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Friday, May 24, 2019

चूत के लिए लंबा सफर तय किया

Antarvasna, hindi sex story: पिताजी चाहते थे कि मैं एक अच्छे कॉलेज से अपनी पढ़ाई पूरी करुं और इसके लिए उन्होंने अपने जीवन भर की जमा पूंजी मेरी पढ़ाई में लगा दी। मेरा एडमिशन पुणे के एक नामी कॉलेज में हो गया और मैंने कभी सपने में भी नही सोचा था कि मेरा वहां एडमिशन हो जाएगा। अब मेरा वहां एडमिशन हो चुका था तो मुझे अपने घर से दूर भी जाना ही था मैं पहली बार ही अपने घर से अलग रहने के लिए पुणे में चला गया। मुझे हर रोज अपने घर की याद सताती और कुछ रोज तो मैंने खाना भी नहीं खाया लेकिन मेरे जीवन में मुझे कुछ अच्छे दोस्त मिले जो की मुझे बहुत समझाते और उन्होंने मेरा बहुत साथ दिया। मैं अब अपनी पढ़ाई के साथ साथ अपने जीवन में भी बहुत कुछ चीजें सीख रहा था मेरी पढ़ाई पूरी होने के बाद मैंने मुंबई की बड़ी कंपनी में इंटरव्यू दिया और वहां पर मेरा सिलेक्शन हो गया।


मैं इस बात से बहुत खुश था मैं हमेशा से ही सोचा करता था कि मेरा जब मुंबई में हो जाएगा तो मैं अपने माता पिता को भी अपने साथ बुला लूंगा। मैं अपने घर इलाहाबाद गया तो वहां पर मेरे पिताजी से मैंने इस बारे में बात की पिता जी कहने लगे बेटा अभी तो मैं और तुम्हारी मां तुम्हारे साथ नहीं आ सकते मेरे रिटायरमेंट को भी अभी कुछ वर्ष बचे हैं। मैंने अपने पिताजी से कहा लेकिन आप फिर भी कोशिश तो कीजिए वह कहने लगे हां बेटा हम लोग कुछ समय के लिए तुम्हारे साथ रहने आ जाएंगे लेकिन मैं और तुम्हारी मां तो फिलहाल यही पर रहने वाले हैं। कुछ समय के लिए मेरे माता-पिता मेरे साथ मुंबई आ गए और वह लोग जब मुंबई आए तो उन्हें बिल्कुल भी अच्छा नहीं लग रहा था वह कुछ दिनों बाद ही वापस इलाहाबाद लौट गए। जब वह लोग इलाहाबाद लौटे तो मैंने अपने पिताजी से कहा कि आप लोग अच्छे से पहुंच तो गए थे ना पिताजी कहने लगे हां बेटा हम लोग पहुंच गए थे। मैं भी अपने काम में बिजी था और देखते ही देखते ना जाने कब इतने वर्ष बीत गए कुछ पता ही नहीं चला। पिताजी भी अभी कुछ समय पहले ही रिटायर हुए तो उन्होंने घर में ही अपने दोस्तों के लिए छोटी सी दावत का बंदोबस्त कर दिया था उनके रिटायरमेंट के समय मैं भी इलाहाबाद चला गया था।


