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Thursday, May 23, 2019

पति की गैरमौजूदगी में मुझे बुलाती है वो

Antarvasna, desi kahani:


Pati ki gairmauzudgi me mujhe bulati hai wo सुबह के 7:00 बज रहे थे मैं उठकर अखबार पढ़ ही रहा था कि तभी दरवाजे की डोर बेल बजी मीना मुझे कहने लगी कि इतनी सुबह कौन आया होगा मैंने मीना से कहा पता नहीं मैं दरवाजा खोल कर देखता हूं। मैं जब दरवाजा खोलने के लिए गया तो मैंने देखा सामने गगन खड़े हैं गगन हमारे पड़ोस में ही रहते हैं मैंने गगन से कहा आज आप इतनी सुबह घर पर आए क्या कुछ जरूरी काम था। गगन कहने लगे नहीं ऐसा तो कोई जरूरी काम नहीं था बस सोचा आप से मुलाकात कर लेता हूं काफी दिनों से आपसे मिला भी नहीं था। गगन हमारे पड़ोस में ही रहते हैं लेकिन हम लोगों की मुलाकात काफी समय से हो नहीं पाई थी उनका हमारे परिवार के साथ बहुत ही अच्छे रिलेशन है हम लोग एक दूसरे के परिवार को काफी वर्षों से जानते हैं। मैंने मीना से कहा मीना हम दोनों को चाय तो पिला दो मीना कहने लगी बस अभी लेकर आती हूं मीना थोड़ी देर बाद चाय ले आई।


हम दोनों चाय पीते पीते बात करने लगे मैंने गगन से पूछा क्या आपका कारोबार अच्छा चल रहा है तो वह कहने लगे हां मेरा कारोबार भी अच्छा चल रहा है। गगन ने मुझसे पूछा आपकी नौकरी तो ठीक चल रही है ना तो मैंने कहा हां साहब बस सब कुछ अच्छा ही चल रहा है। हम लोगों की बात हो ही रही थी कि तभी मैंने उनसे अपने घर के ऊपरी हिस्से को किराए पर देने की बात कही वह मुझे कहने लगे कि यदि आप कहे तो मैं मेरे एक परिचित हैं उनसे बात करूं। मैंने गगन से कहा हां क्यों नहीं यदि आप उनसे बात कर लेंगे और उन्हें यहां अच्छा लगेगा तो वह लोग यहां रह सकते हैं गगन कहने लगे ठीक है मैं आपको आज शाम को ही बताता हूँ। गगन मुझे कहने लगे चलिए मैं भी अभी चलता हूं और गगन भी चले गए कुछ देर बाद मैं भी ऑफिस के लिए तैयार हुआ और अपने ऑफिस जाने की तैयारी करने लगा। मैं अपने ऑफिस जाने की तैयारी में था और उसी वक्त मुझे पापा का फोन आया और वह कहने लगे बेटा हम लोग बनारस से निकल चुके हैं। पापा और मम्मी बनारस अपने ममेरे भाई के यहां गए हुए थे मैंने उन्हें कहा पापा आप लोग तो दोपहर तक पहुंच जाओगे ना।


