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    दोस्त की मम्मी को प्यार किया

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    दोस्तो, मेरा नाम अमित है, मैं हल्द्वानी नैनीताल का रहने वाला हूँ, मेरा कद 5 फुट 3 इंच है। मेरे लंड का साइज़ सामान्य है। यह Meri Sex Stories तब की है जब मैं अपने दोस्त के घर दिल्ली घूमने आया था। मैं पहली बार अपने दोस्त के घर आया था, वहाँ उसके पापा-मम्मी और वो रहता था।


    उसकी मम्मी गजब की सुंदर माल हैं, उनकी उम्र करीब 38 साल की रही होगी। गजब का फिगर था उनका… मस्त 36 के साइज़ के चूचे और 38 की उठी हुई गांड!
    जब वो चलती थीं तो जवान लोंडों के लंड अपने आप खड़े हो जाते थे जैसा कि मेरा खड़ा हो गया।


    जब मैंने उन्हें पहली बार देखा था तो वो क्या जबरदस्त माल दिख रही थीं।


    वैसे तो मैं एक हफ्ते के लिए आया था.. पर बाद में मैं एक माह के लिए अपने दोस्त के घर पर रुका रहा।


    दोस्त की मम्मी काफी खुल कर बात करने वाली औरत थीं, वो मेरे से भी वैसे ही बात करती थीं।


    एक दिन में और मेरा दोस्त बाहर घूमने नेहरू प्लेस गए हुए थे। मेरी तबियत थोड़ी खराब थी.. तो मैं वापस घर लौट आया, मेरा दोस्त किसी काम के लिए रुक गया।


    जब मैं घर गया तो मेन गेट खुला हुआ था। मैं अन्दर आ गया.. अन्दर से मुझे कुछ अजीब सी आवाजें सुनाई दे रही थीं, जो कि आंटी के कमरे से आ रही थीं।


    मैंने धीरे से खिड़की से झाँक कर देखा कि आंटी लेटी हुई थीं और एक काला सा एक लड़का उनकी चुत चाट रहा था, आंटी ‘सिई उम्म्ह… अहह… हय… याह… ’ कर रही थीं.


    फिर वो दोनों 69 के आसन में आकर एक-दूसरे के ऊपर आ गए, आंटी बड़े मजे से उसका लंड चूस रही थीं।
    फिर उसने उठ कर अपना काला लंड आंटी की चुत में पूरा का पूरा एक बार में डाल दिया।


    आंटी की चीख निकल पड़ी और वो आंटी को धीरे-धीरे चोदने लगा। बीच-बीच में वो आंटी के चूचे बड़ी बेरहमी से मसल रहा था। थोड़ी देर में आंटी को भी मजे आने लगे। पूरा कमरा आंटी की आवाजों से भरा हुआ था।


    फिर आंटी ने उसे अपने नीचे लिटा कर उसके लंड की सवारी शुरू कर दी। आंटी की मोटी गांड ठीक खिड़की के सामने यानि मेरी आँखों के सामने थीं।
    क्या गोरी गांड थी आंटी की.. और उनकी चुत में वो काला लंड मुझे बुरा लग रहा था। आंटी अपनी गांड उठा-उठा कर अजीब अजीब आवाजें ‘उह्हह्ह.. अह्ह्ह..’ की आवाजें निकाल रही थीं।


    मुझे यकीन नहीं हो रहा था कि मैं अपने दोस्त की मम्मी को चुदते हुए देख रहा था। मेरे लंड का बुरा हाल हो रहा था और लग रहा था कि अब आंटी भी पूरी तरह से कई बार झड़ चुकी हैं।


    वो काला लड़का भी, अब आंटी उसके ऊपर से उठीं.. आंटी और वो लड़का दोनों पसीने से लथपथ थे। आंटी ने उठ कर उसे पैसे दिए। इसके आंटी और उस लड़के ने अपने-अपने कपड़े पहने और लड़का बाहर को निकलने को हुआ।


    मैं वहाँ से हट कर बाथरूम में छिप गया। आंटी ने अपनी नाईटी पहनी और उस लड़के को छोड़ कर वो जैसे ही लौटीं। मैं बाथरूम से निकल आया।


    आंटी मुझे देख घबरा कर बोलीं- अमित तू कब आया?
    मैंने भी हिम्मत करके बोला- जब आप अन्दर आप बिजी थीं।
    वो घबरा कर बोलीं- तूने सब देख लिया?
    मैंने कहा- हाँ.. सब देख लिया।


