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Sunday, August 11, 2019

लडकी देखने के बहाने मिला चुदाई का मौका

नमस्कार दोस्तों मेरा नाम अजय है, मै लखनऊ का रहनेवाला हूं. इस कहानी में पढिए, किस तरह से हम मेरे लिए लडकी देखने गए और मुझे उसी से चुत चुदाई का मौका मिल गया.


मै आज आप सबके सामने अपने जीवन की एक सच्ची कहानी बताने जा रहा हूं. यह कहानी पिछले साल की है, तब मेरी उम्र 28 साल थी, और घर मे मेरी शादी की बातें चलने लगी थी. घरवालों ने लडकियां भी देखना शुरू कर दिया था.


मै सबसे पहले आपको मेरे बारे में बता देता हूं, मेरी हाइट ५ फुट ११ इंच है. मै रोज जिम जाता हूं, जिस वजह से मेरा बदन भी भरा हुआ और मजबूत है. डोले शोले भी अच्छे खासे है.


अब आपका अधिक समय बर्बाद न करते हुए मै सीधे कहानी पर आता हूं. तो हुआ यूं कि, मेरी शादी के लिए घरवालों ने लडकियां देखना शुरू कर दिया था.


अब तक मुझे भी एक-दो लडकियों की तस्वीरें दिखाई जा चुकी थी. लेकिन मैने यह फैसला अपने माता-पिता पर ही छोड दिया. तो एक दिन उन्होंने मुझसे कहा, “हमे कल लडकी देखने जाना है, तो ऑफिस से छुट्टी ले लेना.”


मैने भी ठीक है कहकर ऑफिस से अगले दिन की छुट्टी ले ली. अगले दिन ठीक समय पर हम लोग घर से निकल गए. हमारे साथ बुआ, चाचा और चाची भी थे.


हम सब मिलकर लडकी देखने गए, वहां जाकर फिर बातें होने लगी. अब तक लडकी हमारे सामने आई नही थी. मेरे घरवालों ने लडकी की तस्वीर देख ली थी, लेकिन मैने नही देखी थी.


फिर कुछ देर बाद, जिसे हम देखने के लिए आए थे, वो लडकी हमारे लिए खाने के लिए लेकर आई. उस लडकी को देखते ही मै देखता ही रह गया. इसे मै पहले से ही जानता था, इसका नाम अश्विनी था.


यह मेरे कॉलेज में पढती थी, और मेरे एक दोस्त के साथ इसका अफेयर भी चला था. मुझे देखकर उसके भी होश उड गए, लेकिन उसने वहां अपने चेहरे पर डर दिखने नही दिया.


खैर जैसे तैसे करके हम वापस घर आ गए, तो घरवालों ने मुझसे लडकी के बारे में पूछना शुरू कर दिया. मैने उनसे कुछ समय मांगकर थोडी देर के लिए वह बात छोड दी.


रात को मै खाना खाकर सोने के लिए अपने कमरे में गया, तब मुझे एक अनजान नंबर से फोन आया. मैने फोन उठाया, तो उधर से अश्विनी बात कर रही थी.


उसने मुझसे कल बाहर मिलने के लिए कहा. मुझे समझ नही आ रहा था कि, क्या हो रहा है? तो मैने भी हां कर दी.


मिलने के लिए अश्विनी ने शहर से बाहर एक रेस्टॉरेंट ढूंढा, और मुझे भी वहीं आने के लिए बोल दिया. तय समय पर मै वहां जा पहुंचा, तो वह वहां पहले से ही मेरा इंतजार कर रही थी.


मेरे वहां जाते ही वो उठकर मेरे पास आई और मुझसे कहा, “बात करने के लिए यह जगह ठीक नही, कहीं ऐसी जगह चलते है, जहां और कोई न हो.”


तो मै उसे शहर के बाहर जहां से एक नदी गुजरती है, वहां ले गया. आम तौर पर वहां दोपहर को कोई नही आता था. वहां जाकर बैठते ही उसने सुबकते हुए रोना शुरू कर दिया.


मुझे समझ ही नही आया कि, उसे अचानक क्या हुआ, जो उसने इस तरह से रोना शुरू कर दिया. मै उसे रोने का कारण पूछने लगा, थोडी देर तक वो कुछ नही बोली.


लेकिन फिर उसने मेरी तरफ मुडते हुए मुझसे कहा, “तुम तो जानते हो मै और आकाश रिलेशनशिप में थे, लेकिन जैसे ही घरवालों ने शादी की बात की, उसने मुझे सीधे मना कर दिया. अब तुम तो मेरे साथ शादी नही करोगे, लेकिन हो सके तो किसी को हमारे बारे में मत बताना.”


इतना कहकर वो अपने आंसू पोछने लगी. मैने उसके कंधे पर हाथ रखते हुए कहा, “तुम एकदम निश्चिंत रहो, किसी को कुछ पता नही चलेगा. मैने अभी तक सोचा नही तुम्हारे लिए हां कर दूं या नही, तुम बताओ तुम्हे क्या लगता है?”


मेरे ऐसे सवाल पूछने पर वो मेरे पास आकर मेरे गाल पर अपना एक हाथ रखते हुए कहने लगी कि, “जो तुम्हे ठीक लगे मेरे राजा.”


