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Tuesday, July 9, 2019

प्रीत चुदी चूतनिवास से-4



(Preet Ki Bur Chudi Chootniwas se- Part 4)


मैंने पूछा- क्या हाल है मेरी प्रीत रानी का… स्वाद आया चुदाई में? चुद जाने के बाद तू बहुत ज़्यादा खूबसूरत लग रही है
‘रहने दो.. चोदनाथ राजा!’ प्रीत रानी बनावटी गुस्से से बोली- अब ध्यान आया है अपनी प्रीत रानी का… जब मेरे स्तनों को कुचल रहे थे तब ध्यान ना आया तुमको… और मेरे भीतर जो अपना मूसला घुसेड़ कर मुझे फाड़ डाला तब भी ना ख्याल आया प्रीत रानी का… अब हाल पूछ रहे हैं?


‘अच्छा सच सच बताना प्रीत रानी… तेरे चूचियाँ जब में मसल रहा था तो मजा आया था या नहीं?’ मैंने पूछा।


रानी ने धीमे से सिर हिलाके बताया हाँ मज़ा आया था और शर्मा के उसने अपनी आँखें बंद कर लीं।
मैंने फिर पूछा- चुदाई में भी मजा आया या नहीं?
उसने इतराकर शरमाते हुए कहा- ऊंऊंऊंऊं हूँ… क्या पूछे जाते हो… मुझे शर्म लगती है।
फिर उसने मेरा मुंह चूम लिया और मेरे कान में फुसफ़साई- हाँ राजे… बड़ा मजा आया, अब मेरे बदन की अकड़न भी दूर हो गई।
उसने प्यार से फ़िर मेरा एक लम्बा सा चुम्बन लिया।


लंड तो मुरझा कर बुर से बाहर फिसल ही चुका था, मैंने खुद को प्रीत रानी से अलग किया और रानी की बुर प्रदेश का मुआयना किया। ढेर सा खून बहा था, तौलिये पर काफी बड़ा लाल दाग लग गया था। बुर के आस पास का समस्त भाग रानी के खून, बुर रस और मेरे वीर्य से लिबड़ा हुआ था।
मेरा लंड का भी कुछ ऐसा ही हाल था।


दीपक को आवाज़ दी- सुन भोसड़ी वाले… बाथरूम में जा और कुछ नैपकिन्स भिगो के ला… ज़रा रानी की सफाई कर दूँ!
परंतु प्रीत रानी ने हाथ उठाकर दीपक को मना किया- नहीं दीपक नहीं… मैं राजा का वीर्य का अनुभव बहुत देर तक करना चाहती हूँ… बड़ा सुख मिल रहा है, यह चोदनाथ का बीज जो मेरे बदन पर लगा हुआ है… और हाँ चोदनाथ राजा, तेरा लौड़ा तो मैं ज़रूर चाट के साफ करुँगी जैसे चुदाई के बाद दूसरी रानियाँ करती हैं… यह तो मेरा हक़ है राजा!


इतना कह कर रानी ने उठ कर मेरा बैठा हुआ लंड हाथों में थाम के चाटना आरम्भ कर दिया और पूरा लंड, टट्टे, झांटें इत्यादि सब अच्छे से चाट के झकाझक साफ़ कर दिए। लौड़े की सुपारी नंगी करके उसको भी भली भांति चाटा। कहना न होगा कि इस प्रक्रिया में लंड फिर से उठ के खड़ा हो गया।


रानी ने लौड़े को प्यार भरी एक थपकी दी और इतराते हुए बोली- तू कुछ देर शांत रह कमीने… ज़रा सी जीभ लगी नहीं कि हरामी फुंफ़कारें मारने लगा… थोड़ा रेस्ट तो कर ले मूसल राज… और चोदनाथ और दीपक आओ तुम दोनों कुत्तों को इनाम में स्वर्ण अमृत पिलाती हूँ… चलो बाथरूम में, माँ के लौड़ो!


‘नेकी और पूछ पूछ!’ मेरी बांछें खिल उठीं और दीपक के साथ मैं बाथरूम में चला गया। प्रीत रानी ने हमें शावर एरिया में उकड़ूं बैठ जाने को कहा, फिर रानी ने टाँगें फैला के मेरे सर के इर्द गिर्द सेट की, और मेरा सिर पकड़ के बुर के एकदम नीचे जमाया। उसके बाद रानी का स्वर्ण अमृत सुर्र सुर्र सुर्र सुर्र सुर्र की मधुर ध्वनि करता हुआ मेरे मुंह में धारा के रूप में जाने लगा। उस अमृत में रानी की फटी हुई बुर का लहू और बुर का जूस भी लग लग के आ रहा था।


मैं बरसों के प्यासे की भांति प्रीत रानी की अमृत धारा का पान किये जा रहा था… एकदम स्वर्गिक स्वाद! बहनचोद पाठकों पाठिकाओं आनन्द आ गया। गर्म गर्म धारा! वाह क्या बात थी प्रीत रानी की!


