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    पड़ोस वाली भाभी की चुत चोद कर मदद की

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    Meri Desi Kahani तीन महीने पहले की है, मैं थोड़ा बीमार हो गया था और मैं इलाज के लिये अपनी बहन के पास लुधियाना चला गया जो एक डॉक्टर हैं।
    मैं अंकुश हूँ, मेरी हाइट 172 सेंटीमीटर है और मेरा शरीर कसरती है, मैं जालंधर से हूँ।
    मुझे शादीशुदा भाभियों और आंटियों की चूत लेने में बहुत मजा आता है क्योंकि इसमें कोई डर नहीं रहता, ऐसी भाभियाँ या आंटियां चुदवाने में भी बहुत मजा देती हैं।


    वो वहाँ किसी के घर में पेइंग गेस्ट के तौर पर रहती हैं। उसके लैंडलार्ड स्वभावतः बहुत ही अच्छे हैं उनका एक लड़का और बहू भी है। जिनको मैं भाभी कहता हूँ, मुझे भाभी बहुत ही हॉट लगती हैं।


    लैंडलार्ड के लड़के का एक्सिडेंट हो गया था और वो कई दिनों से बिस्तर पर ही था। वो इस घटना के कारण ना ही कुछ बोल पाता है और ना ही चल पाता है।
    ऐसे में भाभी बहुत उदास थीं और किसी से ज्यादा बात भी नहीं करती थीं।


    जब मेरी बहन हॉस्पिटल चली जाती तो मैं कमरे में एकेला ही हो जाता था और भाभी मुझे खाने को कुछ ना कुछ दे जाती थीं।


    एक दिन जब वो मुझे जूस देने आईं.. तो उनकी आँखों में मुझे खुद के लिए अलग सी चमक दिखी, वे मुझे ऐसे देख रही थीं.. जैसे कि वो मुझे नंगा देख रही हों।
    मैंने भाभी से पूछा- भाभी क्या बात है?
    तो उन्होंने कहा- कुछ नहीं बस ऐसे ही!


    उस दिन से वो मुझसे खुल कर बात करने लगीं। मैं उनसे उनकी लाइफ के बारे में पूछने लगा। वो कुछ उदास सी हो गईं।
    मैंने जोर देकर पूछा- क्या बात है भाभी.. क्या मुझे भी नहीं बताओगी?


    पहले तो वो बहुत मना करती रहीं.. फिर बाद में बहुत जोर देने पर बताया कि तुम्हें तो पता ही है कि तुम्हारे भैया का एक्सिडेंट हो गया है और मैं काफी दिनों से तड़प रही हूँ। इधर कोई नहीं है.. जो मेरी परेशानी को हल कर सके।


    मैंने पूछा- कैसी परेशानी? आप मुझे बताओ मैं 101% जरूर सॉल्व करूँगा।
    भाभी को कसम दे दी मैंने!


    भाभी तो मानो अन्दर ही अन्दर बहुत खुश हो गईं.. पर मुझे शो नहीं होने दिया, भाभी ने कहा- तुम्हें तो पता ही है एक लड़की को क्या चाहिए होता है?
    वो मुझे घुमा-फिरा कर बताने लगीं।


    मैं भी समझ चुका था कि वो क्या चाहती हैं.. पर मैं उनके मुँह से ही सुनना चाहता था।


    भाभी कहने लगीं- मुझे सेक्स किए हुए कई दिन हो गए हैं और मैं घर से बाहर भी कभी नहीं गई हूँ। मेरी तड़प बहुत ज्यादा बढ़ गई है.. अब तो दिल करता है कि किसी से भी…!


    जब उन्होंने ऐसा कहा तो मैंने भाभी का हाथ पकड़ लिया- भाभी.. मैंने आपसे प्रामिस किया था कि मैं आपकी हेल्प करूँगा। आप मुझे एक मौका दीजिए.. आप ज़िंदगी भर याद रखोगी कि मैंने कैसे आपको खुश किया।


    मेरा भाग्य इतना अच्छा था कि अगले दिन मेरी सिस्टर के लैंडलार्ड का प्लान बना कि वो लोग भैया को दिखाने दिल्ली लेकर जा रहे हैं और 3-4 दिन में वापिस आएंगे।


