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Wednesday, June 12, 2019

चला गया गांड मे लंड

Antarvasna, hindi sex stories:


Chala gaya gaand me lund चबूतरे पर मैंने एक बुजुर्ग को बैठे हुए देखा मैं काफी देर से उनकी तरफ देख रहा था उनकी उम्र यही कोई 70 वर्ष के करीब रही होगी। मैं काफी देर से उनकी तरफ देख रहा था लेकिन उनकी नजर शायद मेरी तरफ नहीं पड़ी थी और वह मुझे नहीं देख पा रहे थे क्योंकि मैं उनके पीछे की तरफ बैठा हुआ था। काफी देर तक मैंने उन्हें देखा और जब मैं उनके पास जाकर बैठा तो मैंने उनसे पूछा बाबूजी आप यहां पर काफी देर से बैठे हुए हैं क्या कोई परेशानी है तो उन्होंने बड़ी ही शालीनता से मुझे कहा नहीं बेटा कोई भी परेशानी नहीं है मैं यहां पर इसलिए बैठा हुआ हूं कि मैं अपने बेटे का इंतजार कर रहा हूं। मैंने उन्हें कहा कि आपका बेटा आपको लेने के लिए यहां आने वाला है वह मुझे कहने लगे कि वह मुझे यहां लेने के लिए आने वाला है। मैं भी काफी देर तक वहां बैठा रहा लेकिन उन्हें लेने के लिए कोई नहीं आया मैंने उन्हें दोबारा से पूछा और कहा बाबू जी आपको लेने के लिए तो कोई नहीं आया तो वह कहने लगे कि नहीं बस मेरा बेटा थोड़ी देर बाद आता ही होगा।


मैं भी वहां से उठकर अपने घर की तरफ चला गया मैं जब अपने घर पहुंचा तो मेरी पत्नी मुझे कहने लगी कि संजय आप इतनी देर से कहां थे मैं आपका इंतजार कर रही थी और आपका फोन भी नहीं लग रहा था। मैंने अपनी पत्नी को कहा कि मैं तो पार्क में ही बैठा हुआ था वह कहने लगी कि लेकिन आपका फोन क्यों नहीं लग रहा था। मैंने उसे कहा शायद मेरा फोन स्विच ऑफ हो गया होगा इसलिए मेरा नंबर लगा नहीं होगा मैंने जब अपनी पत्नी को यह बात कही तो मेरी पत्नी कहने लगी कि अच्छा तुम्हारा फोन इस वजह से नहीं लग रहा होगा। मैंने जब अपनी जेब से फोन निकाला तो मेरा फोन स्विच ऑफ था और मैंने अपने फोन को चार्जिंग पर लगा लिया। शाम के वक्त जब दोबारा मैं पार्क में गया तो वह बुजुर्ग व्यक्ति वहां पर अभी तक बैठे हुए थे और मैं इस बात से हैरान होकर उनके पास गया और मैंने उन्हें कहा बाबूजी क्या आपका बेटा अभी तक आपको लेने के लिए नहीं आया। उन्होंने मुझे अब कोई जवाब नहीं दिया उनकी आंखों में आंसू थे और मैं कुछ समझ नहीं पा रहा था कि आखिर वह इतने परेशान क्यों है। मैंने उनसे जब इस बारे में पूछा तो वह मुझे कहने लगे कि बेटा अब तुम्हें मैं क्या बताऊं मेरा बेटा मुझे सुबह यह कहकर यहां छोड़ गया कि मैं आपको लेने के लिए आऊंगा लेकिन वह अभी तक नहीं आया है और मुझे नहीं लगता कि अब वह यहां मुझे लेने के लिए आने वाला है।


