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    प्यासी विनीता दीदी

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    हाय फ्रेंड्स मेरी बड़ी दीदी विनीता की शादी हमने बड़े धूम धाम से की थी. पर शादी के २ साल बाद ही एक हादसे ने दीदी की जिंदगी बदल दी. एक दिन मुझे दीदी का फ़ोन आया की जीजाजी का रोड एक्सीडेंट हो गया. मैं जल्दी जल्दी हॉस्पिटल पंहुचा. उस एक्सीडेंट में जीजाजी को पैरालिसिस हो गए. अब इस घटना को एक साल बीत गए है. मैं दीदी के घर पर ही शिफ्ट हो गया ताकि उनकी मदद सकू. पूरा इलाज का खर्च मैं उठा रहा था. जीजाजी एक रूम में बेड में पड़े रहते है.
    एक बार मैं और दीदी टीवी पर एक मूवी देख रहे थे. मूवी में अचानक एक सेक्सी सीन आने लगा. वो सीन देख कर मेरा लंड खड़ा हो गया और मेरे लोअर में तम्बू बन गया. मैंने दीदी की तरफ देखा वो टीवी का सीन बड़े चाव से देख रही थी और दीदी को पसीना भी आ रहा था. मैं समझ गया की दीदी को सेक्स की तलब लगी है. सीन देखते देखते दीदी मेरी तरफ देखि. उस समय दीदी की आँखों में हवस नजर आ रही थी. दीदी जैसे मुझसे चुदाई की भीख मांग रही थी. फिर दीदी की नजर मेरे पैंट में बने तम्बू पर चला गया.
    दीदी: हाय राम विक्की ये क्या है…
    मैं: सॉरी दीदी….
    दीदी: कोई नहीं भाई तेरी उम्र में ऐसा होता है… वैसा बड़ा खतरनाक हथियार लग रहा है तेरा…
    मैं: हाँ दीदी… मेरा हथियार ८” बड़ा है और ३” मोटा..
    दीदी: ओह्ह्ह्हह भाई… बहुत जालिम है तेरा हथियार


    दोस्तों मुझे समझ में नहीं आया की दीदी ऐसा बात क्यू कर रही है. पर उस दिन के बाद दीदी की ठरक और बढ़ गयी थी. अब दीदी मुझे अपना बदन दिखा कर उत्तेज्जित करने की कोशिश करने लगी. विनीता दीदी ३२ साल की गदरायी हुई औरत है. ब्लाउज में कैद दीदी के स्तन किसी बड़े बड़े तरबूज के तरह लगती है… तनी और दूध से भरी हुई. शादी से पहले दीदी थोड़ी स्लिम थी. पर शादी के बाद दीदी का बदन गदरा गया था… हर जगह से उनका बदन भर गया था. जीजाजी दीदी को बहुत चोदते थे. २ साल में ही दीदी की ३४ की चूचियां अब ३८ की हो चुकी है. ३४ की चुत्तड़ अब फ़ैल कर ४० की भारी गांड बन चुकी है.
    फिर आया मेरा बहनचोद बनने का दिन. मैं संडे की सुबह उठा और पेपर पढ़ने लगा. थोड़ी देर में दीदी आयी और वही पर झाड़ू देने लगी. दीदी ने उस दिन रेड कलर की साड़ी पहनी थी. उस साड़ी में दीदी बहुत ही सेक्सी लग रही थी. ब्लाउज स्लीवलेस और बैक ओपन था. पीछे पीठ पर सिर्फ एक पतली सी डोर से ब्लाउज बंधी थी. ब्लाउज काफी डीप था, जिसकी वजह से जब दीदी झाड़ू लगा रही थी, तो उनका क्लीवेज पूरा दिख रहा था. गोरी गोरी भरी हुई विशाल चूचियां मेरा लंड खड़ा कर रही थी. दीदी की गोरी और पतली कमर क़यामत लग रही थी. दीदी ने साड़ी बहुत निचे बांध रखा था, अपनी बूर के जस्ट ऊपर.. उसके बाद दीदी पोछा भी लगाने लगी. अब तो दीदी ने हद कर दी. उनकी साड़ी का पल्लू गिर गया था.. पर वो जानबूझ कर उठा नहीं रही थी.. पसीने से भीगा हुआ ब्लाउज और उसके अंदर कैद बड़े बड़े दूध… मेरा हालत ख़राब कर रहे थे… दीदी अब पीछे होकर पोछा लगा रही थी… मुझे अब दीदी की साड़ी में कैद भारी गांड दिख रही थी… और गोरी गोरी पीठ पर पसीने के कुछ बूंदे बहुत ही कामुक लग रहे थे… काम ख़तम करके दीदी मेरे पास ही सोफे में बैठ गयी और पल्लू हटा कर पसीना सुखाने लगी. दीदी की बड़ी बड़ी अधनंगी चूचियों को देख कर मेरा हलक सुख रहा था… दीदी ये सब देख रही थी…
    दीदी: भाई अच्छे से देख ले…
    मैं: क्या दीदी….