    अब तो वो और घबरा गईं और मुझसे बोलीं- प्लीज किसी को मत बताना!
    मैंने कहा- ठीक है.. पर एक शर्त है।
    वो बोलीं- क्या?
    मैंने कहा- मैं भी एक बार आपको प्यार करना चाहता हूँ।


    पहले तो आंटी राजी नहीं हुईं.. पर बाद में मैंने सबको बता देने का डर बताया तो वे मान गईं।
    उनके ‘हाँ’ करते ही मैंने उन्हें अपनी बांहों में पकड़ कर एक जोरदार पप्पी उनके होंठों पर दे दी।
    वो बोलीं- अभी नहीं.. आज रात तेरे अंकल बाहर जा रहे हैं.. तो रात को प्यार करेंगे।


    मैं उस दिन रात होने का बेसब्री से इंतजार करने लगा। रात होते ही जब मेरा दोस्त सो गया तो मैं चुपचाप आंटी के कमरे में गया।
    आंटी सो गई थीं।


    मैंने अपना अंडरवियर उतार दिया और आंटी के बगल में लेट गया, मैं आंटी की नाईटी उठा कर अपने लंड से उनकी गांड सहला रहा था। अचानक आंटी उठ गईं।
    आंटी बोलीं- तू आ गया.. अपनी आंटी को प्यार करने?


    मैंने आंटी को बिस्तर पर पटका और उनके होंठों को चूसने लगा, आंटी भी अब मेरा साथ दे रही थीं।
    एक ही बार में मैंने आंटी की नाईटी उतार दी, अब आंटी सिर्फ पैंटी में थीं। मैं अपने कपड़े पहले ही उतार चुका था।


    मैं आंटी के चूचों को पागलों की तरह चूस रहा था, फिर मैंने उनको अपना लंड चूसने को कहा, आंटी मेरा लंड चूसने लगी। मुझे बड़ा मज़ा आ रहा था। मैं दो बार आंटी के मुँह में झड़ चुका था।


    फिर मैंने आंटी को सीधा लिटा कर उनकी पैंटी उतारी और उनकी चुत में अपना लंड डाल कर धीरे-धीरे धक्का मारने लगा। आंटी ‘सिई.. सि सि..’ की आवाजें निकाल रही थीं। मैं पूरी तरह से आंटी के ऊपर चढ़ा हुआ था और उनके चूचे चूस रहा था।


    फिर मैंने आंटी को घोड़ी बनाया और पीछे से उनके चूचे पकड़ कर उन्हें चोदने लगा।


    अब तक आंटी दो बार झड़ चुकी थीं। मैंने एक राउंड आंटी को अपने ऊपर बिठा कर भी चोदा।
    मेरे हाथ आंटी की गांड पर थे, क्या मस्त उठी हुई गांड थी आंटी की..
    आंटी जोर-जोर से आवाजें निकाल कर बोले जा रही थीं- आह्ह.. चोदो मुझे राजा अह्ह्ह.. उह्ह्ह्ह..


    अब मैं भी झड़ने वाला था। कुछ धक्के मार कर मैं भी आंटी की चुत में झड़ गया। कुछ मिनट तक हम दोनों नंगे ही बिस्तर पर लेटे रहे।


    फिर मैंने उनकी गांड मारने के लिए कहा.. पर वो नहीं मानी। लेकिन मेरे ब्लैकमेल करने पर वो मान गईं। मैंने उनकी मोटी और गोरी गांड में अपना लंड डाल दिया।
    पहले तो उन्हें बहुत दर्द हुआ, वो बोलीं- प्लीज मत कर अमित.. मैं मर जाऊँगी।


    पर मैं कहाँ मानने वाला था, धीरे-धीरे मैंने अपना पूरा लंड आंटी की गांड में डाल दिया।
    उफ़.. कितनी टाइट गांड थी आंटी की।


    अब आंटी भी ‘अह्ह्ह्हह.. उह्ह्ह्ह..’ करके चुदने का मज़ा ले रही थीं।


    उस रात मैंने आंटी को सुबह 6 बजे तक चोदा।


    फिर चुपचाप अपने कमरे में आकर सो गया।


    अब जब भी मैं दिल्ली जाता हूँ, तो मैं और आंटी एक-दूसरे को खूब प्यार करते हैं। आंटी ने अपनी एक सहेली को भी मुझसे चुदवाया था.. वो कहानी अगली बार लिखूँगा।


    आप लोग जरूर बताना Meri Sex Stories आपको कैसी लगी।
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