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    चलो शुरू करो बाबू अब ना होगा इंतजार

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    Kamukta, hindi sex story, antarvasna:

    Chalo shuru karo babu ab na hoga intjar मेरी एमबीए की पढ़ाई पूरी हो चुकी थी हमारे कॉलेज में कॉलेज प्लेसमेंट होने लगे थे सब लोग मुझे पहले ही बधाइयां दे रहे थे वह कहने लगे कि तुम्हारा तो अच्छी कंपनी में हो ही जाएगा। आखिर मुझ में ऐसा क्या था कि सब लोग मुझे बधाई दे रहे थे सब लोगों को यह तो पता ही था कि मैं पढ़ने में पहले से ही अच्छा था इस वजह से सब लोग मुझे पहले ही बधाई दे रहे थे। मैं हर काम में सबसे आगे रहा करता लेकिन मुझे मेरी चिंता नहीं थी मुझे तो अपने दोस्त प्रदीप की चिंता थी मेरा दोस्त प्रदीप जो कि मेरा जिगरी है मैं चाहता था कि उसका सिलेक्शन भी उसी कंपनी में हो जिसमें कि मेरा हो। बचपन से ही प्रदीप मेरे साथ स्कूल में पढ़ता आया है और मैंने उसकी हमेशा ही मदद की है लेकिन इस वक्त उसकी मदद कर पाना मेरे बस से बाहर था। मैं प्रदीप का इंतजार कर रहा था कि वह कब आएगा लेकिन वह कहीं नजर ही नहीं आ रहा था।

    मैंने अपने जेब से मोबाइल को बाहर निकाला और प्रदीप को फोन करने के बारे में सोचा लेकिन तभी प्रदीप सामने से मुझे आता हुआ दिखाई दिया मैंने प्रदीप को देखते ही कहा तुम कहां चले गए थे मैं तुम्हारा इंतजार कब से कर रहा हूं। प्रदीप कहने लगा यार आज घर से आने में देर हो गई मैंने प्रदीप से कहा तुम तैयार तो हो ना प्रदीप कहने लगा हां क्यों नहीं। मैंने प्रदीप से कहा देखो दोस्त आज तक हम दोनों बचपन से एक साथ ही रहे हैं और मैं चाहता हूं कि आगे भी हम दोनों एक साथ ही रहे और हम दोनों का एक ही कंपनी में हो जाए। मुझे पूरी उम्मीद थी मेरा तो हो ही जाएगा क्योंकि मुझे अपने ऊपर हमेशा से ही भरोसा रहा है। मुझसे पहले प्रदीप इंटरव्यू देने के लिए गया था मेरी दिल की धड़कने बड़ी हुई थी मैं सोचने लगा कि प्रदीप से वह लोग क्या सवाल कर रहे होंगे और प्रदीप किस प्रकार से उन लोगों को फेस कर रहा होगा। मैं यह सब चीजें अपने दिमाग में काल्पनिक तौर पर सोच रहा था लेकिन प्रदीप अभी तक बाहर नहीं आया था मेरी नजर उसी भूरे रंग के दरवाजे पर थी जिससे प्रदीप अंदर गया था। मैं काफी देर तक प्रदीप का इंतजार करता रहा लेकिन प्रदीप आया ही नहीं था मैंने घड़ी पर नजर दौड़ाई तो देखा 1:50 हो रहे थे और प्रदीप 1:30 बजे कमरे में गया था प्रदीप को 20 मिनट हो गए थे।

    ऐसा लग रहा था जैसे यह 20 मिनट ना होकर पता नहीं वर्षों से मैं प्रदीप का इंतजार कर रहा हूं तभी दरवाजा खुला तो मैंने देखा प्रदीप के चेहरे पर उसकी हंसी गायब थी मैं घबराने लगा। प्रदीप मेरे पास आया और मैंने उससे पूछा क्या हुआ तो प्रदीप कहने लगा बस कुछ नहीं ऐसे ही उन्होंने मुझसे कुछ सवाल किए। मैंने प्रदीप से कहा लेकिन तुम तो काफी देर से अंदर थे प्रदीप कहने लगा हां यार वह मुझसे काफी कुछ सवाल पूछ रहे थे लेकिन मैंने उन सब का जवाब तो दे दिया। कुछ देर बाद प्रदीप के चेहरे पर मुस्कुराहट वापस लौटने लगी और प्रदीप कहने लगा मेरा इंटरव्यू बहुत ही अच्छा हुआ और वह लोग मुझसे बहुत खुश हैं। मैंने प्रदीप से हाथ मिलाया और कहा यह हुई ना बात मुझे तुम से पूरी उम्मीद थी कि तुम बहुत अच्छा करोगे। मेरा नंबर करीब एक घंटे बाद आया और जब एक घंटे बाद मैं अंदर गया तो वहां पर सामने तीन लोग बैठे हुए थे और उन तीनों के चेहरे पर बिल्कुल भी हंसी नहीं थी। जैसे ही उन लोगों ने मुझसे सवाल करने शुरू किए तो मैं सारे सवालों का जवाब देता गया और उन्होंने मुझसे मेरे बारे में पूछा। मैंने उन्हें अपने बारे में भी बता दिया था मुझे पूरी उम्मीद थी कि मेरा सिलेक्शन हो जाएगा उन्होंने मुझे कहा कि हम आपको कल बताएंगे कि किस का सिलेक्शन हुआ है। अगले दिन जब मैं सुबह उठा तो मेरे दिमाग में यही चल रहा था कि किस किस का सिलेक्शन हुआ होगा क्योंकि जिस कंपनी के लिए हमने इंटरव्यू दिया था वह कंपनी जानी मानी थी मुझे नहीं मालूम था कि मेरा और प्रदीप का उस कंपनी में हो जाएगा। हम दोनों का सिलेक्शन हो चुका था मैं बहुत ज्यादा खुश था और प्रदीप भी बहुत  खुश था आखिरकार खुशी की बात तो थी ही क्योंकि हम दोनों दोस्तों का एक ही कंपनी में जो हो चुका था।

