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Tuesday, June 18, 2019

साहब मिलने आती रहूंगी आपसे

Antarvasna, desi kahani:


Sahab milne aati rahungi aapse उमस भरी गर्मी में कोई बाहर गली में दिखाई भी नहीं दे रहा था और गली सुनसान पड़ी हुई थी मैंने शीतल को कहा शीतल मैं रूम में लेटा हुआ हूं शीतल कहने लगी कि ठीक है आप लेट जाइए। मैंने कमरे का कूलर ऑन किया और मैं कूलर के सामने ही खाट लगा कर लेटा हुआ था तभी बाहर से कुछ आवाज सुनाई दे रही थी मैंने शीतल को बोला कि बाहर से यह आवाज कौन दे रहा है। शीतल कहने लगी कि अरे कोई नहीं वह पुराने कपड़े लेने वाली शांताबाई है मैंने शीतल को कहा हमारे घर पर भी तो बहुत सारे पुराने कपड़े पड़े हैं तुम उसे क्यो नही दे देती। शीतल कहने लगी कि हां मैं अभी अलमारी में देखती हूं कि कितने पुराने कपड़े हैं मैंने शांता को बुलाया और शांता अपने सर पर कपड़े की गठरी रखे हुए हमारे घर के अंदर आई। मैंने शांता को कहा कि हम तुम्हें पुराने कपड़े देंगे उसके बदले तुम हमे क्या दोगी तो वह मुझे कहने लगी कि साहब मैं तो आपके घर पर पहले भी दो तीन बार आ चुकी हूं और यहां पर मैं कई वर्षों से काम कर रही हूं मेम साहब मुझे अच्छे से जानती हैं। तभी शीतल कमरे से पुराने कपड़े उठाकर ले आई और उसने शांता को दे दिए शांता ने शीतल को कहा मेम साहब इसके बदले मैं आपको कुछ बर्तन दे देती हूं।


शीतल कहने लगी कि नहीं तुम रहने दो तुम यह कपड़े अपने पास रखो मैंने शीतल को कहा तो शीतल कहने लगी कि कोई बात नहीं शांता तुम यह कपड़े रख लो। शांता भी थोड़ी देर हमारे घर पर रही वह कहने लगी कि मेम साहब क्या पानी पीने के लिए मिलेगा मैं अपने फ्रिज से ठंडी पानी की बोतल ले आया और मैंने शांता को दे दी शांता थोड़ी देर बाद चली गई। मैंने जब शीतल को पूछा कि तुमने शांता को पुराने कपड़े क्यों दिए तो शीतल मुझे कहने लगी कि शांता कई बार यहां आती रहती है और वह बहुत अच्छी महिला है एक बार मैंने उससे कहा था कि मेरी तबीयत ठीक नहीं है तो उसने ही घर की सफाई की थी। मैंने शीतल को कहा चलो तुमने यह तो बहुत अच्छा किया कि मुझे इस बारे में बता दिया मुझे इस बारे में कुछ मालूम नहीं था।