वह मुझे कहने लगे कि हां बेटा शायद हम लोग दोपहर तक पहुंच जाएंगे यदि ट्रेन सही समय पर रही तो, मैंने उन्हें कहा आप मुझे बता दीजिएगा मैं आपको लेने के लिए रेलवे स्टेशन आ जाऊंगा। पापा कहने लगे नहीं बेटा तुम रहने देना हम लोग आ जाएंगे मैंने पापा से कहा लेकिन पापा आप कैसे आएंगे तो वह कहने लगे कि हम लोग स्टेशन से ही ऑटो कर लेंगे तुम उसकी चिंता ना करो। मैंने पापा से कहा ठीक है पापा देख लीजिएगा यदि मुझे आना पड़ेगा तो आप मुझे पहले फोन कर के बता दीजिएगा। पापा कहने लगे ठीक है बेटा मैं तुम्हें बता दूंगा यदि कहीं पर कोई परेशानी हुई तो मैं तुम्हें जरूर बता दूंगा। पापा की तबीयत ठीक नहीं रहती है लेकिन उसके बाद भी वह अपना काम स्वयं ही करते हैं मैं अपने ऑफिस के लिए निकल चुका था और मैंने मीना को बता दिया था कि मैं अपने ऑफिस के लिए निकल रहा हूं। मीना ने कहा ठीक है और फिर मैंने मीना को यह भी बता दिया था कि पापा मम्मी आज आने वाले हैं मीना कहने लगी ठीक है मैं उनके लिए आज दोपहर में खाना बना दूंगी। मैं अपने ऑफिस जा चुका था और शाम को जब मैं ऑफिस से लौटा तो पापा मम्मी घर आ चुके थे। मेरे घर लौटने के कुछ देर बाद ही गगन घर पर आये और उनके साथ एक व्यक्ति थे गगन ने मुझे कहा कि आज सुबह मैं आपको जिनके बारे में बता रहा था यह वही है। उन्होंने मुझे संजय से मिलवाया मैंने संजय को अपना घर दिखाया तो उन्हें अच्छा लगा वह मुझे कहने लगे कि हम लोग अगले हफ्ते यहां रहने के लिए आ जाएंगे। हमारी बात पक्की हो चुकी थी और गगन भी जा चुके थे। अगले हफ्ते जब वह लोग अपना सामान ले आए तो उनके साथ उनका पूरा परिवार था संजय एक अच्छे पद पर हैं और वह बड़े ही अच्छे व्यक्ति हैं। उन्होंने अपने सामान को रखवा लिया था अब उनके परिवार से हमारी अच्छी बनने लगी थी संजय के परिवार में उनकी पत्नी सुजाता और उनकी एक बेटी है हम लोगों के बीच काफी अच्छी बातचीत हो चुकी थी। संजय और सुजाता को एक दिन हमने अपने घर पर डिनर के लिए इनवाइट किया मीना चाहती थी कि वह लोग डिनर के लिए हमारे साथ आए।


रात को जब मीना ने पूरी तैयारी कर ली थी तो मैं भी अपने ऑफिस से घर लौट चुका था मैं जब ऑफिस से घर लौटा तो थोड़ी देर बाद संजय और सुजाता अपनी छोटी बेटी को लेकर घर पर आ चुके थे। उस दिन हम सब लोगों ने साथ में डिनर किया और उसके बाद वह लोग चले गए काफी समय बाद एक दिन सुजाता और संजय के बीच में झगड़ा हुआ जिससे कि सुजाता अपने मायके चली गई। संजय काफी दुखी थे मैंने संजय को समझाया और कहा ऐसा कई बार हो जाता है मेरे और मीना के बीच भी ऐसा कई बार हो जाता है लेकिन इसमें आपको दिल छोटा करने की जरूरत नहीं है। संजय मुझे कहने लगे कि शोभित जी ऐसा नहीं है लेकिन सुजाता को भी तो कहीं पर एडजस्ट करना पड़ेगा मैंने संजय से कहा चलिए कोई बात नहीं आप ही सुजाता से माफी मांग लीजिए। वह कहने लगे कि हां मैं ही सुजाता को फोन कर लेता हूं उन्होंने सुजाता को फोन कर लिया था और सुजाता कुछ दिनों बाद घर लौट आई थी। मीना और मैं इस बारे में बात कर रहे थे कि संजय और सुजाता काफी अच्छे हैं लेकिन कई बार उन लोगों के बीच में झगड़े हो जाया करते थे। मुझे लगता था कि शायद संजय सुजाता को समय नहीं दे पा रहे हैं इसकी वजह से उन दोनों के बीच में झगड़े होते रहते थे। गगन एक दिन मुझे हमारे घर के बाहर दुकान पर मिले जब वह मुझे मिले तो वह मुझसे पूछने लगे की शोभित जी आप कैसे हैं।