कुछ दिनों के लिए मुझे इलाहाबाद में ही रहना था तो मैंने सोचा अपने कुछ पुराने दोस्तों से मिलने चला जाए मैं अपने कुछ पुराने दोस्तों से मिलने के लिए चला गया। मैं जब अपने पुराने मित्र गोपाल से मिला तो गोपाल कहने लगा तुम इतने वर्षों बाद मिल रहे हो तुम्हें मिलकर अच्छा लगा। हम दोनों एक दूसरे के हाल-चाल पूछने लगे तभी गोपाल ने मुझे बताया कि वह अपने पिताजी का कारोबार संभालने लगा है। मैंने गोपाल से कहा यह तो तुमने बहुत अच्छा किया जो अपने पिता जी का कारोबार तुम संभालने लगे हो। गोपाल कहने लगा मुझे तो काम संभालना ही था घर में मैं एकलौता जो हूं और पिताजी की इतने वर्षो की मेहनत है उसे भला मैं नहीं संभालता। हम दोनों आपस में बात कर रहे थे तभी गोपाल कहने लगा कि कुछ दिनों बाद मेरी शादी होने वाली है तो तुम यहीं हो ना मैंने गोपाल से कहा लेकिन तुमने बताया नहीं कि तुम्हारी शादी होने वाली है। गोपाल मुझे कहने लगा तुम्हें रचना के बारे में तो मालूम है ना मैंने गोपाल से कहा हां रचना को तो मैं जानता हूं। गोपाल कहने लगा जब तुम चले गए थे तो रचना और मेरे बीच में प्रेम हो गया और मैंने इस बारे में अपने पिताजी को बताया तो पिता जी को भी रचना से कोई आपत्ति नहीं थी और वह मेरी शादी के लिए मान गए। रचना के पिताजी को मनाने में हमें थोड़ी मशक्कत करनी पड़ी लेकिन अब वह भी मान चुके थे तो मेरी और रचना की शादी अब होने वाली है। मैंने गोपाल को बधाई दी और कहा यह तो बहुत अच्छी बात है कि तुम दोनों की शादी होने वाली है और मुझे तो इससे ज्यादा इस बात की खुशी है कि तुम्हारी शादी रचना के साथ हो रही है मैं तुम्हारी शादी में जरूर आऊंगा। मैंने गोपाल से कहा अभी तो मैं चलता हूं तुमसे मैं तुम्हारी शादी के दिन मिलता हूं गोपाल मुझे कहने लगा कि तुम मेरी शादी में जरूर आना। मैंने गोपाल से कहा दोस्त मैं तुम्हारी शादी में जरूर आऊंगा लेकिन अभी तो मैं तुमसे इजाजत लेता हूं और फिर मैं अपने घर चला आया।



मैंने जब अपनी मां को बताया कि गोपाल की शादी होने वाली है मेरी मां मुझे कहने लगी कि बेटा तुम भी अब शादी कर लो मैंने मां से कहा मैं शादी जरूर कर लूंगा। हम लोग आपस में बात कर रहे थे कि तभी पड़ोस में रहने वाली आंटी भी घर पर आ गई और वह मुझसे कहने लगी कि बेटा कब आए। मैंने उन्हें बताया मुझे आये तो काफी दिन हो गए हैं वह कहने लगी कि तुमसे आज ही मुलाकात हो रही है मैंने आंटी से कहा और घर में सब ठीक है। वह मुझे कहने लगे हां बेटा घर में सब कुछ ठीक है मैंने आंटी से कहा आप मम्मी के साथ बैठे मैं चलता हूं और मैं बाहर हॉल में आ गया मैं अपने दोस्तों से फोन पर बात कर रहा था। उसके बाद मैं जब गोपाल की शादी में गया तो उसकी शादी का बड़े ही अच्छे तरीके से सारा अरेंजमेंट किया हुआ था। वह लव मैरिज कर रहा था तो उसके पिताजी ने शादी में कोई भी कमी नहीं रखी थी शादी बड़े ही धूमधाम से हो रही थी और उसकी शादी के दौरान मेरी मुलाकात मीनाक्षी के साथ हुई। मीनाक्षी हमारे साथ स्कूल में पढ़ा करती थी मीनाक्षी ने मुझे देखते ही मुझसे बात की और कहने लगी मोहन मैंने सुना है तुम अब मुंबई में रहते हो। मैंने मीनाक्षी से कहा हां मैं अब मुंबई में ही रहता हूं मैंने मीनाक्षी से पूछा तुम क्या कर रही हो। वह कहने लगी मैं भला क्या करूंगी बस घर पर ही हूं और मैने एक छोटा सा ब्यूटी पार्लर खोल लिया है मैंने मीनाक्षी से कहा चलो यह तो बहुत अच्छा है।