मुझे उनकी आंखों में उनका दर्द साफ नजर आ रहा था मैंने उन्हें कहा कि आप मेरे साथ चलिए वह मुझे कहने लगे कि नहीं बेटा मैं यहीं पर ठीक हूं लेकिन मुझे भी अच्छा नहीं लगा और मैं उन्हे अपने साथ घर पर ले आया। मैं जब उन्हें अपने साथ घर पर लाया तो वह काफी असहज महसूस कर रहे थे और मुझे भी लगा कि शायद वह अपने आप को असहज महसूस कर रहे हैं मैंने उन्हें कहा बाबूजी आप चिंता मत कीजिए सब कुछ ठीक हो जाएगा। मेरी पत्नी ने उन्हें खाना दिया तो उन्होंने मेरे साथ ही रात का डिनर किया कुछ दिनों तक उन्होंने मुझसे ज्यादा बात नहीं की और उस दिन मेरी पत्नी मुझे कहने लगी कि संजय आपने बहुत अच्छा किया जो आप इन्हें यहां ले आये। मैं उनके दर्द को महसूस कर रहा था इसलिए मैंने उनकी मदद की। अगले दिन उन्होंने मुझे अपनी सारी बात बताई और कहने लगे कि वह एक स्कूल में अध्यापक थे लेकिन जब वह रिटायर हुए तो उसके बाद उनकी पत्नी का देहांत हो गया और उनकी बहू जो कि बिल्कुल भी अच्छी नहीं है जिसकी वजह से ही उनके बेटे ने उन्हें घर से निकाल दिया। मुझे इस बात पर बहुत क्रोध आ रहा था और मैंने उन्हें कहा कि आपके बेटे को आपके साथ ऐसा नहीं करना चाहिए था वह कहने लगे कि बेटा शायद मेरी परवरिश में ही कोई कमी रह गई होगी इसलिए तो मेरे बेटे ने मेरे साथ ऐसा किया। वह हमारे साथ रहकर खुश थे और मुझे भी उनकी सेवा का अवसर मिला तो इस बात से मुझे भी खुशी हो रही थी। एक दिन जब हम लोग पार्क में बैठे हुए थे तो उनका लड़का मुझे दिखाई दिया और उनके लड़के के साथ उनकी पत्नी भी थी मैंने उनसे पूछा क्या यही आपके लड़के हैं। वह कहने लगे कि हां यह मेरा लड़का सोहन है मैंने उनसे कहा कि मैं सोहन से बात करता हूं। मैंने जब सोहन से इस बारे में बात की तो सोहन के पास कोई जवाब नहीं था वह मुझसे अपनी नजरों को भी नहीं मिला पा रहे थे क्योंकि सोहन को भी अपनी गलती पर शर्मिंदगी महसूस हो रही थी और सोहन को यह लग रहा था कि उसने बहुत गलत किया उसे ऐसा नहीं करना चाहिए था।


मैं भी इस बात को समझ चुका था कि सोहन को अपनी गलती का एहसास हो चुका है और सोहन को ऐसा नहीं करना चाहिए था इसीलिए तो सोहन ने मुझ से माफी मांगी और कहा कि संजय आपने मेरी आंखें खोल दी यदि आप मुझे नहीं बताते कि मेरे पिताजी किस स्थिति में है तो शायद मैं कभी भी उन्हें घर लेकर नहीं जाता। सोहन की पत्नी को इस बात की बहुत नाराजगी थी और सोहन की पत्नी का बर्ताव बिल्कुल भी अच्छा नहीं था मुझे बाबू जी कहने लगे कि बेटा तुम्हारी वजह से ही सोहन मुझे अपने साथ घर ले कर जा रहा है। मैंने उन्हें कहा बाबूजी मैं आपसे मिलने के लिए आता रहूंगा और अगर आपको कभी कोई भी परेशानी हो तो आप मेरे घर कभी भी आ सकते हैं। बाबू जी कहने लगे कि बेटा कास तुम्हारे जैसा ही मेरा दूसरा कोई बेटा होता मैंने उन्हें कहा बाबूजी मैं आपका बेटा ही हूं आप कभी भी किसी मुसीबत में हो या आपको मेरी जरूरत हो तो आप मुझे फोन कर दीजिएगा। वह कहने लगे कि हां बेटा मैं तुम्हें जरूर फोन कर दूंगा अब वह सोहन के साथ जा चुके थे लेकिन सोहन की पत्नी शालिनी को यह बात बिल्कुल भी पसंद नहीं थी और शालिनी शायद अपने मकसद में कामयाब नहीं हो पाई थी इसलिए वह बाबूजी को हमेशा परेशान किया करती थी।