    दीदी: वही जो अपनी बहन की जवानी ताड़ रहा है इतने देर से
    मैं: नहीं दीदी ऐसा कुछ नहीं है
    दीदी: देख भाई… तूने मेरे लिए बहुत कुछ किया है… मैं भी तेरे लिए कुछ करना चाहती हूँ
    मैं: मतलब…
    दीदी: भाई तेरे जीजाजी तो अब कुछ कर नहीं सकते.. और मेरी जवानी सुखी जा रही है… और मुझे पता है तेरी उम्र में लड़को की भी कुछ जरूरते होती है
    मैं: ये सब क्या बोल रही हो दीदी आप
    दीदी: भाई अब तू ही अपनी बहन को एक मर्द का प्यार दे… तेरी बहन एक साल से चुदी नहीं है… मुझे अपनी बिस्तर पर ले चल और रगड़ कर चोद अपनी बहन को
    मैं: मैं ऐसा नहीं कर सकता दीदी
    दीदी ने पैंट के ऊपर से मेरा लंड पकड़ लिया
    दीदी: भाई तू ही अपनी बहन की जवानी को बचा सकता है… वर्ना तेरी बहन चुदाई की आग में जलती रहेगी… डाल दे अपना ये मुसल लंड मेरी चुत में और बन जा बहनचोद..
    दीदी मेरे लंड को सहलाने लगी.. मुझे भी मजा आ रहा था… और ये सोच कर मैं भी रोमांचित हो रहा था की विनीता जैसी गदरायी माल को आज चोदने का मौका मिलेगा.. दीदी ने मेरी पैंट उतार दी. मेरा विकराल लौड़ा देख कर दीदी की ठरक और बढ़ गयी. दीदी मेरा लंड बहुत तेजी से सोठने लगी… आह्ह्ह्हह दीदी… मजा आ रहा है…. फिर दीदी में मेरा लंड अपने मुंह में ले लिया और मस्ती से चूसने लगी. आज दीदी टॉप क्लास की रंडी लग रही थी.. मेरा लंड ज्यादा देर तक संभाल नहीं पाया और झड़ गया..
    दीदी अब उठी और मुझे मेरे कमरे में ले गयी.. मैं अभी भी झिझक रहा था… दीदी ने मेरा हाथ अपनी चूचियों पर रख दिया.. और मुझे किश करने लगी…. दीदी के तेज सांसो के साथ दीदी के दूध उछल रहे थे..
    दीदी: भाई सोच मत… मुझे अपनी दीदी मत समझ… अपनी बीवी मान ले… या अपनी रखैल मान ले…….
    दीदी की बात सुनकर कर मैं भी जोश में आ गया और दीदी की चूचियों को दबाने लगा.. बहुत ही सॉफ्ट और भरी हुई चुहियाँ थी… अह्हह्ह्ह्ह भाई… अब जागा है मेरा शेर… और दबा भाई इन चूचियों चूस कर मसल दे… बहुत दिनों से किसी मर्द ने छुआ नहीं है इन्हे… अह्ह्ह्हह भाई… मैं बहुत जोर जोर दीदी की चूचियां मसल रहा था… मैं दीदी की नंगी पीठ को किश करने लगा…. दीदी की आहे अब तेज हो रही थी… फिर मैंने ब्लॉउस की डोर खोल दी.. अब दीदी के विशाल चूचियां नंगी आजाद हो गयी.
