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    तुम यूं ही मेरी चूत मारते रहना

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    Tum yun hi meri chut marte rahna:


    Hindi sex stories, kamukta बचपन से ही मैं बहुत ही बदनसीब रहा हूं बचपन में ही मेरे माता पिता ने मेरा साथ छोड़ दिया और उसके बाद मेरे चाचा चाची ने ही मेरी देखभाल की लेकिन मेरी चाची मुझे बिल्कुल भी पसंद नहीं करती थी। जिस वजह से कई बार मेरे चाचा और चाची के बीच में झगडे भी हो जाते थे लेकिन चाचा भी चाची के आगे बेबस थे परंतु उसके बावजूद भी उन्होंने मुझे हमेशा अपने बच्चों से बढ़कर प्यार दिया और इसी बात को लेकर चाची हमेशा नाराज हो जाती थी। मुझे अब लगता है कि वह भी अपनी जगह ठीक थी और उनकी भी कोई गलती नहीं थी लेकिन चाचा जी भी अपनी जगह सही थे और चाचा जी ने भी मुझे कभी कोई कमी महसूस नहीं होने दी। उन्होंने मुझे एक अच्छे स्कूल में पढ़ाया और उन्होंने मेरे माता-पिता का भी मुझे प्यार दिया कभी भी उन्होंने मुझे किसी चीज की कोई कमी नहीं होने दी लेकिन समय के साथ-साथ सब कुछ बदलता चला गया।


    मैं अब जवान हो चुका था और मेरे सामने अब रोजगार की समस्या थी मुझे भी अपने जीवन में कुछ करना था। एक दिन मैं और चाचा साथ में बैठे हुए थे तो चाचा जी ने मेरे कंधे पर हाथ रखते हुए मुझसे पूछा अमित बेटा तुमने आगे क्या सोचा है अब तो तुम्हारा कॉलेज भी पूरा हो चुका है। मैंने चाचा जी से कहा चाचा जी मैंने तो फिलहाल एक दो कंपनी में इंटरव्यू के लिए अप्लाई किया है लेकिन अभी तक वहां से मुझे कोई कॉल नहीं आई है मैं यहीं कुछ करना चाहता हूं और उसके बाद मैं विदेश जाना चाहता हूं। चाचा कहने लगे हां बेटा तुमने बिलकुल ठीक सोचा है चाचा जी हमेशा ही मुझे कहते कि तुम जो भी करो वह अपनी पूरी मेहनत से किया करो। मैं कहीं ना कहीं उन्हें अपना ग्रुप ही मानता था और जब मेरा एक कंपनी में सलेक्शन हो गया तो वहां पर मुझे तनख्वा तो इतनी अच्छी नहीं मिल रही थी लेकिन फिर भी मैंने सोचा कि मुझे यहां काम कर ही लेना चाहिए। मैंने वहां पर जॉब ज्वाइन कर ली मुझे काम करते हुए अभी एक हफ्ता ही हुआ था कि उसी दौरान एक दिन मेरे ऑफिस में मेरे सीनियर ने मुझसे बड़े ही गलत तरीके से बात की।


    गुस्सा तो मुझे भी बहुत आ रहा था लेकिन मैंने उनकी उम्र का लिहाज किया और उनके साथ मैंने कुछ नहीं कहा परंतु मुझे एहसास हो गया था कि ऑफिस में यदि रहना है तो अपने तौर तरीकों को बदलना पड़ेगा। सब लोग मेरी शराफत का बहुत फायदा उठाया करते थे सब लोगों को लगता कि मैं बहुत ज्यादा शरीफ हूं इस वजह से वह मेरा फायदा उठाते थे। मेरे सीनियर्स मुझसे काफी काम कराया करते थे लेकिन अब मुझे भी ऑफिस में काम करते हुए 3 महीने हो चुके थे मैं भी ऑफिस के तौर तरीकों को जान चुका था इसलिए मैंने भी अपने तरीके को बदला और अब मैं भी ज्यादा किसी की बात नहीं सुनता था। मुझे अपने काम से ही काम रहता था सब कुछ ठीक चल रहा था लेकिन उसी बीच मेरे चाचा जी की तबीयत खराब हो गई। जब मेरे चाचा की तबीयत खराब हुई तो मैं बहुत दुखी हो गया क्योकि मैं उनसे बहुत प्यार करता हूं इसलिए मैं नहीं चाहता कि उनकी तबीयत खराब हो। हमने उनका इलाज एक अच्छा अस्पताल में करवाया लेकिन वह ठीक ही नहीं हो रहे थे मुझे बहुत ज्यादा चिंता होने लगी और मैंने कुछ दिनों के लिए अपने ऑफिस से छुट्टी ले ली थी। उसके बाद चाचा जी को डॉक्टरों ने घर पर ही आराम करने के लिए कहा और चाचा जी अब घर पर ही आराम करने लगे उनकी दवाइयां भी हम लोग घर पर ही उन्हें दिया करते थे। उनकी देखभाल के लिए हमने एक नर्स को भी रख लिया था और वह बड़े ही अच्छे से चाचा जी की देखभाल किया करती थी मैं जब भी चाचा जी के पास बैठा होता तो वह मुझे हमेशा समझाते और कहते बेटा तुम बहुत ही हिम्मत वाले हो और तुम्हें अभी बहुत कुछ करना है। वह मुझे हमेशा ही प्रोत्साहित करते रहते थे जिससे कि मेरे अंदर कुछ करने का जज्बा पैदा होता, चाचा जी तो घर पर ही रहते थे मैं भी अब अपने पुराने ऑफिस को छोड़ चुका था। मैंने नये ऑफिस में जॉइनिंग की वहां पर सब लोग बड़े ही अच्छे से काम क्या करते हैं और वहां पर मेरी काफी लोगों से दोस्ती भी हुई उसी दौरान मेरी मुलाकात गरिमा के साथ हुई।