    हम दोनों को बेंगलुरु जाना था मेरी मम्मी हालांकि इस बात के लिए तैयार नहीं थी लेकिन मैं चाहता था कि मैं बेंगलुरु जाऊं और वहीं से अपने काम की शुरुआत करुं। आखिरकार मेरी मम्मी को मेरे पापा ने मना ही लिया उन्होंने मम्मी से कहा कि कौशल को जाने दो उसकी अपनी जिंदगी है और अब वह भी आगे कुछ करना चाहता है। मेरी मम्मी को मनाना बड़ा मुश्किल था क्योंकि मैं घर में इकलौता हूं इसलिए मेरी मम्मी मुझे कहीं नहीं भेजना चाहती थी लेकिन मेरे पापा के कहने पर वह मान गई। मैं और प्रदीप बेंगलुरू चले गए जब हम लोग बेंगलुरु गए तो हम लोगों ने सबसे पहले वहां पर रहने का बंदोबस्त किया उसके बाद हम लोगों ने कंपनी ज्वाइन की। हम लोग बड़े ही खुश थे हम लोगों ने बेंगलुरु मैं तीन महीने तो ऐसे ही गुजारे लेकिन उसके बाद हम दोनों का ही प्रमोशन हो गया। हम दोनों ने अपनी कंपनी के लिए बहुत अच्छे से काम किया जिसकी वजह से हमारा प्रमोशन हो चुका था। करीब दो वर्ष तक हम लोग उसी कंपनी में काम करते रहे कुछ समय बाद मैंने और प्रदीप ने वह कंपनी छोड़ दी और उसके बाद हम लोगों ने बेंगलुरू में ही दूसरी कंपनी ज्वाइन कर ली। जब हम लोगों ने वहां पर ज्वाइन किया तो ऑफिस के बॉस की लड़की मुझे बहुत पसंद आई लेकिन मुझे उसके बारे में कुछ पता नहीं था उसका नाम चंद्रिका है लेकिन मुझे चंद्रिका के बारे में ज्यादा कुछ पता नहीं था।

    मैं दिल ही दिल उसे चाहने लगा था वह मेरी दिल की धड़कन बढ़ने लगी थी मैं बहुत ज्यादा खुश था मैं जब भी चंद्रिका को देखता तो मेरे चेहरे पर एक मुस्कान सी दौड़ पड़ती। प्रदीप को भी यह बात मैंने बता दी थी तो प्रदीप मुझे हमेशा छेड़ा करता था लेकिन हम लोग कभी भी एक दूसरे की बातों का बुरा नहीं मानते थे। मेरे दिल में चंद्रिका के लिए बहुत ही ज्यादा सम्मान था लेकिन जब मुझे चंद्रिका के बारे में पता चला तो मुझे बहुत धक्का लगा और मैंने प्रदीप को भी इस बारे में बताया। जब मैंने प्रदीप को यह बात बताई की चंद्रिका की शादी हो चुकी है और उसके एक महीने के बाद ही उसका डिवोर्स हो गया था तो प्रदीप मुझे कहने लगा देखो कौशल तुम चंद्रिका के बारे में भूल जाओ तुम जिस रास्ते पर चल रहे हो यह बिल्कुल भी ठीक नहीं है। प्रदीप ऊंचे स्वर में मुझसे बात करने लगा क्योंकि वह हमेशा से ही मेरा अच्छा चाहता था इसलिए वह नहीं चाहता था कि मैं एक तलाकशुदा महिला से शादी करूं लेकिन मेरे दिल से चन्द्रिका का ख्याल उतर ही नही रहा था। मैं चंद्रिका के पीछे पागल होने लगा जब भी मैं उसे देखता तो मेरे दिल की धड़कने बहुत तेज हो जाया करती और मुझे समझ नहीं आता कि मुझे क्या करना चाहिए। मैंने चंद्रिका को अपने दिल की बात कह दी थी क्योंकि मैं बिल्कुल भी रह नहीं पा रहा था। चंद्रिका ने मुझसे कहा देखो कौशल तुम्हारी उम्र मुझसे छोटे है और तुम्हें नहीं मालूम कि इस समाज में मेरी जैसी महिलाओं को कोई भी स्वीकार नहीं करता इसलिए तुम मेरा ख्याल अपने दिल से निकाल दो। वह हमारे बॉस की लड़की थी लेकिन उसके साथ मेरा रिश्ता दोस्ताना किस्म का होने लगा था इसलिए वह मुझसे खुलकर बात करने लगी थी परंतु मैंने उसे बहुत मनाने की कोशिश की और कहा कि मैं तुम्हारा साथ हमेशा दूंगा। मुझे भी क्या मालूम था कि एक दिन हम दोनों की नियत एक दूसरे को देख कर डोल जाएगी। हम दोनों के बीच पहली बार किस हुआ तो उसके बाद हम दोनों एक दूसरे के बिना ना रह सके।