    मैं: उफ्फ्फ्फ़ दीदी.. कितनी बड़ी बड़ी चूचियां है आपकी… १०-१० किलो की एक एक चूचियां है….
    दीदी: भाई सब तेरा है… अच्छे से दबा दबा कर चूस….
    इतनी बड़ी चूचियां थी की मेरे हाथो में नहीं आ रही थी. मैंने अब एक चूची का निप्पल मुंह में ले लिया और चूसने लगा…. अह्ह्ह्हह्हह ओह्ह्ह्ह भाई… और दूसरे हाथ से दूसरी चूची को दबाने लगा….. दीदी का कामुकता अब बढ़ने लगी थी… मैं जोर जोर से सक कर रहा था चूचियों को…


    मैं दीदी के हर अंग को चुम रहा था. फिर मैंने दीदी की साड़ी और पेटीकोट उतार दी. अब दीदी के गोरे बदन पर सिर्फ एक ब्लैक कलर की पैंटी थी. पैंटी सिर्फ किसी तरह बूर को ढकी हुई थी और पीछे दीदी की भरी चुत्तड़ो के बीच में फसी हुई थी. मैं दीदी की पतली कमर को चुम रहा था और उनकी चुत्तड़ो को मसल रहा था… आह्ह्ह्ह भाई… दीदी की चौड़ी और भरी हुई गांड को दबाने में बहुत मजा आ रहा था.. मैं कमर को चूमते हुए धीरे धीरे निचे आ रहा था… दीदी किसी तरह दिवार के सहारे खड़ी थी और मेरे बालो को सहला रही थी… फिर मैंने दीदी की चुत पर चड्डी के ऊपर से ही किश कर दिया और चुत्तड़ो को जोर से दबा दिया… दीदी की बहुत जोर से आहे निकल आयी….. ओह्ह्ह्हह्ह्ह्ह मेरे भाई….. देख कितनी प्यासी है तेरी बहन की चुत… दीदी की बूर बहुत ही गीली हो चुकी थी. फिर मैं दीदी की मोटी नंगी टांगों को सहला और किश कर रहा था… अब मैंने दीदी की चड्डी भी उतार दी… अब विनीता दीदी का गदराया हुआ नंगा जिस्म मेरे सामने था… दीदी ने आज के लिए ही अपनी चुत क्लीन शेव की थी… दीदी की चुत बहुत ही सुन्दर लग रही थी… मैंने एक उंगली दीदी की चुत में डाल दी…
    दीदी: अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह भाई उंगली क्यू कर रहा हरामी… लंड पेल दे जल्दी से इस बूर में… कब से प्यासी है तेरी बहन.. आ चोद ना जल्दी अपनी रंडी को…
    फिंगरिंग करके दीदी की बूर बहुत ही गीली हो चुकी थी… ये सही टाइम था चुदाई स्टार्ट करने का… मै दीदी के पीछे आ गया और उनकी भारी गांड को पकड़ लिया… फिर मैंने दीदी को झुकने को बोला, अब दीदी की बूर आसानी से मुझे दिखानी लगी. मैंने दीदी की बूर की फांको को फैलाया और अपना मोटा लंड दीदी कि बूर में पेल दिया… दीदी की बूर बहुत टाइट थी… लंड के २” अंदर जाते ही दीदी की चीख निकल आयी….
    दीदी: उईईईईई माँ…. फाड़ दिया रे तूने मेरी चुत…
    मैं: अभी कहा दीदी… अभी तो सिर्फ थोड़ा ही गया….
