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Saturday, June 8, 2019

प्यासी नज़रों को पढ लिया

Antarvasna, hindi sex kahani:


Pyasi nazron ko padh liya शाम के वक्त मैं अपने छत पर टहलने के लिए चला गया मैं जब अपने छत पर टहल रहा था तो उस वक्त हल्का अंधेरा सा था सामने के ही घर में मैंने जब देखा कि कोई लड़की है तो मैं मां से इस बारे में पूछने लगा कि मां सामने कौन रहता है। मां कहने लगी कि बेटा कुछ दिनों पहले ही एक डॉक्टर वहां रहने के लिए आई हैं मैंने मां से कहा हां लेकिन आपको कैसे पता चला कि वह डॉक्टर हैं तो मां कहने लगी कि बेटा मेरी उस लड़की से बात हुई थी और उसका नाम प्रियंका है तभी तो मुझे मालूम है कि वह डॉक्टर है। मैंने मां से कहा अच्छा तो वहां पर पहले जो रहते थे वह लोग छोड़ कर जा चुके हैं तो मां कहने लगी उन्हें तो करीब 10 दिन हो चुके हैं। मैं अपने काम में इतना व्यस्त रहता था कि मुझे आस पसोड का भी कुछ पता नहीं रहता था अब मैं अगले दिन ऑफिस के लिए निकला तो मैंने देखा कविता आंटी बस स्टॉप पर खड़ी थी तो मैंने आंटी को लिफ्ट दे दी।


कविता आंटी कहने लगी कि सुधांशु बेटा आजकल तुम कहां हो तो मैंने आंटी से कहा आंटी मैं तो अपने काम में ही बिजी रहता हूं और मुझे समय नहीं मिल पाता। वह कहने लगी कि अच्छा बेटा तुम्हारा काम कैसा चल रहा है मैंने आंटी को कहा आंटी मेरा काम तो बहुत अच्छा चल रहा है। मैंने थोड़े समय पहले ही एक फैक्ट्री खोली थी और उसमें मैंने इतनी मेहनत की कि मेरी फैक्ट्री से प्लास्टिक का बना हुआ सामान बाजार में जाने लगा और मेरा काम अच्छा चलने लगा क्योंकि मैंने ही अकेले अपनी जिम्मेदारी पर काम खोला था तो अब मेरा काम अच्छे से चल रहा था और मैं बहुत खुश भी था कि कम से कम मेरा काम अच्छा चलने लगा है। मैंने अपने जीवन में बहुत सी कठिनाइयां देखी है लेकिन उसके बावजूद भी मैं हर कठिनाइयों को पार करता रहा मेरी कठिनाइयों को पार करवाने में मेरे पापा का बड़ा सहयोग रहा मेरे पापा हमेशा से ही मुझे कहते कि बेटा तुम कभी चिंता मत किया करो सब कुछ ठीक हो जाएगा। पापा के ही कहने पर मेरे अंदर एक अलग उपचार जाग जाते जिससे कि सब कुछ ठीक होने लगा था मैं अब अपने काम में ही ज्यादातर बिजी रहता था और घर पर मैं देर रात से ही लौटता था। जिस दिन मैं घर पर होता उस दिन अपने दोस्तों से जरूर मिला करता काफी दिन हो गए थे अपने दोस्तों से मुलाकात नहीं हो पाई थी तो मैंने सोचा कि अपने दोस्तों से मुलाकात कर आता हूं।


