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Saturday, May 18, 2019

आज कुछ नया करते हैं

Antarvasna, hindi sex story: हरियाणा रोडवेज के सफर के दौरान कुछ घटनाएं मेरे साथ भी घटित हुई मै जब अपनी पत्नी के साथ रोहतक से जयपुर के लिए जा रहा था तो मैंने हरियाणा रोडवेज की बस में बैठने का निर्णय किया। रात काफी हो चुकी थी और सब लोग मुझे और मेरी पत्नी को घूर कर देख रहे थे रात के अंधेरे में वहां आस पास बहुत कम ही लोग दिखाई दे रहे थे। मैंने जब हरियाणा रोडवेज की बस में बैठने का निर्णय किया तो मेरी पत्नी कहने लगी इस बस में तो कोई भी दिखाई नहीं दे रहा क्या इसमें जाना ठीक रहेगा। मैंने अपनी पत्नी से कहा कि नहीं हम लोग इसमें ही बैठ जाते हैं और हम लोग रोडवेज की बस में बैठ गए तभी कंडक्टर खाकी वर्दी में मेरे पास आया और कहने लगा आप लोगों को कहां जाना है। मैंने उन्हें कहा हमें जयपुर जाना है यह बस कितने बजे यहां से निकलेगी वह कहने लगा कि यह तो 11:30 बजे निकलेगी अभी करीब आधा घंटा है।


मैं उनसे पूरी जानकारी लेने लगा मैं जब उनसे बात कर रहा था तो हमारे ही पीछे बैठे एक व्यक्ति हमें बड़े ध्यान से देख रहे थे मैंने अपनी पत्नी से कहा क्या मैं पानी लाऊं। वह कहने लगी आप कहीं मत जाइए मुझे बहुत डर लग रहा है मैं अपनी पत्नी के साथ ही बस में बैठा रहा करीब आधे घंटे बाद बस ने हॉर्न दिया। इसी साथ यह पता चल चुका था कि बस अब चलने वाली है लेकिन बस में ज्यादा लोग नहीं थे कुल मिलाकर 12 से 15 लोग रहे होंगे। मेरी पत्नी बस में अपने आप को असहज महसूस कर रही थी पीछे एक बूढ़ी अम्मा भी बैठी हुई थी उनकी उम्र 65, 70 बरस के आसपास रही होगी। कुछ देर बाद कंडक्टर सब लोगों से टिकट लेने लगा जब वह टिकट ले रहा था तो तभी एक पुलिस वाले बस में चढ़े और जब वह बस में चढ़े तो मेरी पत्नी ने मुझे कहा कि चलो कम से कम अब कोई पुलिस वाले तो बस में आ चुके हैं। मेरी पत्नी भी अब मुझसे खुलकर बात करने लगी थी बस बड़ी तेजी से चल रही थी मैं और मेरी पत्नी सो चुके थे। कंडक्टर ने आकर मेरे कंधे पर अपने हाथ को रखा और कहने लगा भाई साहब टिकट तो कटवा लीजिए। मैं भी एकदम से उठा और मेरी पत्नी कल्याणी भी उठ चुकी थी मैंने भी अपने बटवे से पैसे निकाले और कंडक्टर को पैसे दिए कंडक्टर ने मुझे टिकट दिया और हम दोनों दोबारा से सो गए।