    वो सब लोग सुबह ही चले गए, उनके जाने के बाद अब घर में मैं भाभी और मेरी सिस्टर ही रह गए थे और थोड़ी देर बाद मेरी बहन भी हॉस्पिटल को निकल गईं।


    अब मैं भाभी के रूम में गया, भाभी मेरा ही वेट कर रही थीं, मैंने भाभी को जोर से अपने सीने से लगा लिया और किस करने लगा।
    वो तो मुझसे भी ज्यादा जल्दी में थीं.. और बहुत ही खुश थीं।


    मैं भाभी के शरीर पर किस करता रहा और उनके मम्मों को दबाता रहा। कुछ ही पलों में चुदास बढ़ गई और मैंने भाभी को बिस्तर पर लिटा दिया। मैं भाभी को बेड पर ही जोर-जोर से चुम्बन करने लगा।


    मैंने फिर धीरे से भाभी का टॉप उतारा और उनकी कैपरी भी उतार दी। अब वो सिर्फ़ ब्रा और पेंटी में ही थीं। सच में वो ब्रा और पेंटी में बहुत ही मस्त माल लग रही थीं.. बिल्कुल स्वर्ग की अप्सरा सी लग रही थीं, उनके 34 डी साइज के चूचे ब्रा से बाहर आने को उतावले हो रहे थे और उनकी पेंटी पूरी गीली हो चुकी थी।


    उनका कामुक शरीर देख कर मैंने जल्दी से अपने कपड़े उतारे और अब मैं भी सिर्फ़ शॉर्ट्स में आ गया था। मैं भाभी के मम्मों को ब्रा के ऊपर से ही किस करने लगा। अगले ही पल मैंने भाभी की ब्रा का हुक खोल दिया।


    वॉवव.. क्या बूब्स थे..!


    मैं तो भाभी के तने हुए चूचों को देखता ही रह गया। मैंने जरा भी देर किए बिना भाभी के मम्मों की निप्पल को चूसना स्टार्ट कर दिया। सच में भाभी के क्या कड़क निप्पल थे.. और चूचे तो ब्रा से निकलने के बाद इतने बड़े हो गए थे जैसे किसी पॉर्न स्टार के चूचे हों।


    मैं कुछ मिनट उनके मम्मों को ही चूसता ही रहा। फिर धीरे से उनके पूरे शरीर पर किस करने लगा। मैं नीचे को आते उनकी नाभि पर किस करता हुआ उनकी पेंटी के पास आ गया।


    अगले ही पल मैंने भाभी की पेंटी उतार दी। वाऊ.. क्या स्मेल थी उनकी चूत की.. एकदम मस्त गीली चूत थी।


    मैं उनकी चूत पर किस करने लगा और जब मैंने अपनी जीभ से उनकी चूत को चाटने लगा तो वो तो बहुत मदहोश होने लगीम भाभी कहने लगीं- आह्ह.. ऐसा तो मेरे साथ तुम्हारे भईया ने कभी नहीं किया था।
    मैंने भी भाभी से कहा- मैंने आपको कहा था ना कि मैं आपको ऐसे खुश करूँगा कि आप कभी भी भूलोगी नहीं।


    फिर मैंने अपना शॉर्ट्स भी उतार दिया, भाभी मेरे लंड को देख कर एकदम से डर गईं, वे कहने लगीं- ओह्ह.. इतना बड़ा लंड..! तुम्हारे भैया का तो इससे आधा ही है.. लगता है आज तुम मेरी चूत को फाड़ दोगे।
    मैंने कहा- भाभी आप फिक्र ना करो.. आज आपको मैं जन्नत की सैर कराऊँगा।


    भाभी ने एक पल भी देर ना करते हुए मेरे लंड को अपने मुँह में डाल लिया और चूसने लगीं।


    भाभी के द्वारा लंड चुसाई करने से मेरा लंड और सख्त हो गया। कुछ ही देर में मेरा माल निकलने वाला था। मैंने बिना भाभी को बताए ही उनके मुँह में ही उसको निकाल दिया।
    भाभी भी उसको जूस की तरह पी गईं।


    फिर हम दोनों आपस में चिपक गए और किस करने लगे। कुछ देर के लिए हम ऐसे ही चिपक कर लेटे रहे और एक-दूसरे की जुबान को चूसते रहे।