मैं अपने दोस्तों से मिलने के लिए चला गया मेरे दोस्त आज भी बिल्कुल वैसे ही हैं उनके अंदर कोई भी बदलाव नहीं आया है हम लोग जिस प्रकार से कॉलेज में एक दूसरे के बहुत करीब थे उसी प्रकार से आज भी हम लोग वैसे ही हैं। मैं जब अपने दोस्तों से मिला तो वह मुझे कहने लगे कि सुधांशु तुम्हारा काम कैसा चल रहा है तो मैंने उन्हें कहा मेरा काम तो अच्छा चल रहा है तुम लोग बताओ तुम सब कैसे हो तो वह कहने लगे कि हम लोग भी अच्छे हैं और हमारा भी काम अच्छा चल रहा है। मेरे दोस्त बिजनेसमैन ही हैं और उस दिन उनके साथ मैं काफी देर तक रहा मुझे घर लौटते वक्त करीब 11:00 बज चुके थे। मैं जब घर लौट रहा था तो रास्ते में मुझे एक लड़की दिखाई दी उसकी गाड़ी खराब थी मैं उसे जानता तो नहीं था परंतु उसने मुझे हाथ दिया। हालांकि वह बहुत घबरा रही थी लेकिन जब उसने मुझे देखा तो उसे यकीन हो गया कि मैं एक अच्छा इंसान हूं उसने मुझे कहा क्या आप मुझे मेरे घर तक छोड़ देंगे तो मैंने उसे कहा ठीक है मैं आपको अपने घर तक छोड़ देता हूं। मैं उसे अभी तक पहचान नहीं पाया था मैंने उससे पूछा आप कहां रहती हैं तो उसने मुझे जिस कॉलोनी का नाम बताया मैंने उसे कहा मैं भी तो वही रहता हूं मैंने उससे पूछा आपका क्या नाम है तो वह कहने लगी कि मेरा नाम प्रियंका है। मैंने उसे कहा कहीं आप डॉक्टर तो नहीं है और कुछ दिनों पहले ही आप हमारी कॉलोनी में रहने के लिए आई हैं तो वह मुझे कहने लगी कि हां लेकिन आपको यह कैसे पता चला। मैंने उसे कहा कि मैं बिल्कुल आपके घर के बगल में ही रहता हूं वह मुझे कहने लगी कि यह भी बड़ा अजीब इत्तेफाक है। मैंने भी कभी उम्मीद नहीं की थी कि प्रियंका से ऐसे किसी भी मोड़ पर मेरी मुलाकात हो जाएगी उस दिन मैंने उसे घर तक छोड़ा, उसने मुझे थैंक्यू कहा और वह अपने घर चली गई उसके बाद मेरी उससे मुलाकात तो कम ही होती थी लेकिन जब भी हम लोग मिलते तो हम लोग हमेशा एक दूसरे को मिलकर खुश जरूर हो जाया करते थे।


मैं इस बात से बहुत ज्यादा खुश था कि मेरी मुलाकात प्रियंका से हुई है प्रियंका के बारे में मैं जानना चाहता था उसने मुझे बताया कि उसने अपनी पढ़ाई दिल्ली से पूरी की है और अब वह चंडीगढ़ में ही जॉब कर रही है। मेरी उससे इतनी ज्यादा मुलाकात तो नहीं हो पाती थी लेकिन जब भी हम लोग मिलते तो एक दूसरे से अच्छे तरीके से मिलते थे मैंने एक दिन प्रियंका को कहा कि क्या हम लोग आज कहीं साथ में थोड़ा टाइम बिता सकते हैं तो वह भी मेरी बात मान गई और कहने लगी कि हां क्यों नहीं। वह मेरे साथ कॉफी शॉप में आई और वहां पर हम दोनों ने साथ में बैठकर कॉफी पी हम लोग आपस में बात कर रहे थे और मुझे उस दिन प्रियंका को सामने से जानने का मौका मिल पाया। मैं इस बात से खुश था कि कम से कम मैं प्रियंका को अब जानता तो हूं और उससे मेरी मुलाकात भी एक इत्तफाक ही था कि मेरी मुलाकात उस दिन रात को प्रियंका से हुई। मैं और प्रियंका घर लौट चुके थे कुछ दिनों के लिए मुझे अपने काम से अहमदाबाद जाना था तो मैं अपने काम के सिलसिले में अहमदाबाद चला गया कुछ समय तक मैं अहमदाबाद में ही रहा। एक दिन मुझे प्रियंका का फोन आया और वह मुझे कहने लगी कि सुधांशु तुम कहां हो तो मैंने प्रियंका को बताया कि मैं तो अहमदाबाद में अपने काम से आया हुआ हूं।