मैंने मीनाक्षी से कहा लेकिन तुम्हारे अंदर भी बहुत परिवर्तन आ चुका है तुम काफी बदल चुकी हो मीनाक्षी कहने लगी तुम सच सच क्यों नहीं कहते। मैंने मीनाक्षी से कहा मैं सच ही तो कह रहा हूं तुम बहुत बदल चुकी हो मीनाक्षी कहने लगी तुम्हें मेरे अंदर कैसा बदलाव लगा। मैंने मीनाक्षी को बताया कि तुम अब पहले जैसी बिल्कुल नहीं हो तुम देखने में भी बहुत सुंदर लग रही हो और मुझे तुमसे मिलकर खुशी हुई। मीनाक्षी मेरी बात से फूले नहीं समा रही थी क्योंकि मीनाक्षी मुझे स्कूल के दिनों से ही पसंद किया करती थी मीनाक्षी को देख कर मेरा दिल भी मीनाक्षी पर आ गया और मैंने मीनाक्षी से उसका नंबर ले लिया। हालांकि मैं अब मुंबई लौट आया था लेकिन अभी भी मेरी बात मीनाक्षी से हुआ करती थी और हम दोनों एक दूसरे से फोन पर घंटों बात किया करते थे। मीनाक्षी मेरे साथ विवाह के बंधन में बंधने के लिए तैयार हो चुकी थी और मुझे भी इस बात की खुशी थी कि मीनाक्षी मेरे साथ विवाह के बंधन में बनने को तैयार हो चुकी है। मीनाक्षी अब भी इलाहाबाद में ही थी और मैं मुंबई में था लेकिन मेरा दिल तो मीनाक्षी के लिए ही धड़कता रहता था मैं सोचता कि कैसे मैं मीनाक्षी से मिलने के लिए जाऊं आखिरकार हम दोनों ने मिलने का फैसला कर लिया। मैं कुछ दिनों के लिए इलाहाबाद चला गया जब मैं इलाहाबाद गया तो मेरे पिता जी कहने लगे तुम तो बिना बताए आ गए। मैंने पिता जी से कहा पिताजी ऐसे ही मुझे छुट्टी मिल गई थी तो सोचा कुछ दिनों के लिए घर हो आऊ लेकिन यह सिर्फ बहाना था मैं तो मीनाक्षी से मिलने के लिए आया था। जब उस दिन हम दोनों अकेले में मिले तो हम दोनों अपने दिल को रोक ना सके मैंने जब मीनाक्षी के होठो को किस किया तो वह मेरी बाहों में आने को बेताब होने लगी। वह मेरी बाहों में आ गई तो मुझे बड़ा ही अच्छा लगा।


जिस प्रकार से वह मेरी बाहों में आई मै पूरी तरीके से उत्तेजित हो गया था और मुझे बड़ा मजा आ रहा था। मीनाक्षी के सुडौल स्तन मेरी छाती से टकरा रहे थे मैं अपने आपको रोक ना सका और शायद मीनाक्षी भी अपने आप पर काबू ना कर सकी। हम दोनों ही एक दूसरे के साथ सेक्स संबंध बनाने के लिए तैयार हो चुके थे और मीनाक्षी मुझे कहने लगी तुम मेरे ब्यूटी पार्लर में चलो वहां पर अभी कोई नहीं होगा। मीनाक्षी मुझे अपने पार्लर में ले गई जब वह अपनी कुर्सी पर बैठी थी तो मैंने अपने लंड को बाहर निकाल लिया वह मेरे लंड को देखते हुए कहने लगी तुम्हारा लंड कितना मोटा है। मैंने उसे कहा तुम इसे मुंह के अंदर ले लो उसने मेरे लंड को अपने मुंह में लिया तो मुझे भी मजा आने लगा और वह भी पूरी तरीके से उत्तेजित होने लगी लेकिन उसने मेरे लंड से पानी बाहर निकाल दिया था। अब ना तो मै अपने आप को रोक पाया और ना ही मीनाक्षी अपने आपको रोक पा रही थी। मैंने उसके स्तनों को चूसना शुरू किया तो उसे मजा आने लगा और वह मेरे लंड को अपने हाथ से पकड़ने लगी।


मैंने उसे जमीन पर लेटा दिया और उसके दोनों पैरों को चौड़ा किया तो उसकी योनि के छेद के अंदर मैंने जैसे ही अपने लंड को धक्का देते हुए घुसाया तो वह चिल्ला रही थी। मैंने बड़ी तेजी से उसकी योनि के अंदर अपने लंड को घुसा दिया उसके मुंह से बड़ी तेज चीख निकलने लगी। उसी के साथ उसकी सील भी टूट चुकी थी खून मेरे लंड पर आ गिरा और मैं उसे कहने लगा मुझे बड़ा मजा आ रहा है। वह भी अपनी चूत को टाइट कर लेती जिस प्रकार से मैं उसे धक्का मारता वह बहुत उत्तेजित हो गई और कहने लगी मैं ज्यादा देर तक तुम्हारे लंड की गर्मी को बर्दाश्त नहीं कर पाऊंगी। मैंने उसके दोनों पैरों को अपने कंधे पर रखा और अपने लंड को उसकी योनि के अंदर बाहर करने लगा उसे बड़ा मजा आने लगा और मुझे भी बहुत आनंद आ रहा था। काफी देर तक मैं उसे ऐसे ही धक्के मारता रहा लेकिन जैसे ही मैंने अपने वीर्य को मीनाक्षी की योनि के अंदर डाला तो वह मुझसे लिपट गई और कहने लगी कुछ देर ऐसे ही रहो। मैने अपने लंड को बाहर निकाला तो उसकी योनि से वीर्य अब भी टपक रहा था।

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