाभी को इस हालत में देखकर मेरा लण्ड और भी मचलने लगा था।


मुझे देखकर भाभी ने कहा, “बिस्तर पर आने से पहले अपने सारे कपडे उतार दो।”


भाभी के कहे अनुसार मैंने अपने सारे कपडे उतार दिए और फिर भाभी के पास जाकर उनको चूमने लगा। अब मैं भाभी के ऊपर था और उनके होठों को अपने होठों में लेकर चूस रहा था।


मेरे दोनों हाथ भाभी के उरोजों को मसल रहे थे। भाभी के उरोज मसलते हुए मैं उनके निप्पल को भी नोच देता, तो भाभी के मुंह से आह निकल जाती।


मुझसे अब रहा नही जा रहा था, तो मैंने भाभी के पैर फैलाकर अपना लण्ड उनकी चुत पर रख दिया। लण्ड चुत पर रखते ही भाभी ने नीचे से अपनी कमर उठाकर पूरा लण्ड अंदर ले लिया।


भाभी बिना रुके नीचे से अपनी कमर उठाते हुए मेरे लण्ड को चुत में अंदर बाहर होने दे रही थी। तो मैंने भाभी को ऊपर आने के लिए कहा, और खुद नीचे लेट गया।


भाभी तुरंत पलटकर मेरे ऊपर चढ गई, और अब मेरे लण्ड पर कूदते हुए अपनी चुत चुदवाने लगी। मैंने अपने हाथ भाभी के स्तनों पर रखकर उन्हें मसलना जारी रखा।


बीच बीच में भाभी मुझ पर झुक जाती, तो मैं उसके स्तनों को अपने मुंह में भर लेता और जमकर चुसाई करता। थोडी ही देर में भाभी झड गई, और मेरे ऊपर ही ढेर हो गई।


मेरा लण्ड अभी भी खडा था, तो मैंने भाभी को नीचे लेटाकर फिर से उनकी चुत चुदाई करने लगा। अब भाभी मेरे छाती पर हाथ फेरते हुए नीचे लेटकर मजे लेने लगी।


मैंने भी ताबडतोड चुदाई करते हुए अपना वीर्य भाभी की चुत में ही निकाल दिया। जैसे ही भाभी को पता चला कि, मेरा वीर्य निकल गया।


भाभी ने मुझसे कहा, “अगली बार से कभी भी अपना वीर्य मेरी चुत में मत गिराना।”


यह बात सुनकर मैं चौंक गया, मैंने भाभी से पूछा, “आपको बच्चा नही चाहिए क्या?”


तो भाभी बोली, “अभी मेरी उम्र ही क्या है? और कुछ साल अपनी जवानी के मजे लूट लुंगी; उसके बाद फिर बच्चा पैदा करूंगी।”


उसकी बात सुनकर मैं वहां से उठा और अपने कपडे पहनने लगा। भाभी ने मुझसे कहा, “कहां जा रहे हो, एक राउंड में ही दम निकल गया क्या?”


तो मैंने कहा, “दम तो बहुत है, थोडा रुक जा रात में तेरा दम तोडकर ही रहूंगा।”


मैं अपने कपडे पहनकर वहां से निकल आया। दोस्तों आपको मेरी यह आपबीती कैसी लगी, यह हमें कमेंट करके जरूर बताइए। धन्यवाद।

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