    अब भाभी ने चुदास से भरते हुए कहा- राजा अब और मत तड़पाओ.. बस मेरी आग बुझा दो।
    मैंने अपना लंड भाभी की चूत पर रखा और जोर से धक्का लगा दिया.. पर मेरा लंड चूत में पूरा अन्दर नहीं गया क्योंकि भाभी काफी दिनों से भईया के लंड से चुदी नहीं थीं। मुझे भाभी की चूत ऐसी लग रही थी कि जैसे किसी कुंवारी चूत की सील तोड़ने को मिल गई हो।


    मैंने एक बार फिर से चूत में लंड का धक्का दिया, इस बार मेरा पूरा लंड उनकी चूत के अन्दर घुस गया।
    भाभी जोर से चिल्ला उठीं – आऊ.. ऊऊहह.. उम्म्ह… अहह… हय… याह… ओक्ककह.. मर गई.. रे फट गई आह्ह.. चूऊत.. आह्ह..’


    मैंने भाभी को बहुत जोर से जकड़ लिया और उनके मम्मों को चूसने लगा। भाभी चुप सी हुईं.. तो मैं अपना लंड चूत में अन्दर-बाहर करने लगा।


    भाभी और जोर से चिल्लाने लगीं, मैंने उनकी आवाज को अनसुना करके अपनी स्पीड बढ़ा दी और भाभी के होंठों को किस करने लगा। होंठों को दबाने से भाभी की आवाज आनी भी कुछ कम हो गई। उस दिन मैं भाभी को कई मिनट तक चोदता रहा, भाभी दो बार झड़ चुकी थीं।


    फिर मैंने अपना सारा रस भाभी की चूत में ही छोड़ दिया।


    उनको इस चुदाई में बहुत मजा आया। हम दोनों थक कर चूर हो गए थे और लेटे हुए थे। हमारे इस सेक्स प्रोग्राम में हमें टाइम का पता ही नहीं चला।


    तभी डोरबेल बजी.. मैंने टाइम देखा तो सिस्टर के आने का टाइम हो गया था। मैं अपने कपड़े लेकर वहाँ से अपने रूम में भागा और भाभी भी जल्दी-जल्दी अपने कपड़े पहन कर दरवाजा खोलने चली गईं।


    मुझे भाभी को और चोदने का मन था पर इस वक्त हमारा सेक्स बीच में ही छूट गया.. पर यह भी ज्यादा देर तक नहीं छूटा। फिर उस रात को हमने पूरी रात चुदाई की.. क्योंकि मेरी सिस्टर भाभी के साथ सोने चली गईं।


    मैंने भाभी को कह दिया था कि सिस्टर के दूध में आज नींद की दवा मिला देना। भाभी ने ऐसा ही किया और जब सिस्टर गहरी नींद में सो गईं.. तो भाभी मेरे रूम में आ गईं।


    इस बार वो मेरे रूम में बिना कपड़ों के आ गई थीं क्योंकि हमें अब किसी का डर नहीं था। मैं भी अपने कपड़े खोल कर भाभी की चुदाई के लिए रेडी था।


    भाभी ने आते ही मुझे किस करना शुरु कर दिया और हम दोनों ने सेक्स का पूरा मजा लिया। उस दिन मैंने भाभी को 3 बार चोदा और उनकी कई दिनों से तड़प रही चूत को शांत कर दिया।


    आज भाभी तो इतनी ज्यादा खुश थीं कि वो मुझे छोड़ कर जाना ही नहीं चाहती थीं। ऐसे ही हमारा यह चूत चुदाई का सिलसिला 4 दिनों तक चलता रहा।


    इसके बाद भाभी की चूत चोदने का कार्यक्रम आज तक चल रहा है और जब भी मैं लुधियाना जाता हूँ तो भाभी की चूत को शांत जरूर करता हूँ। जब भी भाभी ज्यादा परेशान हो उठती हैं.. तो उनकी एक कॉल पर मैं उनकी चूत बजाने के लिए स्पेशियली लुधियाना आ जाता हूँ।


    हम दोनों बहुत खुश हैं और भाभी तो मुझसे भी ज्यादा खुश हैं।


    अब आप लोग बताओ कि आपको Meri Desi Kahani कैसी लगी?
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