मैंने उन्हें कहा मैं तो ठीक हूं लेकिन आप बताइए आप अभी कहां से आ रहे हैं। वह कहने लगे कि मैं कुछ जरूरी काम से गया हुआ था बस अभी घर लौट ही रहा हूं मैंने गगन से कहा आप कभी घर पर आइए। गगन कहने लगे भाई साहब आजकल बिल्कुल भी समय नहीं लग पाता है इसलिए मैं कहीं भी नहीं जा पा रहा हूं लेकिन अगले हफ्ते देख लूंगा यदि समय मिला तो आपसे मिलने के लिए आता हूं, उसके बाद मैं भी अपने घर चला आया। कुछ दिनों के लिए मेरी पत्नी मायके चली गई थी उसी वक्त संजय भी अपने काम से कहीं गए हुए थे। सुजाता घर पर अकेली थी मैं सुजाता के पास चला गया और उससे बात करने लगा सुजाता मुझे कहने लगी मेरे और संजय के बीच में कई बार झगड़े हो जाते हैं लेकिन उससे आपको तो कोई परेशानी नहीं है। मैंने सुजाता को समझाया और कहां नहीं सुजाता ऐसा कुछ नहीं है लेकिन तुम लोगों को आपस में झगड़े नहीं करने चाहिए। सुजाता मुझे कहने लगी मुझे भी लगता है कि हम लोगों को झगड़े नहीं करने चाहिए लेकिन हम दोनों के बीच फिर भी झगड़े हो ही जाते हैं। मैंने सुजाता से झगड़ों का कारण पूछा तो उसने मुझे बताया कि वह क्यो संजय के साथ झगड़ा करती है। संजय और उसके बीच में शारीरिक संबंध अच्छे से नहीं बन पाते हैं और सुजाता को कई बार सेक्स की जरूरत पड़ती है तो उसकी जरूरतों को संजय पूरा नहीं कर पाते। उसने उस दिन मुझे बडे ही बेबाक तरीके से बात की मुझे लगा कि सुजाता बड़ी बिंदास और बोल्ड है, उस दिन मैं अपने घर लौट आया। मैंने सुजाता के स्तनों की तरफ देखा तो मेरे मन में सुजाता को लेकर सिर्फ सेक्स भावना ही जाग रही थी मैंने सुजाता के साथ सेक्स करने के बारे में सोच लिया था।


मैंने सुजाता को अपनी बाहों में लिया जब उसके स्तनों को मैं दबाने लगा तो उसे अच्छा लगने लगा मैं उसके होठों को चूम रहा था और वह बहुत ही ज्यादा खुश नजर आ रही थी। उसने मुझे कहा आप ऐसे ही करते रहिए मैंने  सुजाता से कहा मुझे बहुत अच्छा लग रहा है जब मैं सुजाता कि चूत को चाटने लगा तो वह बहुत खुश हो गई और कहने लगी कि आप ऐसे ही मेरी चूय को चाटते रहिए सुजाता की चूत से पानी बाहर की तरफ निकल रहा था और मुझे बहुत अच्छा लग रहा था। मैंने काफी देर तक उसकी चूत का रसपान किया और उसकी चूत से मैंने पानी भी निकाल कर रख दिया था अब मै भी उत्तेजित होने लगा था। सुजाता ने मेरी उत्तेजना को उस वक्त और भी ज्यादा बढ़ा दिया जब उसने मेरे लंड को अपने मुंह में लेकर चूसना शुरू किया और वह मेरे लंड को बड़े ही अच्छे तरीके से चूस रही थी मुझे बहुत अच्छा लग रहा था और बड़ा मजा भी आ रहा था। काफी देर तक उसने मेरे लंड को ऐसे ही चूसा मैने उसकी चूत से पानी बाहर निकाल कर रख दिया था अब हम दोनों ही रह नहीं पाए।


जब मैंने अपने लंड को सुजाता की योनि पर सटाया तो वह उत्तेजित होने लगी और मुझे कहने लगी आप मेरी चूत के अंदर अपने लंड को डाल दीजिए। मैंने अब सुजाता की योनि के अंदर अपने लंड को घुसा दिया था उसकी योनि के अंदर मेरा लंड जाते ही वह चिल्लाने लगी और उसके मुंह से चीख निकलने लगी वह बड़ी मादक आवाज में सिसकिया ले रही थी और मुझे बहुत अच्छा लग रहा था। मैंने काफी देर तक उसे ऐसे ही धक्के मारे वह खुशी से झूम उठी थी। मैंने सुजाता से कहा मुझे बड़ा अच्छा लग रहा है तो सुजाता कहने लगी कि मुझे भी बहुत अच्छा लग रहा है इतने समय बाद किसी ने मेरी सेक्स की जरूरतों को पूरा किया है। जब मेरा वीर्य सुजाता की चूत के अंदर प्रवेश हो गया तो वह कहने लगी आज मेरी इच्छा पूरी हो चुकी है। सुजाता उसके बाद मुझे हमेशा घर पर बुलाने लगी थी जब भी संजय नहीं होते तो उसके गैरमौजूदगी में सुजाता के पास चला जाता था।



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