थोड़ी देर पश्चात् रानी ने धारा रोक ली यद्यपि अभी खज़ाना खाली नहीं हुआ था- राजा, अब तेरी परमिशन हो तो बाकी का अमृत दीपक को पिला दूँ… तेरी तरह यह कुत्ता भी इसका दीवाना है।


मैंने सिर हिलाकर हामी भर दी और रानी की बुर को इतने पास से निहारा, आँखें हरी हो गईं। काफी रक्त तो अमृतधारा के साथ बह गया था, विशेषकर बुर के नीचे लगा हुआ, मगर थोड़ा बहुत बुर की दाएं बाएं और ऊपर लगा हुआ था, मैंने जीभ बाहर निकाली और चटखारे लेते हुए जितना भी रक्त बचा रह गया था वो सब चाट के रानी को साफ कर दिया।


फिर रानी ने दीपक के साथ भी वही किया जो मेरे साथ किया था। उसके मुंह को अपनी बुर के नीचे सही सही सेट किया और सिर पकड़ के अमृत धारा छोड़ दी सुर्र..सुर्र…सुर्र…सुर्र…सुर्र…सुर्र..
दीपक को भी मेरी तरह अमृत का चस्का लगा हुआ था, इसलिए कमीना हुमक हुमक के पीता गया। दोनों के ही लौड़े पूरी तरह से तन्नाए हुए थे।



हम तीनों वापिस रूम में आ गए, रूम में आकर के रानी ने पूछा- अब बताओ मेरे दोनों कुत्तों, इनाम पाकर मजा आया न?
दीपक कुछ न बोला मगर मैंने रानी को आलिंगन में बांध के कस के दबाया और उसके गुलाबी होंठ चूसते हुए उसको लिए लिए बिस्तर पर आ गिरा।
रानी ने कहा- अब राजा, मैं तेरे मूसल का स्वाद चखूँगी… चुपचाप लेट जा मेरे पिल्ले… तू मेरी गांड का छेद चाट कमीने!
रानी की आज्ञानुसार उसका पिल्ला यह चूतनिवास चुपचाप लेट गया और रानी के समक्ष पूर्ण समर्पण कर दिया।


रानी ने खुद को मेरी छाती पर इस प्रकार जमाया जिस से उसकी गांड मेरे मुंह के सामने आ गई। उसके बाद क्या था यारो, रानी ने मेरा लौड़ा चूसना शुरू किया और मैंने उसकी गांड के छेद पर जीभ घुमाना!


छोटा सा हल्के गुलाबी सा गांड का छेद… मैंने पहले छेद के इर्द गिर्द जीभ गोल गोल घुमाई, तब तक मेरे मुंह में पानी आने लगा था, इसलिए जीभ भी अच्छे से गीली थी।


रानी ने मजा ले कर मस्ता कर मेरे अंडे सहलाये, उसने सुपारी की खाल पूरी ऊपर सरका कर सुपारी ढक दी और फिर लंड को थाम के उसने एक बड़ा ही मज़ेदार काम किया जिसने मेरे दिमाग को उड़ा दिया, प्रीत रानी ने जीभ सुपारी की खाल के अंदर घुसा के उसको टोपे के सब तरफ गोलाई में घुमाया।
आनन्द एकदम से पराकाष्ठा पर जा पहुंचा, मैंने भी खटाक से जीभ की नोक सी बना के उसे गांड में घुसा दिया।


रानी ने हुमक कर अपने बदन को झटकाया और चूतड़ आगे पीछे करने लगी। वो जीभ तेज़ी से खाल के नीचे फिरा रही थी और मेरी गोलियाँ सहला रही थी।
हरामज़ादी लंड चूसने में माहिर लगती थी, उसके मुखरस से लंड पूरा तर हो गया।


इधर मैं भी आनन्दमग्न हुआ रानी जीभ से गांड मार रहा था।
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तभी प्रीत रानी की निगाह दीपक पर पड़ी, इस दृश्य को देखकर वो भी खूब उत्तेजित हो गया था और फिर से मुट्ठ मारने लगा था।
रानी ने मुंह लंड से हटाया और चिल्लाई- स्टॉप कुत्ते… जस्ट स्टॉप… ख़बरदार जो मुट्ठ मारी… मेरी सील टूट गई है अब मैं तेरा भी लौड़ा चूस सकती हूँ… रुक जा!


इसके पश्चात् रानी ने दुबारा से मेरे लौड़े पर अपनी जीभ और मुंह के करिश्मे दिखाने शुरू कर दिए।
काफी देर तक यही सिलसिला चलता रहा। फिर मैंने रानी की गांड से मुंह हटा लिया और बुर से मुंह चिपकाकर जीभ से भगनासा को कुरेदने लगा।
रानी के लंड से भरे हुए मुंह से घू घू घू की आवाज़ निकली और उसने अपने नितम्ब जल्दी जल्दी झुला झुला के ख़ुशी ज़ाहिर की।


बुर से रस निकलने लगा, थोड़ी देर के बाद मैंने जीभ पूरी बुर में डाल दी और जीभ से ही चोदने लगा। उधर रानी लौड़ा चूसने की अपनी कला का प्रदर्शन कर रही थी।
मज़े से हम दोनों की गांड फटे जा रही थी, मजा इतना तेज़ था कि थोड़ी ही देर में रानी स्खलित हो गई।