सुबह जब मेरी आंख खुली तो आसमान में एक भी बादल नहीं था और आसमान पूरी तरीके से नीला दिखाई दे रहा था। मैंने कल्याणी से कहा लगता है हम जयपुर पहुंचने वाले हैं तुम उठ जाओ तो कल्याणी कहने लगी ठीक है। मैंने अपनी पानी की बोतल से पानी की दो घूंट मार ली और कल्याणी ने भी पानी पी लिया कुछ ही देर बाद हम लोग जयपुर पहुंच गए। जब हम लोग जयपुर पहुंचे तो वहां से मैंने ऑटो रिक्शा किया और हम लोग अपने घर पहुंच गए थे मुझे काफी ज्यादा नींद आ रही थी इसलिए मैंने कल्याणी से कहा मैं सोने जा रहा हूं। कल्याणी कहने लगी ठीक है तुम सो जाओ मैं अब सो चुका था और करीब 2 घंटे बाद मेरी आंख खुली तो मैंने देखा कल्याणी घर का काम कर रही है। वह मुझे कहने लगी आप तो जल्दी ही उठ गए मैंने उसे कहा हां मेरी आंख खुल गई थी तो मैं उठ गया। हम दोनों आपस में बातें करने लगे तभी दरवाजे की घंटी बजी जैसे ही कल्याणी ने दरवाजा खोला तो मेरे पिताजी भी आ चुके थे। मेरे पिताजी स्कूल में अध्यापक हैं और जब वह आये तो कहने लगे तुम लोग कब पहुंचे। मैंने पिता जी से कहा हम लोग तो सुबह ही आ गए थे लेकिन आप ना जाने कहां चले गए थे। वह कहने लगे आज मैं अपने पुराने मित्र के घर पर चला गया था वह काफी बीमार है इसलिए मैं उसे देखने के लिए चला गया था। पिताजी के रिटायरमेंट को अभी एक वर्ष ही बचा हुआ है, वह कल्याणी से पूछने लगे बेटा तुम्हारे घर पर सब ठीक है कल्याणी ने पिताजी को कहा हां घर में सब ठीक है मेरे पिताजी कहने लगे मेरे लिए तुम चाय बना दो। कल्याणी ने पिताजी के लिए चाय बना दी और जब उन्होंने चाय पी तो वह कहने लगे बेटा मैं अभी बाहर से राशन ले आता हूं घर में कुछ है ही नहीं। मैंने पिताजी से कहा मैं भी आपके साथ चलता हूं मेरे पिता जी कहने लगे चलो फिर तुम भी मेरे साथ चलो।



हम दोनों गुप्ता जी के पास राशन लेने के लिए चले गए गुप्ता जी के स्टोर से हम लोगों ने सामान ले लिया था और हम लोग घर आ गए। हमने गुप्ता जी से कह दिया था कि आप सामान को घर पर छुड़वा दीजिएगा वह कहने लगे कि ठीक है मैं सामान को घर पर छुड़वा दूंगा। मैं और पिताजी घर आ गए जब हम लोग घर आए तो कल्याणी कहने लगी मैं खाना बना देती हूं उस वक्त मैंने कल्याणी से कहा थोड़ी देर बाद तुम खाना तैयार कर देना। कल्याणी ने थोड़ी देर बाद खाना बना दिया था और हम लोगों ने रात का भोजन किया, कुछ देर तक मैं और कल्याणी रात में बात करते रहे और थोड़ी देर बाद हम सो गए। अगले दिन मैं सुबह तैयार होकर अपने ऑफिस के लिए निकल चुका था और पिताजी भी अपने स्कूल के लिए मुझसे पहले जा चुके थे। दोपहर के वक्त मुझे कल्याणी का फोन आया और वह कहने लगी क्या आप आते वक्त हल्दी ले आयेंगे मैंने कल्याणी से कहा ठीक है मैं हल्दी ले आऊंगा। मैंने कल्याणी से कहा लेकिन क्या कल हम लोग हल्दी नहीं लाये तो वह कहने लगी शायद गुप्ता जी रखना भूल गए हो। मैंने कल्यानणी से कहा ठीक है मैं हल्दी लेता हुआ आऊंगा और मैं शाम के बाद अपना काम कर के लौटा तो मैंने गुप्ता जी से कहा कल आपने हल्दी नहीं रखी।