शीतल मुझे कहने लगी कि आप घर पर रहते ही कहां है जो आपको कुछ पता होगा आप अपने काम में इतने ज्यादा व्यस्त हैं कि आपको अपने परिवार से कुछ लेना देना ही नहीं है। मैंने शीतल को कहा शीतल ऐसा तो कुछ भी नहीं है अब तुम जानती ही हो ना कि घर की देखरेख भी तो मुझे करनी होती है और उसके लिए तो मुझे कमाना ही पड़ेगा। शीतल कहने लगी सोहन मैं तो आपको छेद रही थी,  शीतल मुझे कहने लगी कि सोहन मेरी मौसी के लड़के की शादी है तो मैं सोच रही थी कि उसकी शादी के लिए मैं एक साड़ी खरीद लूं। मैंने शीतल को कहा आज शाम को ही हम लोग बाजार से तुम्हारे लिए साड़ी ले आएंगे। शीतल इस बात से खुश थी और शाम के वक्त जब हम लोग साड़ी लेने के लिए एक शोरूम में गए तो वहां पर साड़ी के दाम सुनते ही मैं चौक गया क्योंकि साड़ी के दाम बहुत ज्यादा थे। मैंने शीतल को कहा कि तुम साड़ी खरीद लो लेकिन शीतल ने भी वहां से साड़ी नहीं ली और उसके बाद हम लोग दूसरी दुकान में गए वहां पर शीतल को साड़ी भी पसंद आई और उन्होंने हमारे लिए पैसे भी कम कर दिए थे। अब हम लोगों ने अपने लिए थोड़ा बहुत सामान खरीदा और हम लोग घर लौट आए कुछ दिनों बाद जब मैं और शीतल, शीतल की मौसी के घर गए तो वहां पर हम लोगों की खूब आवभगत हुई। शीतल मुझे कहने लगी कि मैं आपको अपनी मौसी के लड़के से मिलाती हूं मैं शीतल के मौसी के लड़के से पहले भी एक बार मिल चुका हूं लेकिन उससे मेरा इतना परिचय नहीं था इस वजह से शीतल ने मुझे कहा कि मैं आपको अपनी मौसी के लड़के से मिलाती हूं। जब शीतल ने मुझे उससे मिलवाया तो मैंने उसे शादी की बधाई दी लेकिन मुझे नहीं पता था कि उसकी लव मैरिज होने वाली है। जब शीतल ने मुझे इस बारे में बताया कि भैया लव मैरिज कर रहे हैं तो मैंने शीतल को कहा तुम्हारे भैया की पसंद को क्या तुम्हारी मौसी ने भी पसंद कर लिया है। शीतल मुझे कहने लगी कि हां मौसी ने भी भैया की पसंद को स्वीकार कर लिया है और उन्होंने ही तो भैया के रिश्ते को स्वीकार्यता दी उसके बाद भैया अब शादी कर रहे हैं। हम लोग कुछ दिन उनके घर पर रुके और जब शादी समारोह खत्म हो गया तो उसके बाद हम लोग अपने घर लौट आए शीतल भी बहुत खुश थी क्योंकि मैं और शीतल उसकी मौसी के घर पर गए थे।


शीतल की मम्मी से भी हमारी मुलाकात हो चुकी थी शीतल और मैं एक साथ घर पर बैठे हुए थे शीतल मुझे कहने लगी कि सोहन मैं सोच रही थी कि मैं कुछ दिनों के लिए अपने मायके हो आऊं। मैने शीतल को कहा ठीक है शीतल तुम यदि अपने मायके जाना चाहती हो तो तुम चली जाओ। शीतल चाहती थी कि वह अपनी मम्मी से मिले और मैंने शीतल को शीतल के घर पर छोड़ दिया मैं घर पर अकेला ही था तो शीतल ने मुझे फोन कर के कहा कि आप अपना ध्यान तो रख लेंगे मैंने शीतल को कहा हां बाबा मैं अपना ध्यान रख लूंगा। मेरे माता पिता के देहांत के बाद अब घर की सारी जिम्मेदारी मेरे ऊपर ही थी और मेरी शादी को भी ज्यादा समय नहीं हुआ था। शीतल और मेरी शादी को अभी सिर्फ ढाई वर्ष ही बीते थे लेकिन शीतल ने घर की जिम्मेदारी को बखूबी निभाया और मैं इस बात से हमेशा ही खुश था कि शीतल घ की हर जिम्मेदारी को बखूबी निभाती है। हमारे जितने भी रिश्तेदार हैं वह सब शीतल की बड़ी तारीफ करते हैं और सब लोग शीतल को बहुत पसंद करते हैं।