    मैंने एक शार्ट मारा तो लंड बूर में आधा घुस गया… दीदी अब छटपटाने लगी….. मैं पीछे से दीदी की पीठ को किश कर रहा था और चूचियों को मसल रहा था.. फिर मैंने दीदी की कमर को जोर से पकड़ा और जोर से धक्का मारा… मेरा ९” का लौड़ा दीदी की बूर को चीरता हुआ पुअर घुस चूका था….. दीदी को बहुत दर्द हो रहा था… मैं दीदी की झूलती हुई चूचियों को दबा दबा कर रिलैक्स कर रहा था… मैं अब धीरे धीरे अपना लंड दीदी के बूर में अंदर बाहर करने लगा…. और दीदी डॉगी स्टाइल में मस्त चुदवा रही थी. दीदी की बड़ी गांड को पकड़ कर चोदने का अलग ही मजा था… दीदी की भारी चुत्तड़ जब मेरे कमर से टकराती तो मेरा जोश और बढ़ जाता… अब दीदी की कामुक आहे भी रूम में गूंजने लगी…. आअह्ह्ह्हह मेरे राजा….. और जोर से मार मेरी चुत… उउउउउउ मजा आ गया… आईईईई
    मैं बहुत तेजी से दीदी की बूर चोद रहा था… दीदी की बड़ी बड़ी चूचियों को दबा दबा कर अपना लंड दीदी की बूर में डाल रहा था… ओह्ह्ह्हह माय स्वीट ब्रदर… मेक मी योर स्लट बेबी… फ़क मी…. अह्हह्ह्ह्ह भाई
    फिर मैं पलंग पर बैठ गया, विनीता दीदी ने मेरा लंड अपनी गीली चुत पर रखा और बैठ गयी. दीदी की दोनों टांगे मेरे कमर को जकड़ी हुई थी और हाथ मेरे गले को.. दीदी गांड उठा कर मेरा लंड अपनी बूर में ले रही थी.. दीदी मुझे किश भी कर रही थी और मजे से चुदवा भी रही थी..
    दीदी: ओह्ह्ह्हह्ह भाई….. अच्छे से भोग अपनी दीदी का बदन…. अह्ह्ह्ह… फ़क मी डार्लिंग..
    दीदी रुकने का नाम नहीं ले रही थी, वो उछल उछल कर मेरे लंड पर बैठ रही थी. ऐसा लग रहा थी की दीदी मेरी चुदाई कर रही है. पर मजा बहुत आ रहा था. दीदी के गदराये बदन का सम्भोग करना अलग ही सुख दे रहा था… मैं दीदी की एक चुची को चूस रहा था और दूसरी चुची को जोर जोर से दबा रहा था… चुदाई की फच फच की आवाज पुरे कमरे में गूँज रही थी… अह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्ह भाई फक मी बेबी.. हर शॉट के साथ दीदी की बड़ी बड़ी चूचियां हवा में उछल रही थी जो मेरे अंदर और जोश भर रही थी…
    दीदी: उईईईईई ओह्ह्ह्हह्ह भाई बहुत दिनों बाद चुद रही है तेरी बहन….
    मैं: उफ्फफ्फ्फ़ दीदी बहुत ही कामुक बदन है आपका.. बहुत मजा आ रहा है आपको चोद कर.. क्या बड़े बड़े चुच्चे और गांड है आपकी
    दीदी: आअह्ह्ह्हह भाई ऐसे ही पेलते रह मुझे… अब से डेली तुझे ही चोदना है अपनी दीदी को.. चाहे तू मुझे अपनी रखैल बना ले या रंडी… बस मेरी प्यास बुझा दे…
    मैं: उफ्फफ्फ्फ़ दीदी अब इस गदराये हुए जवान बदन को सिर्फ मैं ही भोगूँगा
    दीदी: अह्हह्ह्ह्ह भाई.. और जोर से चोद भाई.. मार तगड़े तगड़े शॉट्स…


    मैंने अब पूरी ताकत लगा दी चुदाई में.. मेरी लंड पूरी रफ़्तार से दीदी की बूर की चुदाई कर रहा था….. दीदी के चिल्लाने के आवाज अब जोर हो चुकी….. ओह्ह्ह्हह आआ आ उउउउउउ फ़क मी… फ़क मी हार्डर डार्लिंग… आआह्ह्ह्ह भाई…. उईईईईई मेरे आने वाला है भाई…. अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह भाई और तेज… और तेज चोद भाई… ओह्ह्ह्हह्ह मेरी रांड दीदी…. मेरा भी गिरने वाला है…. ओह्ह्ह्हह भाई…. और तेजी से मार मेरी चुत… अह्ह्ह्ह भाई चोद अपनी रंडी को… गिरा दे अपना माल मेरी बूर में ही. अअअअअ हहहहहह भाई ओह्ह्ह्हह्ह भाई मैं तो गयी… उउउउउउउ ओह्ह्ह्हह…. अह्हह्ह्ह्ह दीदी मैं भी ख़तम हो गया…



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