    जब पहली बार मैं गरिमा से मिला तो मुझे बड़ा ही अनकंफरटेबल सा महसूस हो रहा था वह मुझे कहने लगी क्या तुमने कभी किसी लड़की से बात नहीं की है। मैंने उसे कहा नहीं ऐसा भी नहीं है लेकिन मेरे ज्यादातर दोस्त लड़के ही थे परंतु गरिमा को जब भी मैं देखता हूं तो मुझे उसे देखकर अच्छा लगता है उसके अंदर एक अलग ही कॉन्फिडेंस था वह अपने काम बड़ी मेहनत से किया करती। गरिमा के साथ मेरी अच्छी दोस्ती होने लगी थी मैंने भी सोचा क्यों ना एक दिन गरिमा को अपने घर पर बुलाया जाए, मैंने जब गरिमा को घर पर बुलाया तो मैंने उसे चाचा जी से मिलवाया। गरिमा चाचा जी से मिलकर खुश थी उसे मेरे बारे में ज्यादा कुछ पता नहीं था लेकिन जब वह मेरी चाची से मिली तो वह मेरी चाची को समझ गई कि वह मुझे बिल्कुल भी प्यार नहीं करती। गरिमा ने मुझसे कहा कि तुम्हारे चाचा जी तो बहुत अच्छे हैं और मुझे नहीं मालूम था कि तुम्हारे माता-पिता का देहांत काफी पहले ही हो चुका था लेकिन तुम्हारी चाची मुझे कुछ ठीक नहीं लगी। मैंने गरिमा से कहा नहीं वह भी बहुत अच्छी हैं ऐसा कुछ भी नहीं है तुम्हें शायद गलत लगा होगा। गरिमा मुझे कहने लगी तुम्हें सब कुछ मालूम है लेकिन उसके बावजूद भी तुम अनजान बन रहे हो तुम्हें यह अच्छे से मालूम है कि तुम्हारी चाची तुम्हें बिल्कुल भी पसंद नहीं करती फिर भी तुम मुझसे जानबूझकर यह कह रहे हो कि वह बहुत अच्छी हैं।