फिर उसने अपना दूसरा हाथ मेरी जांघ पर रख दिया, अब मुझे लगा कि, वो मुझे आगे बढने के लिए हरी झंडी दिखा रही है. तो मैने भी उसको अपने पास खींचते हुए उसे गले लगा लिया.


उसने मेरा कोई विरोध नही किया, उल्टा वो भी मेरे बालों में और पीठ पर अपने हाथ फेरने लगी. कुछ देर आलिंगनबद्ध रहने के बाद मैने उसे अलग करते हुए उससे पूछा, “क्या तुम तैयार हो?”


उसने मेरी ओर देखते हुए बस अपनी आंखे मूंद ली. उसके आंखे बंद करते ही मैने उसके होठों पर अपने होंठ रख दिए.


उसके मुलायम से होंठो को मै अब चूसते हुए अपने हाथों को उसके बदन पर घुमा रहा था. वो भी अब पूरी तरह से मजे के मूड में आ चुकी थी.


अश्विनी भी अब आगे बढकर मेरे लंड को पैंट के ऊपर से ही दबाने लगी थी. उसकी इस हरकत की वजह से मुझमे और जोश आ गया, और अब मै और जोर जोर से उसके होठों का रसपान करने लगा.


कुछ देर बाद मैने उसके होठों को छोडकर कपडों के ऊपर से ही उसके स्तनों को अपनी हथेली में भर लिया. उसके स्तनों को छूते ही उसके मुख से एक हल्की सी आह निकल गई.


मैने भी धीरे धीरे उसके स्तनों को मसलना शुरू कर दिया था और वो मेरे लौडे को अब पैंट के बाहर निकालने की कोशिश में लगी हुई थी.


मेरा लंड अब तक अपने पूरे आकार में आकर तांडव मचाने के लिए तैयार बैठा था. मेरा लंड अपने पूरे आकार में होने की वजह से अश्विनी मेरे लंड को पैंट के बाहर निकाल नही पा रही थी.


अब मुझसे भी कंट्रोल नही हो रहा था, तो मैने उठकर अपनी पैंट निकाल दी. फिर उसके हाथ को लेकर अपने अंडरवियर में डाल दिया.


अब वो मेरे लौडे के साथ खेलने लगी. मैने भी अब उसकी कुर्ती को ऊपर उठाकर अपना हाथ उसके पेट पर रख दिया.


मैने जैसे ही अपना हाथ उसकी चुचियों पर ले जाने की कोशिश की, तो उसकी कुर्ती टाइट होने की वजह से नही ले जा पाया.


अब हम दोनों की नजरें मिली, और अगले ही पल उसने खुद ही अपनी कुर्ती उतारकर बगल में रख दी. हम दोनों ही जानते थे कि, इस वक्त यहां कोई नही आनेवाला तो हम दोनों ही इस मामले में बेफिकर थे.


उसके कुर्ती उतारते ही मैने अपने हाथ से उसकी ब्रा को नीचे खिसका दिया और अपना मुंह सीधा ले जाकर उसकी चुचियों की घुंडीयो पर रख दिया. अब मै मदहोश होकर उसकी चुचियों को निचोडते हुए चूस रहा था.


कुछ देर उसकी चुचियां चूसने के बाद, मैने अपना हाथ उसकी तपती हुई चुत पर रख दिया. अश्विनी भी पीछे नही थी, उसने अब तक मेरे लंड को अपने हथेली में भरकर मुठिया रही थी.


उसकी सलवार के नाडे को मैने एक झटके में खोल दिया, और अगले ही पल वो बस पैंटी में अपनी चुत छिपाए मेरे पास थी.


मैने पहले तो अपना सर झुकाकर उसकी चुत की खुशबू को सूंघ लिया, और फिर उसके बालों में अपना हाथ घुसाकर उनके मुंह को अपने लंड पर दबा दिया.


उसने भी बिना कोई हिचकिचाहट के मेरे लंड को अपने मुंह मे भर लिया और चूसने लगी. मैने भी उसे घुमा लिया ताकि मै भी उसकी चुत का स्वाद चख पाऊं.


कुछ देर तक एक दूसरे को मुंह से खुश करने के बाद, मैने उसे सीधी करके लिटा दिया, और खुद उसके ऊपर आ गया.


अश्विनी ने खुद मेरे लंड को अपनी चुत का रास्ता दिखाया, और मैने एक जोर के झटके के साथ अपने लंड को उसकी चुत में डाल दिया. वो पहले से ही काफी बार चुदी होने के कारण उसे कुछ खास दर्द नही हुआ.


अब जैसे ही मै ऊपर से एक धक्का मारता, वो नीचे से अपनी गांड उचका देती. मेरे हर एक धक्के का जवाब दे रही थी वो.


कुछ देर तक इसी तरह उसकी धकमपेल चुदाई करने के बाद, हम दोनों एकसाथ ही झड गए. मैने अपना सारा माल उसकी चुत में गिराने की बजाय उसके पेट पर उडेल दिया.


फिर अपने शरीर को साफ करके हम दोनों वहां से निकल गए. मैने पहले उसको उसके घर छोड दिया और फिर खुद अपने घर आ गया. अब हम दोनों पती-पत्नी है, और हंसी खुशी जीवन बिता रहे है.


आपको यह कहानी कैसी लगी, कमेंट करके जरूर बताइए. धन्यवाद.

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