उन्होंने अपने दुकान में काम करने वाले छोटू को आवाज लगाते हुए कहा छोटू क्या कल तुमने साहब की थैली में हल्दी नहीं रखी थी। वह मेरी तरफ देखने लगा उसे डर था कि कहीं मैं कुछ कह ना दूं इसलिए वह भी चुपचाप से हल्दी ले आया और कहने लगा साहब कल उसमें शायद मैं हल्दी रखना भूल गया था। मैंने उसे कहा कोई बात नहीं है उसने मुझे हल्दी का पैकेट दिया और मैं घर आ गया। पिताजी भी घर पर आ चुके थे वह मुझे कहने लगे प्रकाश बेटा कुछ दिनों बाद मैं शादी में जा रहा हूं तो तुम क्या मेरी ट्रेन की टिकट करवा दोगे। मैंने पिताजी से कहा ठीक है पिता जी मैं आपके ट्रेन की टिकट करवा दूंगा और मैंने अपने पिताजी की ट्रेन की टिकट करवा दी उन्हें शादी में दिल्ली जाना था। जब वह दिल्ली गए तो उस वक्त मैं उन्हें छोड़ने के लिए भी गया था मैंने जब उन्हें छोड़ा तो मैंने उन्हें कहा कि आप याद से दवाइयां ले लीजिएगा। पिताजी को बीपी की प्रॉब्लम रहती है इसलिए मुझे उनकी चिंता हमेशा सताती रहती है और वह अपनी तबीयत का ध्यान भी नहीं रख पाते। अब वह दिल्ली जा चुके थे मैं पिताजी को छोड़ कर घर लौट आया। मैं जब घर लौटा तो काफी समय बाद मुझे कल्याणी के साथ अच्छा समय मिल पाया था। हम दोनों ही एक दूसरे के साथ काफी समय से सेक्स करने के बारे में सोच रहे थे लेकिन हमारी इच्छा पूरी ही नहीं हो पा रही थी परंतु हमारे पास पूरा मौका था मैंने कल्याणी को अपनी बाहों में ले लिया था वह मुझे कहने लगी लगता है आज आप बड़े मूड में दिखाई दे रहे हैं? मैंने कल्याणी से कहा तुम्हें तो पता ही है कितने समय हो गए अभी तक हम दोनों ने अच्छे से संभोग भी नहीं किया है और काफी समय से एक अच्छा समय भी हम साथ में नहीं बिता पाए हैं।


कल्याणी कहने लगी बाबा रात तो होने दो तुम तो अभी से शुरू हो गए। मैंने उसे कहा लेकिन रात का मैं इंतजार नहीं कर सकता परंतु कल्याणी के कहने पर मैं रात तक रुक गया।  रात के वक्त कल्याणी ने मुझे दूध का गिलास दिया तो मुझे ऐसी अनुभूति हुई कि जैसे मुझे शादी की पहली रात को दूध का गिलास दिया गया था वैसा ही कुछ मुझे महसूस हो रहा था। कल्याणी मेरे साथ बिस्तर में बैठ चुकी थी मैं कल्याणी को अपनी बाहों में ले चुका था हम दोनों के बीचे मे पहले ना जाने कितने बार सेक्स संबंध बन चुके थे लेकिन मुझे बहुत अच्छा लग रहा था। मैंने कल्याणी के होंठो का बहुत देर तक तुम चुंबन किया जब मैंने उसके स्तनों को अपने मुंह में लेकर चूसना शुरू किया तो वह भी उत्तेजित हो गई और मुझे कहने लगी आज तो मजा ही आ रहा है लगता है तुम पूरे जोश में हो। मैंने कल्याणी से कहा क्यों नहीं और यह कहते ही उसने मेरे तने हुए लंड को अपने हाथ मे ले लिया और काफी देर तक वह मेरे लंड को अपने हाथों में लेकर हिलाती रही परंतु जब उसने मेरे लंड को अपने मुंह के अंदर लेकर चूसना शुरू किया तो उसे बड़ा अच्छा लगने लगा और मुझे भी बहुत अच्छा लग रहा था।


जैसे ही मैंने कल्याणी की योनि के अंदर अपने लंड को प्रवेश करवाया तो उसके मुंह से चीख निकली और वह कहने लगी आज भी आपके लंड को जब मै अपनी चूत में लेती हू तो बड़ा दर्द होता है। मैंने कल्याणी के दोनों पैरों को अपने कंधे पर रख लिया और मैंने उसे काफी देर तक धक्के मारे। जब मेरा लंड पूरी तरीके से छिल चुका था तो मैंने कल्याणी से कहा आज कुछ नया करते हैं। मैंने जब अपने लंड पर सरसों के तेल की मालिश की तो वह पूरी तरीके से चिकना हो चुका था मैंने जैसे ही कल्याणी की गांड के अंदर लंड को प्रवेश करवाया तो मेरा लंड उसकी गांड के अंदर तक जा चुका था। वह मुझे कहने लगी मुझे बहुत दर्द हो रहा है यह पहले ही मौका था जब मैंने कल्याणी की गांड के अंदर अपने लंड को प्रवेश करवाया था लेकिन मुझे बड़ा मजा आता और मैं उसे बड़ी तेजी से धक्के दिए जाता जब हम दोनों गर्मी को बर्दाश्त ना कर सके तो मैंने अपने वीर्य की बूंदों को कल्याणी की गांड में ही डाल दिया।

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