वह मुझे कहने लगी कि चलो ठीक है फिर मैं फोन रखती हूं मैंने उसे कहा नहीं तुम कहो ना तुम्हें क्या कहना था तो वह मुझे कहने लगी कि मैं सोच रही थी कि तुम्हारे लिए अपने हाथों से मैं खाना बनाऊं और तुम्हें मैं अपने घर पर बुलाऊँ। मैंने प्रियंका को कहा मुझे आने में यहां से करीब 10 दिन तो लग जाएंगे उसके बाद हम लोग मिलते हैं तो प्रियंका कहने लगी कि ठीक है सुधांशु तुम अपना काम खत्म कर के वापस आ जाओ उसके बाद हम लोग मिलते हैं। प्रियंका और मेरी कम ही समय में अच्छी दोस्ती हो चुकी थी प्रियंका कॉलोनी में सिर्फ मुझसे ही बात किया करती थी। मैं कुछ दिन बाद अहमदाबाद से काम खत्म करके वापस चंडीगढ़ लौट चुका था। जब मैं चंडीगढ़ लौटा तो प्रियंका ने मुझे अपने घर पर इनवाइट किया मैं उसके घर पर डिनर के लिए गया उसने उस दिन बड़ा ही स्वादिष्ट खाना बनाया था मैं खुश हो गया उसने मेरा पेट तो खाने से भर दिया था लेकिन मैं चाहता था कि मैं अपने वीर्य से उसका पेट भर डालो। उसकी नजरों मुझे कुछ ठीक नहीं लग रही थी उसकी प्यासी नजरों को मैंने देखा जब मैंने उसे अपने पास बैठने के लिए कहा तो वह मेरे पास आकर बैठी। जब वह मेरे पास आकर बैठी तो वह मुझसे चिपकने की कोशिश करने लगी मैंने उसे अपनी बाहों में ले लिया और उसके स्तनों को दबाना शुरू किया। मैं उसके स्तनों को दबा रहा था मैंने उसके होठों को भी चूसा तो मुझे बड़ा मजा आ रहा था और उसे भी बड़ा आनंद आता मैंने उसके कपड़े उतारे जब मैंने उसकी ब्रा के बटन को खोलकर उसके स्तनों को अपने मुंह में लेकर चूसना शुरू किया तो उसे बड़ा मजा आ रहा था वह मेरा साथ अच्छे से दे रही थी। मैंने उसके स्तनों का रसपान बहुत अच्छा किया जब मैं उसके स्तनों का रसपान कर रहा था तो मुझे बड़ा आनंद आता और उसे भी बहुत मजा आ रहा था उसने मुझे कहा तुम मेरी चूत से पानी निकाल दो।


मैंने उसकी पिंक रंग की पैंटी को उतारा जब मैंने उसकी चूत जीभ को रगडना शुरू किया तो उसे अच्छा लगता और मुझे बहुत मजा आ रहा था। उसकी चूत से लगातार पानी बाहर की तरफ को निकाल रहा था मैंने जैसे ही उसकी चूत पर अपने लंड को रगडना शुरू किया तो वह कहने लगी अब मुझसे रहा नहीं जा रहा। मैंने भी तेजी से अपने लंड को उसकी चूत के अंदर घुसाया मेरा लंड उसकी चूत के अंदर प्रवेश हो चुका था मुझे इस बात की उम्मीद नहीं थी कि वह अभी तक सील पैक होगी। उसकी चूत से खून बाहर निकलने लगा मैं लगातार तेजी से धक्के मारने लगा मुझे उसे धक्के मारने में बड़ा आनंद आ रहा था वह भी बहुत ज्यादा खुश हो गई थी। वह कहने लगी मुझे बहुत अच्छा लग रहा है तुम ऐसे ही मुझे धक्के मारते रहो मैंने उसे बहुत देर तक ऐसे ही धक्के मारे।


वह खुश हो चुकी थी उसकी चूत से लगातार खून बाहर निकाल रहा था मुझे प्रियंका को चोदने में बहुत मजा आ रहा था और प्रियंका को भी बड़ा मजा आ रहा था जिस प्रकार से मैंने उसकी चूत के अंदर बाहर अपने लंड को किया तो वह इतनी ज्यादा उत्तेजित हो गई कि वह मेरे ऊपर से आने के लिए बेताब हो गई। उसने मेरे लंड को अपनी चूत के अंदर लेते हुए अपनी चूतड़ों को ऊपर नीचे करना शुरू किया तो मुझे बड़ा अच्छा लगने लगा। वह बड़ी तेजी से ऐसा कर रही थी जिस प्रकार से वह अपनी चूतड़ों को ऊपर नीचे करती तो मेरे अंदर की गर्मी भी बढ़ जाती मेरा लंड पानी भी बाहर की तरफ को छोड़ने लगा। मुझे ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे कि वह मेरे लंड को अपनी चूत के पूरे अंदर तक ले रही है उसकी चूत से थोड़ा बहुत खून बाहर की तरफ बह रहा था। प्रियंका के साथ मैंने करीब 10 मिनट तक संभोग का मजा लिया उसकी टाइट चूत से गर्मी बाहर निकलती तो मेरा भी वीर्य पतन उसकी चूत के अंदर हो गया।



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