अब वह बुजुर्ग हो चुके हैं शायद इस वजह से वह शालिनी को कुछ कहते नहीं थे लेकिन शालिनी उनकी बात का हमेशा ही फायदा उठाया करती थी। बाबूजी का एक दिन मुझे फोन आया और कहने लगे कि संजय बेटा तुम काफी समय से मुझे मिले नहीं हो तुम घर पर आ जाओ। मैं बाबूजी को मिलने के लिए उनके घर पर गया उस वक्त सोहन घर पर नहीं था तो मैंने बाबू जी से पूछा की सोहन कहां है तो वह कहने लगे कि सोहन अपने काम से कहीं गया हुआ है। शालिनी घर पर ही थी लेकिन शालिनी को यह बात बिल्कुल पसंद नहीं थी और शालिनी इसी वजह से मुझसे भी अच्छे से बात नहीं किया करती। मुझे भी शालिनी का व्यवहार बिल्कुल भी पसंद नहीं था। शालिनी का व्यवहार मुझे पहले से ही पसंद नहीं था जब मुझे उसके चरित्र के बारे में पता चला तो वह मुझसे अपनी चूत मरवाने की कोशिश करने लगी मुझे जब उसके चरित्र का पता चला तो वह भीगी बिल्ली बन कर मेरे पीछे दौड़ने लगी। वह मुझे कहने लगी आप यह सब सोहन को मत बताइए मैंने उसे कहा तुम्हारा चरित्र तो वैसे भी ठीक नहीं है और यदि मैंने सोहन को बता भी दिया तो कौन सा कुछ हो जाएगा। वह नहीं चाहती थी सोहन को इस बारे में पता चले मैंने उसे जब इस बारे में कहा तो वह अपनी चूत मरवाने के लिए मुझसे तैयार हो गई वह मेरे घर आ गई मेरी पत्नी अपने मायके गई हुई थी घर पर कोई नहीं था। मेरे सामने उसने अपने कपड़े उतारने शुरू किए तो मैं अपने आपको बिल्कुल भी रोक ना सकी और उसने भी मेरे लंड को बहुत देर तक चूसा मेरा लंड पूरी तरीके से खड़ा हो चुका था।


अब वह अपने आपको बिल्कुल भी रोक नहीं पा रही थी जैसे ही उसने मुझे कहा आप मेरी चूत मारो मैंने भी उसकी चूत पर अपने लंड को सटाते हुए चोदना जारी कर दिया मैं उसकी चूत के अंदर बाहर अपने लंड को कर रहा था मुझे बहुत मजा आ रहा था वह भी बहुत खुश हो रही थी काफी देर तक मैं उसे धक्के मारता रहा। जब वह खुश हो गई तो वह मुझे कहने लगी आज तो आपने मेरी चूत मार कर मेरी इच्छा पूरी कर दी है। मैंने उसे कहा तुम एक नंबर की जुगाड़ हो तुम्हे चूत मरवाना ही पसंद है। मैं चाहता था कि उसकी चूत का भोसड़ा बना दू इसलिए मैंने उसे घोडी बना दिया। जब मैंने उसे घोड़ी बनाकर चोदना शुरू किया तो वह चिल्लाने लगी मैं लगातार तेजी से उसके धक्के मार रहा था मुझे उसे धक्के मारने में मजा आता और उसकी चूत का मैंने भोसड़ा बना कर रख दिया था लेकिन अभी भी मेरी इच्छा नहीं भरी थी मेरा वीर्य बाहर निकलने लगा था जैसे ही मेरा वीर्य बाहर की तरफ को निकला तो मैंने उसे कहा तुम मेरे वीर्य को अपने मुंह में ले लो।


उसने अपने मुंह को खोला और मैंने अपने वीर्य को उसके मुंह के अंदर प्रवेश करवा दिया उसके बाद तो जैसे वह मुझसे अपनी चूत मरवाने के लिए उत्तेजित हो गई। मेरी नजरे उसकी गांड पर पड़ी मैंने अपने लंड को जब पूरी तरीके से चिकना बनाते हुए उसकी गांड के अंदर लंड घुसाया तो वह चिल्लाने लगी। मेरा लंड उसकी गांड के अंदर तक जा चुका था जिस प्रकार से मैंने उसे धक्के दिए उससे वह पूरी तरीके से उत्तेजित हो गई मेरा लंड उसकी गांड के अंदर बाहर होता तो वह चिल्लाती जाती और मुझे कहती कि मुझे बहुत दर्द हो रहा है। मेरा उसे छोड़ने का मन नहीं कर रहा था मैं उसकी गांड के अंदर बाहर अपने लंड को किए जा रहा था बहुत देर तक मैंने उसकी गांड के मजे लिए और उसकी गांड से खून बाहर आने लगा वह भी अपने आपको रोक ना सकी और ना ही मैं अपने आप को रोक सका। मैं लगातार तेजी से उसे धक्के मारे जा रहा था वह भी खुश हो गई थी मेरा लंड पूरी तरीके से छिल चुका था जैसे ही मेरे वीर्य की पिचकारी उसकी गांड के अंदर गई तो वह खुशी से झूम उठी। उसके बाद तो वह मेरी दीवानी हो गई उसने उसके बाद बाबूजी को भी परेशान करना बंद कर दिया था।



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