मैं अपने ऑफिस से घर लौट रहा था तो शीतल ने मुझे फोन किया और कहने लगी कि आप अपना ध्यान तो रख रहे हैं मैंने शीतल को कहा हां शीतल तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो मैं बस घर लौट ही रहा हूं। मैं जब घर पहुंचा तो उस दिन मुझे अपने दोस्त के घर दावत पर जाना था उसने मुझे अपने घर इनवाइट किया था। मैं जब अपने दोस्त के घर पर गया तो उसके घर पर मेरी खूब खातिरदारी हुई थोड़ी देर बाद मैं घर लौट आया उस दिन मेरी छुट्टी थी तो मैं सुबह शीतल से बात कर रहा था शीतल से मैं काफी देर से बात कर रहा था शीतल को मैंने कहा कि मैं अभी नहा लेता हूं मैं तुमसे बाद में बात करूंगा। शीतल कहने लगी कि ठीक है आप नहा लीजिए उसके बाद आप मुझे फोन कीजिएगा। मैं नहाने के लिए बाथरूम में गया और मैं अब बाथरूम में नहा रहा था। मैं जैसे ही बाथरूम से बाहर निकला तो मुझे शांता की आवाज सुनाई दी वह दरवाजा खटखटा रही थी। मैं जब दरवाजे की तरफ गया तो उसने मुझे कहा साहब मेम साहब कहां है? मैंने उसे कहा वह अपने मायके गई हुई है उसने मुझे कहा साहब आप पानी पिला देंगे। मैंने उसे अंदर बुलाया उसे मैंने पानी दिया उसके बड़े स्तनों को देखकर मै अपने अंदर की आग को बुझाना चाहता था। मैं उसे कहने लगा क्या तुम पैसे लेकर मेरे साथ सो सकती हो? उसने जवाब नहीं दिया मैंने उसे मना ही लिया वह मेरे साथ सेक्स संबंध बनाने के लिए तैयार हो चुकी थी उसने जब मेरे लंड को देखा तो मुझे कहने लगी आपका लंड बड़ा मोटा है। मैंने उसे कहा तुम अपने मुंह के अंदर समा लो उसने मेरे लंड को अपने मुंह के अंदर ले लिया और बड़े अच्छे तरीके से वह मेरे लंड को चूसने लगी अब मुझे बहुत ज्यादा मजा आने लगा था उसने मेरे लंड से भी पानी बाहर निकाल दिया था। मैं अब रह नही पा रहा था शांता से मैंने कहा तुम अपने कपड़े उतार दो? शांता ने अपने कपड़े उतार दिए मैंने उसकी ब्रा को खोला तो उसके बड़े स्तन देखकर मैं और भी ज्यादा उत्तेजित हो गया उसके स्तनों को मैंने अपने मुंह में लेकर उनका रसपान करना शुरू किया शांता को बड़ा मजा आ रहा था।


शांता मुझे कहने लगी साहब आप अच्छे से मेरे स्तनों को चूस रहे हैं मैंने शांता के स्तनों के बीच में अपने लंड को रगडा तो शांता कहने लगी साहब आप मेरी चूत को भी चाट लीजिए। मैंने शांता की चूत के अंदर गंगली डाली तो शांता की चूत के अंदर उंगली चली गई वह अपने आपको बिल्कुल रोक ना सकी। मै शांता की चूत के अंदर बाहर अपनी उंगली को करता तो वह पूरी तरीके से उत्तेजित हो जाती वह मुझे कहती मुझे बड़ा अच्छा लग रहा है। शांता की चूत से लगातार गर्म पानी बाहर निकल रहा था मैंने जैसे ही उसकी चूत के अंदर अपनी जीभ को लगाकर चाटना शुरू किया तो वह चिल्लाने लगी और कहने लगी मैं अब रह नहीं पा रही हूं। मैंने भी शांता की चूत पर लंड को रगडते हुए धक्का देना शुरू किया जैसे ही मेरा मोटा लंड शांता की चूत के अंदर प्रवेश हुआ तो वह चिल्ला उठी और मुझे कहने लगी साहब आपका लंड मेरी चूत के अंदर तक घुस चुका है।


मैंने उसे कहा तुम अपने पैरों को खोलती रहो उसने अपने पैरों को चौड़ा किया मैं उसे तीव्र गति से धक्के मारने लगा मेरे धक्के तेज होते जा रहे थे वह भी लगातार अपने मुंह से सिसकियां ले रही थी। मुझे उसे चोदने में बड़ा मज़ा आता वह भी मुझसे अपनी चूत मरवाकर बहुत खुश थी जब मैंने अपने लंड पर तेल लगाते हुए उसकी गांड के अंदर डाला तो वह चिल्ला उठी और शांता की गांड से खून निकाल दिया शांता चिल्ला रही थी। मैं उसे बड़ी तेजी से धक्के मारता वह कहने लगी मुझे बहुत अच्छा लग रहा है मैंने भी शांता की गांड के मजे बहुत देर तक लिए और शांता की गांड से मैंने खून निकाल दिया था। जब शांता की गांड के अंदर मेरा वीर्य पतन हुआ तो उसने मेरे लंड को अपने मुंह में लेकर बहुत देर तक चूसा और मेरे लंड से पूरा पानी बाहर निकाल दिया था मैं भी खुश था और शांता भी खुश थी। शांता मुझे कहने लगी साहब मैं दोबारा आपसे मिलने आऊंगी वह यह कहती हुई चली गई।



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