जैसे ही बुर से रस की फुहार मुझे ज़ुबान पर पड़ती महसूस हुई, मैं भी झड़ गया, रानी सारा का सारा माल निगल गई।
इसके बाद वो मेरे ऊपर ढीली सी होकर पड़ गई।


कुछ देर आराम करने के बाद रानी ने दीपक की ओर देखा, वो गरीब काफी समय से प्रतीक्षा में था कि कब रानी फ्री हो और उसका लंड चूसे।


अब तक तो रानी ने उसे अपना बदन छूने भी न दिया था, बोला था कि जब चोद नाथ सील तोड़ देगा उसके बाद ही वो दीपक को छूने देगी। तब तक वो दीपक की मुट्ठ मार देती थी और उसको स्वर्ण अमृत पिला दिया करती थी।
आज इस हरामी का भी दिन आ गया था, रानी ने खुद बोला था कि वो लंड चूसेगी।



रानी करवट लेकर मेरी साइड में सरक गई और दीपक को बुलाया- आ मेरे पालतू पिल्ले.. आज तेरी तमन्ना भी पूरी कर दूँ… आ तेरे को चूस के तेरी क्रीम ले लूँ!


दीपक एक पल भी बर्बाद किये बिना कूद के बिस्तर पर आ गया, रानी ने उसको लिटा दिया और उसकी टांगों के बीच बैठ कर उसका लौड़ा मुंह में ले लिया।
जीवन में पहली बार दीपक के लंड ने किसी लड़की के मुंह का स्वाद चखा था इसलिए मज़े की ताब न ला सका और दो ही मिनट में खलास हो गया।


रानी ने मक्खन खा भी लिया मगर दीपक के चेहरे पर शर्मिंदगी देखकर मैंने उसका हौसला बढ़ाया, मैं बोला- चिंता न कर यार, पहली बार लंड चुसवाने में लड़के फ़ौरन झड़ जाते हैं। इसमें घबराने की कोई बात नहीं है। अगली बार से तेरा कण्ट्रोल बढ़ने लगेगा। कुछ मैं तुझे व्यायाम बताऊंगा जिनको करेगा तो मादरचोद छह ही महीनों में तू एक घण्टे से ज़्यादा रोक पायेगा। तेरा अच्छा लम्बा मोटा लंड है साले तू मेरी तरह चूतनिवास बन सकता है।


यह सुन कर दीपक बड़ा खुश हुआ और प्रीत रानी भी प्रसन्न हुई कि उसके आशिक में महान चोदू बनने की क्षमता है।
इसके बाद हम तीनों ने कोल्ड ड्रिंक पी और रसगुल्ले खत्म किये।


वे दोनों फिर मुझसे विदा लेकर चले गए। उनके घर उसी शहर में थे इसलिए रात को रुक नहीं सकते थे। रानी ने वादा किया कि अगले रोज़ वो सुबह दस बजे के करीब आ जायगी। दीपक नहीं आ सकेगा क्योंकि उसको अपने डैडी के साथ कहीं बाहर काम से जाना था।


अगले दिन रानी दस तो नहीं लेकिन साढ़े दस बजे आ गई, तब से लेकर शाम पांच बजे तक मैंने रानी को दो बार चोदा और एक बार गांड मारी। चुदाई एक बार तो डॉगी पोज़ में की और दूसरी बार उसको नीचे कारपेट पर लिटा कर… हर चुदाई से पहले मैं रानी का बदन चाट के उसको गर्म देता था।


गांड मारने से पहले मैंने रानी के अति सुन्दर पांवों को चाटा, चुम्मियाँ कितनी लीं इसका तो हिसाब देना असंभव है यारो!
और हाँ, रानी की स्वर्ण अमृत धारा का सेवन एक बार तो उसके आते ही किया और दूसरी बार उसके जाने से पहले किया ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह…’


अगले दिन सुबह मैं वापिस गुरुग्राम आ गया।


दीपक के बारे में यह बता दूँ कि उसको मैंने ट्रेन करके तीन ही महीनों में ऐसा बना दिया कि वो एक से सवा घंटे तक बिना झड़े चोद सके, फिर वो रानी के अनेकों बार झड़ने के बाद ही झड़ता था।



प्रीत रानी बहुत प्रसन्न है, अब उनकी शादी भी हो गई है। मगर मेरे साथ चुदाई नियमित रूप से चलती है। महीने में एक बार तो ज़रूर प्रीत रानी और दीपक गुरुग्राम आते हैं और दो या तीन दिन रुकते हैं।


आशा है इस कहानी के बाद रानी के नाराज़गी दूर हो गई होगी। उसने क्रोध में आकर मुझे अल्टीमेटम दे दिया था कि जब तक कहानी नहीं लिखूंगा, वो मुझसे नहीं मिलेगी और ऊपर से महारानी अंजलि का हुक्म तो था ही!


यह हिंदी सेक्स स्टोरी यहीं समाप्त हुई दोस्तो!
नमस्कार
चूतनिवास





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