    मैं जिस प्रकार से चंद्रिका को किस कर रहा था उससे पूरे तरीके से उत्तेजित होने लगी और मेरे बिना ना रह सकी। मैंने जैसे ही चंद्रिका के स्तनों को दबाया तो वह भी उत्तेजित होने लगी लेकिन उस दिन हम दोनों ही एक दूसरे के साथ कुछ ना कर सके। मुझे नहीं मालूम था कि जल्द ही मुझे अच्छा मौका मिलने वाला है और चंद्रिका मुझे अपने घर पर ही बुलाने वाली है। जब चंद्रिका ने मुझे अपने घर पर बुलाया तो मैं उससे मिलने के लिए घर पर चला गया। जब मैं उससे मिलने के लिए गया तो चंद्रिका मेरा इंतजार बड़ी बेसब्री से कर रही थी मैंने भी चंद्रिका को गले लगाते हुए किस किया तो वह भी मचलने लगी। वह मुझे कहने लगी क्या आज मुझे तुम प्यार नहीं करोगे? जैसे ही चंद्रिका ने मुझे कहां तो मेरे अंदर से सारे अरमान बाहर की तरफ को निकलने लगे मैंने चंद्रिका के होठो को चूमना शुरू किया और मैंने उसके कपड़ों को उतार कर अपने सामने नंगा कर दिया। वह मेरे सामने नग्न अवस्था में थी उसकी गोरी टांगें और उसके गोरे बदन को देखकर मुझसे बिल्कुल भी रहा नहीं गया। मैंने उसके स्तनों को दबाना शुरू किया और उन्हें चूस कर मैंने अपना बना लिया जिस प्रकार से मैंने चंद्रिका की योनि को चाटा उससे मुझे बहुत मजा आ रहा था। वह पूरी तरीके से उत्तेजित होने लगी थी चंद्रिका की योनि से पानी बाहर निकलने लगा।

    उसके बिना बाल वाली योनि के अंदर जैसे ही अपने लंड को घुसाया तो वह चिल्लाने लगी और उसके मुंह से बड़ी तेज चीख निकली। मेरा लंड जब चंद्रिका की योनि में गया तो मुझे ऐसा एहसास हुआ कि मैं उसे सिर्फ चोदता ही रहूं। मैं उसे बड़ी तेज गति से धक्के मार रहा था मुझे उसे चोदने में बहुत मजा आता मैंने उसके दोनों पैरों को उठाकर उसे काफी देर तक धक्के मारे लेकिन जब उसकी बड़ी सी गांड को मैंने देखा तो मुझे उसे घोड़ी बनाकर चोदने का मन होने लगा। मैंने उसे घोडी बनाकर चोदना शुरू किया उसकी बड़ी गांड मेरे लंड से टकराती तो मुझे और भी ज्यादा मजा आता। उसकी बड़ी गांड जब मेरे लंड से टकराती तो मेरे अंडकोषो से पानी बाहर निकलने लगा था। जैसे ही मेरा वीर्य बाहर निकलने लगा तो मैंने चंद्रिका से कहा मेरा वीर्य गिरने वाला है वह कहने लगी अंदर ही अपने वीर्य को गिरा दो। मैंने अंदर ही अपने वीर्य को गिरा दिया उसके बाद वह मेरी हो गई लेकिन अब तक हम दोनों ने एक-दूसरे के रिश्ते को स्वीकार नहीं किया है।


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