    मैंने गरिमा से कहा नहीं गरिमा ऐसा कुछ नहीं है वह मुझे कहने लगी तुम मुझे मेरे घर तक छोड़ दोगे या फिर मैं खुद ही चले जाऊं मैंने गरिमा से कहा नहीं मैं तुम्हें तुम्हारे घर तक छोड़ देता हूं। मैंने गरिमा को कार में बैठाया और मैं गरिमा के घर तक उसे छोड़ने के लिए चला गया जैसे ही गरिमा का घर आया गरिमा मुझे कहने लगी आपको मैं अपने मम्मी पापा से मिलवाती हूं। मैंने उसे कहा नहीं मैं कभी और आऊंगा तब तुम्हारे मम्मी-पापा से मिलूंगा लेकिन अभी मुझे घर जाना होगा। गरिमा कहने लगी ठीक है हम लोग कल ऑफिस में मिलते हैं अगले दिन मैं जब ऑफिस में गया तो गरिमा मुझे देख कर बहुत खुश हो रही थी। उसके चेहरे पर ऐसी मुस्कान मैंने उससे पहले कभी नहीं देखी थी उसकी खुशी का कारण मुझे नहीं मालूम था कि वह इतनी खुश क्यों है मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था। मैंने गरिमा से पूछा तुम आज बहुत खुश नजर आ रही हो वह मुझे कहने लगी आज पता नहीं मुझे क्यों इतनी खुशी महसूस हो रही है। मैंने गरिमा से कहा कोई तो बात होगी जो तुम्हें इतनी खुशी महसूस हो रही है वह कहने लगी मैं तुम्हें लंच टाइम में बताऊंगी। लंच में जब हम दोनों साथ में बैठे हुए थे तो गरिमा ने मेरे हाथ को पकड़ा और मुझे कहने लगी अमित मैं तुमसे प्यार करने लगी हूँ मैंने सोचा मैं तुम्हें अपने दिल की बात बता दूं। मैंने गरिमा से कहा लेकिन तुम्हें मुझ में ऐसा क्या लगा जो तुम मुझसे प्यार करने लगी हो तुम्हें तो मुझसे भी अच्छे लड़के मिल जाएंगे गरिमा कहने लगी लेकिन उनमें वह बात नहीं है जो तुम्हारे अंदर है। जब गरिमा का साथ मिला तो मुझे बहुत खुशी हुई। हम दोनों एक दूसरे से प्यार करने लगे थे मेरे जीवन में भी इतने वर्षों बाद खुशी आई थी गरिमा मेरा बड़ा ध्यान रखा करती।


    गरिमा ने मुझे कहा मैं तुम्हारा हमेशा ध्यान रखूंगी और तुम्हें किसी भी चीज की कभी कमी नहीं होने दूंगी हम दोनों के बीच प्यार दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा था। एक दिन हम दोनों के बीच वह सब कुछ हुआ जो मैं कभी नहीं चाहता था लेकिन उस दिन मेरे और गरिमा के बीच में सेक्स संबंध बने। हम दोनों ने एक दूसरे के शरीर को बड़े ही अच्छे से महसूस किया वह समझ चुकी थी कि मुझे उससे क्या चाहिए उसने मेरे होठों को को किस किया तो मैंने भी उसे बिस्तर पर लेटा दिया और उसके बदन से सारे कपड़े उतार दिए और मैंने उसके स्तनों को अपना मुंह में लेना शुरू किया तो मुझे बड़ा अच्छा महसूस होने लगा। उसके गोरे स्तनों को जब मैं अपने मुंह में लेता तो मेरे अंदर की गर्मी बढ जाती मैंने जैसे ही उसकी योनि को चाटना शुरू किया तो उसकी चूत से गिला पदार्थ बाहर की तरफ आने लगा तो मुझे बड़ा मजा आ रहा था। मैं उसकी योनि को चाटे जा रहा था उसकी चूत गिली होने लगी तो मैंने अपने लंड को धक्का देते हुए उसकी योनि के अंदर प्रवेश करवा दिया जैसे ही मेरा लंड उसकी योनि के अंदर घुसा तो उसे बड़ा मज़ा आने लगा। वह मुझे कहने लगी तुम और भी तेजी से मुझे चोदो मै उसे बड़ी तेज गति से धक्के दिए जा रहा था जिससे कि उसकी चूत से खून निकलने लगा।


    मैंने जब देखा कि उसकी योनि से खून निकल रहा है तो मुझे और भी मजा आने लगा मैंने उसके दोनों पैरों को कंधों पर रखा और उसे बड़ी तेज गति से धक्के देने शुरू कर दिए उसकी चूत से लगातार खून का बहाव होता जाता। जब मैंने उसे घोड़ी बनाकर चोदना शुरू कर दिया तो उसकी चूत से खून निकल रहा था लेकिन उसके अंदर से जो गर्मी निकलती उसे मुझे महसूस करने में बड़ा मजा आता। मैं उसे तेज गति से धक्के दिए जा रहा था वह भी मुझसे अपनी चूतडो को मिलाती उसका पूरा शरीर हिल जाया करता लेकिन वह भी हार मानने को तैयार नहीं थी वह मेरा पूरा साथ दे रही थी। करीब 5 मिनट बाद जब मेरे अंदर से मेरा वीर्य बाहर निकला तो मैंने उसे गरिमा की चूतडो के ऊपर गिरा दिया जैसे ही मेरा वीर्य गिरा तो मुझे लगा मेरी पूरी ताकत बाहर निकल आई हो। वह मुझे कहने लगी आज के बाद हम दोनों ऐसे ही करते रहेंगे उसके बाद हम दोनों का जब भी मन होता तो हम दोनों एक दूसरे के साथ सेक्स कर लिया करते।



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